सीबीआई ने बीएसएनएल भोपाल के 2 इंजीनियरों को ₹75,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 27 अगस्त 2026 को भोपाल में बीएसएनएल के मुख्य इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) को ₹75,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह राशि ₹2 लाख की कथित अवैध माँग का पहला हिस्सा थी, जो जबलपुर की एक ठेकेदार फर्म से वसूली जा रही थी।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोप है कि बीएसएनएल भोपाल में तैनात दोनों अधिकारियों ने जबलपुर की एक फर्म से रिश्वत की माँग की, जो बीएसएनएल के ऑपरेशन एवं व्यापक रखरखाव (ओसीएम) और इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन से जुड़े कार्य करती थी। सीबीआई के अनुसार, दोनों आरोपियों ने अपने और एक सह-आरोपी के लिए ₹2-2 लाख की अवैध रिश्वत की माँग रखी थी।
यह रिश्वत फर्म के 14 अलग-अलग कार्यों के लंबित बिलों को प्रोसेस करने के एवज़ में माँगी गई थी। गौरतलब है कि सरकारी ठेकेदारों से बिल पास कराने के नाम पर रिश्वत वसूलने के ऐसे मामले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बार-बार सामने आते रहे हैं।
सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी
सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाया और भोपाल में दोनों आरोपी अधिकारियों को उस समय रंगे हाथ पकड़ा, जब वे माँगी गई ₹2 लाख की रिश्वत के पहले हिस्से के रूप में ₹75,000 स्वीकार कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने भोपाल, लखनऊ और कानपुर में आरोपियों के आवासों और कार्यालयों पर तलाशी अभियान शुरू किया।
रांची में भी सीबीआई की कार्रवाई
एक अलग मामले में, सीबीआई ने रांची स्थित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के क्षेत्रीय वेतन और लेखा कार्यालय के तीन अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया। इनमें वरिष्ठ लेखा अधिकारी संतोष कुमार महतो, सहायक लेखा अधिकारी सुनील कुमार और सहायक लेखा अधिकारी सुजीत कुमार सिंह शामिल हैं।
आरोप है कि इन तीनों ने अपनी यूनिट के सहकर्मियों के विभिन्न भत्ता बिलों का भुगतान जारी करने के लिए एक कांस्टेबल से ₹48,000 से अधिक की रिश्वत माँगी और ली। सीबीआई ने इस मामले में 27 अगस्त से एक दिन पूर्व, बुधवार को प्राथमिकी दर्ज की थी।
आगे की कार्यवाही
सीबीआई के बयान के अनुसार, रांची में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को शुक्रवार को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। भोपाल मामले में भी जाँच जारी है और तलाशी अभियान से और साक्ष्य मिलने की संभावना है। यह एक दिन में सीबीआई की दोहरी कार्रवाई सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एजेंसी के बढ़ते दबाव को दर्शाती है।