जोधपुर SN मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में 19 छात्र सस्पेंड, 5 पर 3 महीने की पाबंदी
सारांश
मुख्य बातें
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर के प्रशासन ने 3 नवंबर 2026 को रैगिंग और दुर्व्यवहार के आरोपों की जाँच के बाद एक जूनियर रेजिडेंट सहित 19 छात्रों को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज एक शिकायत के बाद की गई, जिसमें एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने सीनियर्स पर उत्पीड़न और अनुचित दबाव डालने के आरोप लगाए।
निलंबन का विवरण और अवधि
कॉलेज प्रशासन ने दो श्रेणियों में सस्पेंशन आदेश जारी किए हैं। 1 जूनियर रेजिडेंट सहित 5 छात्रों को 3 महीने के लिए निलंबित किया गया है, जबकि शेष 14 छात्रों पर 1 महीने का प्रतिबंध लगाया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान इन सभी को क्लिनिकल पोस्टिंग, शैक्षणिक गतिविधियों और शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लेने से वंचित किया गया है। साथ ही, उनके कॉलेज हॉस्टल, लाइब्रेरी और रीडिंग रूम में प्रवेश पर भी पूर्ण रोक लगा दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम और शिकायत का आधार
यह विवाद 28 अक्टूबर को कॉलेज परिसर में आयोजित 'क्लीन कैंपस ड्राइव' के दौरान सामने आया। जूनियर छात्रों के अनुसार, 2025 बैच के सीनियर छात्र उन्हें क्लीन-शेव रहने, एक विशेष हेयरस्टाइल अपनाने, लंबे समय तक खड़े रहने और फॉर्मल कपड़े पहनने के लिए बाध्य कर रहे थे। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें डराया-धमकाया गया, अपमानित किया गया और मनमाने नियम थोपे गए।
इसके बाद पीड़ित छात्रों ने UGC एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमिटी ने जाँच शुरू की। जाँच में आरोपी छात्रों को गंभीर दुर्व्यवहार, अभद्र आचरण और जूनियर छात्रों पर अनुचित मानसिक दबाव डालने का दोषी पाया गया, जिसके बाद प्रिंसिपल कार्यालय ने निलंबन के आदेश जारी किए।
राजस्थान में रैगिंग का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान के बाड़मेर स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ने भी 80 छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी। उस मामले में सीनियर छात्रों पर जूनियर्स को अश्लील व्हाट्सएप संदेश भेजने, बदसलूकी करने और मानसिक उत्पीड़न करने के आरोप थे। यह राज्य में चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में रैगिंग की दूसरी बड़ी घटना है, जो कम समय के भीतर उजागर हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग विरोधी नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि UGC और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के दिशानिर्देशों के बावजूद ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं।
प्रशासन का रुख और आगे की राह
कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नए छात्रों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, संस्थान में एंटी-रैगिंग निगरानी को और कड़ा किया जाएगा। आगामी दिनों में संभव है कि मामला उच्च शिक्षा अधिकारियों के संज्ञान में भी आए और राज्यस्तरीय समीक्षा की माँग उठे।