SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा का BJP पर हमला: 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा को बताया हास्यास्पद, धीरेंद्र शास्त्री पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (SP) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा पर तीखा हमला बोला और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया बयान की कड़ी निंदा की। वर्मा ने आरोप लगाया कि जो पार्टी खुद लोकतंत्र को कमज़ोर करने की आरोपी है, वह 'लोकतंत्र बचाने' का दावा कर रही है — और यह पूरे देश के लिए हंसी का विषय बन चुका है।
धीरेंद्र शास्त्री पर सपा का पलटवार
आशुतोष वर्मा ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री का बयान 'बेहद निंदनीय' है। उनके अनुसार शास्त्री एक धार्मिक उपदेशक हैं और उनके बयानों को अत्यधिक गंभीरता नहीं दी जानी चाहिए। वर्मा ने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा कि जो व्यक्ति खुद को ईश्वर का परम भक्त बताता है, वह विदेशों में महंगी गाड़ियों और आलीशान यॉट में घूमता नज़र आता है — और इस प्रकार विलासितापूर्ण जीवन जी रहा है।
वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री BJP के इशारों पर काम कर रहे हैं और वास्तव में पार्टी की 'कठपुतली' की भूमिका निभा रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी दल ने शास्त्री और BJP के बीच कथित संबंधों पर सवाल उठाए हों।
BJP की पदयात्रा पर सवाल
सपा प्रवक्ता ने BJP की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' राजनीतिक पदयात्रा को 'बेहद हास्यास्पद' करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ से दो वर्षों से देश के मतदाताओं को भ्रमित किया जा रहा है, और भाजपा की इस मुहिम पर पूरा देश हंस रहा है। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं।
अखिलेश यादव का वाराणसी दौरा
वर्मा ने यह भी बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का 31 अक्टूबर को वाराणसी में एक बड़ी रैली आयोजित करने का कार्यक्रम था, जिसे खराब मौसम और अन्य कारणों से रद्द करना पड़ा। अब 3 नवंबर को अखिलेश यादव वाराणसी पहुँचकर पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरे में वे बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने भी जाएँगे।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'भाजपा समर्थित धार्मिक नेताओं और खुद को संत बताने वालों का पाखंड सामने आता रहता है। जो कोई भी भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच बंटवारा पैदा करने की कोशिश करता है, वह सच्चा धर्मगुरु नहीं हो सकता।' राजपूत ने आगे कहा, 'ऐसा व्यक्ति केवल लोगों को गुमराह कर सकता है। धीरेंद्र शास्त्री की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है — और भगवान राम व भगवान कृष्ण के बीच फूट डालने की कोशिश के लिए समाज के हर वर्ग को उनकी निंदा करनी चाहिए।'
आगे की राजनीति
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोर्चा खोलता नज़र आता है, जहाँ विपक्ष धार्मिक और लोकतांत्रिक दोनों मुद्दों पर BJP को घेरने की कोशिश में है। अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे और कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।