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बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग कांड: 80 छात्रों पर कार्रवाई, 13 को हॉस्टल से स्थायी निष्कासन

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बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग कांड: 80 छात्रों पर कार्रवाई, 13 को हॉस्टल से स्थायी निष्कासन

सारांश

राजस्थान के बाड़मेर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का बड़ा कांड सामने आया है — सीनियर छात्रों ने कथित तौर पर जूनियर्स को अश्लील संदेश भेजे और मानसिक उत्पीड़न किया। प्रशासन ने 80 छात्रों पर कार्रवाई की, जिसमें 13 का हॉस्टल से स्थायी निष्कासन शामिल है।

मुख्य बातें

बाड़मेर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में सीनियर छात्रों ने कथित तौर पर 130 जूनियर छात्रों को अश्लील संदेश भेजे और मानसिक उत्पीड़न किया।
एंटी-रैगिंग कमेटी की जाँच के बाद 80 विद्यार्थियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
13 छात्रों को हॉस्टल से स्थायी निष्कासन , 6 को 60 दिन और 7 को 30 दिन के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित किया गया।
11 छात्रों को 30 दिन के लिए हॉस्टल से निलंबित और 34 छात्रों को कड़ी चेतावनी दी गई।
सभी दोषी छात्रों को एक वर्ष तक कॉलेज के खेल व सांस्कृतिक आयोजनों से प्रतिबंधित किया गया।
अनूप गुर्जर के अनुसार परिसर में 250 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

राजस्थान के बाड़मेर स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें सीनियर छात्रों ने कथित तौर पर जूनियर छात्रों को अश्लील संदेश और आपत्तिजनक सामग्री भेजी तथा उन्हें गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया। प्रभावित छात्रों की शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने एंटी-रैगिंग कमेटी की जाँच और सिफारिशों के आधार पर 80 विद्यार्थियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

मुख्य घटनाक्रम

कॉलेज प्रशासन को जानकारी मिली कि सीनियर छात्र सोशल मीडिया के ज़रिये 2026 बैच के 130 जूनियर छात्रों से परिचय माँग रहे थे और इस दौरान अश्लील संदेश व आपत्तिजनक सामग्री भेजी जा रही थी। जैसे ही यह मामला प्रकाश में आया, एंटी-रैगिंग कमेटी ने तत्काल जाँच शुरू की और आरोपों की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की सिफारिश की।

अनुशासनात्मक कार्रवाई का विवरण

कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई बहु-स्तरीय है। 13 विद्यार्थियों को हॉस्टल से स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया है, जबकि 6 छात्रों को 60 दिनों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित किया गया है। 7 अन्य छात्रों को 30 दिनों तक कक्षाओं में प्रवेश से वंचित कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, 11 छात्रों को 30 दिनों के लिए हॉस्टल से निलंबित किया गया है और 34 छात्रों को कड़ी चेतावनी दी गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस तरह के व्यवहार पर तत्काल निष्कासन की कार्रवाई होगी। कार्रवाई के दायरे में आए सभी 80 छात्रों को एक वर्ष के लिए कॉलेज के खेल और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

प्रिंसिपल का बयान और निगरानी व्यवस्था

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनूप गुर्जर ने बताया कि परिसर में गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए 250 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, 'हाल ही में, सीनियर स्टूडेंट्स को सोशल मीडिया पर 130 जूनियर स्टूडेंट्स के बैच से इंट्रोडक्शन माँगते हुए देखा गया। जैसे ही हमें यह जानकारी मिली, तुरंत एक्शन लिया गया।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एंटी-रैगिंग कमेटी ने घटना की विधिवत जाँच की और आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई। गौरतलब है कि 2026 बैच के 5 जूनियर छात्रों को भी चेतावनी देकर उचित आचरण बनाए रखने की हिदायत दी गई है।

आम छात्रों पर असर और व्यापक संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के मेडिकल संस्थानों में रैगिंग की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) सहित विभिन्न नियामक संस्थाएँ कड़े दिशानिर्देश जारी कर चुकी हैं। बाड़मेर कॉलेज की इस त्वरित कार्रवाई को एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।

कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिसर में किसी भी प्रकार की रैगिंग, अभद्र भाषा या मानसिक उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

क्या होगा आगे

कॉलेज प्रशासन के इस कदम के बाद राज्य के अन्य मेडिकल संस्थानों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे अपनी एंटी-रैगिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ करें। निलंबित छात्रों की शैक्षणिक स्थिति और उनके पुनः प्रवेश की शर्तें भविष्य में प्रशासन द्वारा निर्धारित की जाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि डिजिटल और मनोवैज्ञानिक रूप भी ले चुकी है — और नियमावलियाँ इस बदलाव के साथ कदम मिलाने में पिछड़ रही हैं। 80 छात्रों पर कार्रवाई निस्संदेह साहसिक है, लेकिन असली सवाल यह है कि जिन 130 जूनियर छात्रों को निशाना बनाया गया, उनकी मानसिक स्वास्थ्य सहायता का क्या इंतज़ाम किया गया। दंडात्मक कार्रवाई ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं — जब तक संस्थागत संस्कृति नहीं बदलती, रैगिंग की जड़ें बनी रहेंगी।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग कांड में क्या हुआ?
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर में सीनियर छात्रों ने कथित तौर पर सोशल मीडिया के ज़रिये 2026 बैच के 130 जूनियर छात्रों को अश्लील संदेश और आपत्तिजनक सामग्री भेजी तथा उन्हें मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया। एंटी-रैगिंग कमेटी की जाँच में आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद 80 छात्रों पर कड़ी कार्रवाई की गई।
कितने छात्रों पर क्या कार्रवाई हुई?
कुल 80 छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। 13 को हॉस्टल से स्थायी रूप से निष्कासित किया गया, 6 को 60 दिन और 7 को 30 दिन के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित किया गया। 11 छात्रों को 30 दिन के लिए हॉस्टल से निलंबित और 34 को कड़ी चेतावनी दी गई।
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने क्या कहा?
प्रिंसिपल डॉ. अनूप गुर्जर ने बताया कि जैसे ही सोशल मीडिया पर सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर्स से परिचय माँगने की सूचना मिली, तत्काल कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि परिसर में 250 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और किसी भी प्रकार की रैगिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या जूनियर छात्रों पर भी कोई कार्रवाई हुई?
हाँ, 2026 बैच के 5 जूनियर छात्रों को भी चेतावनी दी गई है और उन्हें उचित व्यवहार बनाए रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर अनुचित व्यवहार स्वीकार्य नहीं होगा।
रैगिंग में शामिल छात्रों पर पाठ्येतर गतिविधियों पर कितने समय का प्रतिबंध लगाया गया?
कार्रवाई के दायरे में आए सभी 80 छात्रों को एक वर्ष के लिए कॉलेज के खेल और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह प्रतिबंध अन्य दंडों के अतिरिक्त लगाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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