केएमसी चुनाव 2026: फिरहाद हकीम, सोवन चटर्जी समेत कई टीएमसी दिग्गजों ने चुनाव लड़ने से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) के आगामी दिसंबर 2026 चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है — पूर्व मेयर फिरहाद हकीम और सोवन चटर्जी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ एवं अनुभवी काउंसलरों ने चुनाव मैदान में उतरने से साफ इनकार कर दिया है। परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 209 हो जाने के बीच उम्मीदवारों की यह किल्लत पार्टी की चुनावी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
कौन-कौन से नेताओं ने मुँह मोड़ा
चार बार के विधायक फिरहाद हकीम ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि उनका आगामी केएमसी चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी प्रियदर्शिनी के चुनाव मैदान में उतरने की अटकलों को भी सिरे से नकार दिया। हकीम पिछली ममता बनर्जी सरकार में कोलकाता के मेयर और पश्चिम बंगाल के नगरपालिका एवं शहरी विकास मंत्री का पद संभाल चुके हैं।
कोलकाता के एक अन्य पूर्व मेयर सोवन चटर्जी पहले ही सक्रिय राजनीति से दूरी बना चुके हैं, जिससे दिसंबर के सिविक चुनाव में उनके उम्मीदवार बनने की संभावना लगभग समाप्त मानी जा रही है। केएमसी के पूर्व डिप्टी मेयर अतिन घोष की स्थिति भी अलग नहीं है — जिस वार्ड से वे वर्षों तक पार्षद रहे, वह अब महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया है, और खबरों के अनुसार वे किसी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने में हिचकिचा रहे हैं।
मेयर-इन-काउंसिल और पुराने पार्षदों में भी अनिच्छा
मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के कई पूर्व सदस्य और बोरो चेयरमैन भी चुनावी मैदान से दूर रहने पर विचार कर रहे हैं। इस माहौल में घनश्री बाह, मनीषा बसु और रत्ना सूर सहित कई अनुभवी पार्षदों ने खुलकर कहा है कि वे नगर निगम चुनाव नहीं लड़ेंगी और सक्रिय राजनीति से हट जाएंगी। इसके विपरीत, एमआईसी के दो पूर्व सदस्यों — साउथ कोलकाता से संदीप रंजन बख्शी और नॉर्थ कोलकाता से स्वपन समद्दार — ने सार्वजनिक रूप से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।
TMC में आंतरिक विभाजन और उम्मीदवारों की किल्लत
यह हिचकिचाहट ऐसे समय में सामने आई है जब TMC दो गुटों में बँटी नजर आती है — पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस। दोनों गुटों के लिए परिसीमन के बाद बढ़े 209 वार्डों के लिए उपयुक्त उम्मीदवार खोजना मुश्किल होता जा रहा है। गौरतलब है कि हकीम स्वयं ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के एक जाने-माने चेहरे हैं।
पार्टी फंड और कानूनी विवाद: चुनाव न लड़ने की असली वजह
चुनाव न लड़ने का फैसला करने वाले एक वरिष्ठ पूर्व पार्षद ने बताया, 'पार्टी के असली नाम और चुनाव निशान को लेकर कानूनी लड़ाई अभी भी सुलझी नहीं है, इसलिए यह पक्का नहीं है कि उम्मीदवारों को चुनाव और कैंपेन के खर्चों को पूरा करने के लिए पार्टी फंड मिलेगा या नहीं। आजकल किसी उम्मीदवार के लिए अपनी जेब से पूरा खर्च उठाकर चुनाव लड़ना लगभग नामुमकिन है।' यह बयान संकेत देता है कि वित्तीय अनिश्चितता और संगठनात्मक अस्थिरता मिलकर TMC की केएमसी तैयारियों को कमज़ोर कर रही हैं।
आगे की राह
दिसंबर में होने वाले केएमसी चुनाव से पहले TMC को न केवल उम्मीदवारों का संकट झेलना पड़ रहा है, बल्कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अदालती फैसले का भी इंतजार है। यदि यह कानूनी पेंच जल्द नहीं सुलझा, तो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए कोलकाता की 209 सीटों पर भरोसेमंद उम्मीदवार उतारना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।