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केएमसी चुनाव 2026: फिरहाद हकीम, सोवन चटर्जी समेत कई टीएमसी दिग्गजों ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

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केएमसी चुनाव 2026: फिरहाद हकीम, सोवन चटर्जी समेत कई टीएमसी दिग्गजों ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

सारांश

केएमसी दिसंबर चुनाव से पहले TMC की मुश्किलें बढ़ गई हैं — पूर्व मेयर फिरहाद हकीम और सोवन चटर्जी सहित दर्जनों वरिष्ठ नेताओं ने मैदान में उतरने से इनकार कर दिया। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर कानूनी विवाद और फंड की अनिश्चितता ने 209 वार्डों के लिए उम्मीदवार जुटाने की चुनौती और गहरी कर दी है।

मुख्य बातें

पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने केएमसी दिसंबर 2026 चुनाव न लड़ने की सार्वजनिक घोषणा की; बेटी प्रियदर्शिनी के उम्मीदवार बनने की अटकलों को भी नकारा।
पूर्व मेयर सोवन चटर्जी पहले ही सक्रिय राजनीति से दूर हो चुके हैं, दिसंबर चुनाव में भागीदारी संभव नहीं।
पूर्व डिप्टी मेयर अतिन घोष का पुराना वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित; दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने में हिचकिचाहट।
परिसीमन के बाद केएमसी वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 209 हुई; दोनों TMC गुटों के लिए उम्मीदवार ढूंढना कठिन।
पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर कानूनी विवाद अनसुलझा; पार्टी फंड मिलने की अनिश्चितता उम्मीदवारों की हिचकिचाहट की प्रमुख वजह।
घनश्री बाह , मनीषा बसु और रत्ना सूर सहित कई पुराने पार्षद भी सक्रिय राजनीति छोड़ने के संकेत दे चुके हैं।

कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) के आगामी दिसंबर 2026 चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है — पूर्व मेयर फिरहाद हकीम और सोवन चटर्जी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ एवं अनुभवी काउंसलरों ने चुनाव मैदान में उतरने से साफ इनकार कर दिया है। परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 209 हो जाने के बीच उम्मीदवारों की यह किल्लत पार्टी की चुनावी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

कौन-कौन से नेताओं ने मुँह मोड़ा

चार बार के विधायक फिरहाद हकीम ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि उनका आगामी केएमसी चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी प्रियदर्शिनी के चुनाव मैदान में उतरने की अटकलों को भी सिरे से नकार दिया। हकीम पिछली ममता बनर्जी सरकार में कोलकाता के मेयर और पश्चिम बंगाल के नगरपालिका एवं शहरी विकास मंत्री का पद संभाल चुके हैं।

कोलकाता के एक अन्य पूर्व मेयर सोवन चटर्जी पहले ही सक्रिय राजनीति से दूरी बना चुके हैं, जिससे दिसंबर के सिविक चुनाव में उनके उम्मीदवार बनने की संभावना लगभग समाप्त मानी जा रही है। केएमसी के पूर्व डिप्टी मेयर अतिन घोष की स्थिति भी अलग नहीं है — जिस वार्ड से वे वर्षों तक पार्षद रहे, वह अब महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया है, और खबरों के अनुसार वे किसी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने में हिचकिचा रहे हैं।

मेयर-इन-काउंसिल और पुराने पार्षदों में भी अनिच्छा

मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के कई पूर्व सदस्य और बोरो चेयरमैन भी चुनावी मैदान से दूर रहने पर विचार कर रहे हैं। इस माहौल में घनश्री बाह, मनीषा बसु और रत्ना सूर सहित कई अनुभवी पार्षदों ने खुलकर कहा है कि वे नगर निगम चुनाव नहीं लड़ेंगी और सक्रिय राजनीति से हट जाएंगी। इसके विपरीत, एमआईसी के दो पूर्व सदस्यों — साउथ कोलकाता से संदीप रंजन बख्शी और नॉर्थ कोलकाता से स्वपन समद्दार — ने सार्वजनिक रूप से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।

TMC में आंतरिक विभाजन और उम्मीदवारों की किल्लत

यह हिचकिचाहट ऐसे समय में सामने आई है जब TMC दो गुटों में बँटी नजर आती है — पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस। दोनों गुटों के लिए परिसीमन के बाद बढ़े 209 वार्डों के लिए उपयुक्त उम्मीदवार खोजना मुश्किल होता जा रहा है। गौरतलब है कि हकीम स्वयं ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के एक जाने-माने चेहरे हैं।

पार्टी फंड और कानूनी विवाद: चुनाव न लड़ने की असली वजह

चुनाव न लड़ने का फैसला करने वाले एक वरिष्ठ पूर्व पार्षद ने बताया, 'पार्टी के असली नाम और चुनाव निशान को लेकर कानूनी लड़ाई अभी भी सुलझी नहीं है, इसलिए यह पक्का नहीं है कि उम्मीदवारों को चुनाव और कैंपेन के खर्चों को पूरा करने के लिए पार्टी फंड मिलेगा या नहीं। आजकल किसी उम्मीदवार के लिए अपनी जेब से पूरा खर्च उठाकर चुनाव लड़ना लगभग नामुमकिन है।' यह बयान संकेत देता है कि वित्तीय अनिश्चितता और संगठनात्मक अस्थिरता मिलकर TMC की केएमसी तैयारियों को कमज़ोर कर रही हैं।

आगे की राह

दिसंबर में होने वाले केएमसी चुनाव से पहले TMC को न केवल उम्मीदवारों का संकट झेलना पड़ रहा है, बल्कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अदालती फैसले का भी इंतजार है। यदि यह कानूनी पेंच जल्द नहीं सुलझा, तो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए कोलकाता की 209 सीटों पर भरोसेमंद उम्मीदवार उतारना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसी भी उम्मीदवार के लिए व्यावहारिक बाधा बन गई है। यह ऐसे समय में है जब परिसीमन ने वार्डों की संख्या 144 से 209 कर दी है, यानी पार्टी को पहले से अधिक उम्मीदवारों की जरूरत है और उपलब्धता उल्टी दिशा में जा रही है। मुख्यधारा की कवरेज इसे 'व्यक्तिगत फैसले' के रूप में पेश कर रही है, लेकिन असल तस्वीर यह है कि दो प्रतिस्पर्धी TMC गुटों के बीच संसाधनों और वैधता का सवाल कोलकाता की नगर राजनीति को एक नाजुक मोड़ पर ले आया है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केएमसी चुनाव 2026 में फिरहाद हकीम ने क्यों उतरने से इनकार किया?
फिरहाद हकीम ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि उनका दिसंबर 2026 के केएमसी चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। वे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC गुट से जुड़े हैं और पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर जारी कानूनी विवाद को लेकर अनिश्चितता उनकी हिचकिचाहट की एक प्रमुख वजह मानी जा रही है।
केएमसी में वार्डों की संख्या कितनी हो गई है और यह क्यों अहम है?
परिसीमन के बाद कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 209 हो गई है। इसका मतलब है कि TMC के दोनों गुटों को अधिक उम्मीदवारों की जरूरत है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के इनकार ने इस काम को और कठिन बना दिया है।
TMC में दो गुट कौन से हैं और उनका केएमसी चुनाव पर क्या असर है?
TMC अभी दो गुटों में विभाजित है — पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई वाली 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की लीडरशिप वाली 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस'। दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर कानूनी अनिश्चितता के बीच 209 वार्डों के लिए उम्मीदवार जुटाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
पार्टी फंड की अनिश्चितता उम्मीदवारों पर कैसे असर डाल रही है?
एक वरिष्ठ पूर्व पार्षद के अनुसार, पार्टी के नाम और चुनाव निशान पर कानूनी लड़ाई सुलझी नहीं है, इसलिए पार्टी फंड मिलने की कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में किसी उम्मीदवार के लिए अपनी जेब से पूरा चुनावी खर्च उठाना लगभग नामुमकिन है, जो कई नेताओं के चुनाव न लड़ने की सीधी वजह बन रहा है।
क्या कोई TMC नेता केएमसी चुनाव लड़ने के इच्छुक भी हैं?
हाँ, मेयर-इन-काउंसिल के दो पूर्व सदस्यों — साउथ कोलकाता से संदीप रंजन बख्शी और नॉर्थ कोलकाता से स्वपन समद्दार — ने सार्वजनिक रूप से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। हालाँकि कुल मिलाकर इच्छुक उम्मीदवारों की संख्या 209 वार्डों की जरूरत के मुकाबले काफी कम बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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