25 सितंबर 2026
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मंगलुरु रैगिंग कांड: श्रीनिवास यूनिवर्सिटी के 9 सीनियर छात्रों पर FIR, अपहरण और बेल्ट से पिटाई का आरोप

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मंगलुरु रैगिंग कांड: श्रीनिवास यूनिवर्सिटी के 9 सीनियर छात्रों पर FIR, अपहरण और बेल्ट से पिटाई का आरोप

सारांश

मंगलुरु की श्रीनिवास यूनिवर्सिटी में रैगिंग का वहशी चेहरा — अपहरण, बेल्ट-नकलबस्टर से पिटाई, वीडियो रिकॉर्डिंग और जान से मारने की धमकी। 9 सीनियर छात्रों पर FIR दर्ज, पर सवाल यह है कि घटना 19 अगस्त की है और शिकायत 23 सितंबर को — डर ने पीड़ितों को 35 दिन चुप रखा।

मुख्य बातें

मंगलुरु साउथ पुलिस ने 23 सितंबर 2026 को श्रीनिवास यूनिवर्सिटी, पांडेश्वर के 9 सीनियर छात्रों के खिलाफ रैगिंग और अपहरण का मामला दर्ज किया।
घटना 19 अगस्त को दोपहर 3:19 बजे से शाम 6 बजे के बीच हुई; पीड़ित बीबीए पोर्ट शिपिंग लॉजिस्टिक्स के फर्स्ट ईयर के छात्र हैं, जो केरल के निवासी हैं।
आरोपियों ने कथित तौर पर बेल्ट, कपड़ों के हैंगर और लोहे के नकलबस्टर से पीड़ितों को मारा; घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया।
आरोपी उवैस ने कथित तौर पर पुलिस को बताने पर चाकू से काटने की धमकी दी, जिससे पीड़ित 35 दिन तक चुप रहे।
मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई धाराओं के तहत दर्ज; जाँच जारी है।

मंगलुरु की श्रीनिवास यूनिवर्सिटी में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें मंगलुरु साउथ पुलिस ने 9 सीनियर छात्रों के खिलाफ 23 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि इन छात्रों ने 19 अगस्त को बीबीए पोर्ट शिपिंग लॉजिस्टिक्स के फर्स्ट ईयर के दो छात्रों का अपहरण कर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल किया। पीड़ित दोनों छात्र केरल के निवासी हैं और पांडेश्वर स्थित कॉलेज परिसर में पढ़ते हैं।

घटनाक्रम: कैसे हुई रैगिंग

शिकायत के अनुसार, यह घटना 19 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 19 मिनट से शाम 6 बजे के बीच हुई। पीड़ित छात्र कॉलेज के बाहर घूम रहे थे, तभी आरोपी छात्रों ने उन्हें जबरदस्ती खींचा, मोटरसाइकिल पर बिठाया और एक आवासीय कमरे में ले गए।

कमरे में पहुँचते ही आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ितों को कपड़े उतारकर सिर्फ अंडरवियर में रहने पर मजबूर किया। जब पीड़ितों ने मदद के लिए शोर मचाया, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके मुँह बंद कर दिए और मारपीट शुरू कर दी।

हिंसा का स्वरूप: बेल्ट, हैंगर और नकलबस्टर का इस्तेमाल

शिकायत में दर्ज विवरण के अनुसार, आरोपी नसीद अमीर ने कथित तौर पर बेल्ट से पीड़ितों की पिटाई की, जबकि आदिल एम ने कपड़ों के हैंगर से हमला किया। बाकी आरोपियों ने हाथों से मारपीट की।

सबसे गंभीर आरोप रेहान एम.पी. पर है, जिसने कथित तौर पर लोहे के नकलबस्टर से पीड़ितों पर हमला किया और अमीर अली के सिर व गर्दन पर वार करने की कोशिश की। जब दूसरे पीड़ित अल्फाज ने बचाव की कोशिश की, तो रेहान ने कथित तौर पर उसके माथे को निशाना बनाया। शिकायत में कहा गया है कि यदि ये वार सीधे लगते, तो जानलेवा चोटें आ सकती थीं। इस दौरान आरोपी अशराक ने कथित तौर पर पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया।

मारपीट के बाद जब पीड़ितों ने पानी माँगा, तो आरोपी रोहन रमेश कथित तौर पर गंदा पानी ले आया और मना करने पर वह पानी उन पर डाल दिया।

धमकियाँ और लगातार उत्पीड़न

शिकायत के अनुसार, आरोपी उवैस ने पीड़ितों को जान से मारने की धमकी दी और चेतावनी दी कि यदि उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी, तो उन्हें कॉलेज परिसर में ही चाकू से काट दिया जाएगा। घटना के बाद नसीद अमीर ने कथित तौर पर कॉलेज में पीड़ितों को परेशान करना जारी रखा और उन्हें बिना दाढ़ी व बिना जूते के कक्षा में आने का निर्देश दिया।

इन धमकियों के भय से पीड़ितों ने पुलिस से संपर्क करने में देरी की। बाद में उन्होंने परिजनों को सूचित किया और 23 सितंबर 2026 को मंगलुरु साउथ पुलिस से संपर्क किया।

आरोपियों की पहचान और कानूनी कार्रवाई

पीड़ित छात्र अमीर अली की शिकायत पर जिन नौ सीनियर छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, उनकी पहचान नसीद अमीर, आदिल एम, अशराक, अनीश, उवैस, रोहन रमेश, आदिल वी.पी., रेहान एम.पी. और शिनास के रूप में हुई है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए जाँच शुरू कर दी है। यह मामला उस समय ध्यान में आया है जब कर्नाटक सहित देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग-विरोधी नियमों के क्रियान्वयन पर सवाल उठते रहे हैं।

आगे की जाँच

मंगलुरु साउथ पुलिस ने पुष्टि की है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और वीडियो साक्ष्य की बरामदगी समेत आगे की जाँच जारी है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के रैगिंग-विरोधी नियमों के तहत संस्थान पर भी जवाबदेही तय की जा सकती है। इस मामले का परिणाम कर्नाटक के निजी विश्वविद्यालयों में रैगिंग-रोधी तंत्र की प्रभावशीलता की बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब आरोपी घटना के बाद भी परिसर में पीड़ितों को उत्पीड़ित करता रहा, तो संस्थान की निगरानी प्रणाली पूरी तरह निष्क्रिय साबित हुई। असली सवाल यह है कि कर्नाटक के निजी विश्वविद्यालयों में आंतरिक शिकायत तंत्र इतना कमज़ोर क्यों है कि पीड़ितों को सीधे पुलिस तक पहुँचने में महीनों लग जाते हैं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगलुरु रैगिंग मामले में क्या हुआ?
श्रीनिवास यूनिवर्सिटी, पांडेश्वर के 9 सीनियर छात्रों ने 19 अगस्त को बीबीए फर्स्ट ईयर के दो छात्रों का अपहरण कर उन्हें एक कमरे में बंद किया और बेल्ट, हैंगर व नकलबस्टर से बेरहमी से मारा। पीड़ित दोनों छात्र केरल के निवासी हैं।
मंगलुरु रैगिंग केस में कितने छात्रों पर FIR दर्ज हुई?
मंगलुरु साउथ पुलिस ने 9 सीनियर छात्रों — नसीद अमीर, आदिल एम, अशराक, अनीश, उवैस, रोहन रमेश, आदिल वी.पी., रेहान एम.पी. और शिनास — के खिलाफ 23 सितंबर 2026 को FIR दर्ज की। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई धाराओं के तहत दर्ज है।
पीड़ित छात्रों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने में इतनी देरी क्यों की?
शिकायत के अनुसार, आरोपी उवैस ने पीड़ितों को धमकी दी थी कि पुलिस को बताने पर उन्हें कॉलेज परिसर में ही चाकू से काट दिया जाएगा। इसी भय के कारण पीड़ित 19 अगस्त की घटना के बाद 23 सितंबर तक — यानी करीब 35 दिन — चुप रहे।
श्रीनिवास यूनिवर्सिटी रैगिंग केस में किस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ?
मंगलुरु साउथ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपों में अपहरण, मारपीट, जानलेवा हथियार से हमले की कोशिश और धमकी देना शामिल हैं।
इस रैगिंग मामले में यूनिवर्सिटी या UGC की क्या जिम्मेदारी है?
UGC के रैगिंग-विरोधी नियमों के तहत संस्थान को एंटी-रैगिंग कमेटी और हेल्पलाइन बनाए रखना अनिवार्य है। इस मामले में घटना के बाद भी आरोपी परिसर में पीड़ितों को परेशान करता रहा, जो संस्थागत निगरानी की स्पष्ट विफलता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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