जेएनयू स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर अभाविप का अनिश्चितकालीन धरना, 3 कार्यकर्ता कथित तौर पर घायल
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) इकाई ने 30 सितंबर को विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र में कथित चिकित्सा सुविधाओं की बदहाली और अपने कार्यकर्ताओं के साथ कथित धक्का-मुक्की के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की। संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता को लेकर छात्रों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
अभाविप के कार्यकर्ता जेएनयू स्वास्थ्य केंद्र में छात्रों को मिल रही सुविधाओं का जायजा लेने पहुँचे थे। संगठन का आरोप है कि वहाँ मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें जबरन बाहर निकाल दिया। अभाविप के दावे के मुताबिक, इस कथित झड़प में उसके कार्यकर्ता विकास पटेल, अभय और अनिमेष घायल हो गए।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि जब कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए, तो सुरक्षा कर्मियों ने कथित तौर पर कहा — 'तुम कौन हो पूछने वाले?' — और इसके बाद बलपूर्वक बाहर धकेला गया। अभाविप ने यह भी दावा किया कि इससे पूर्व भी डॉक्टरों की ओर से छात्रों के साथ मारपीट की घटना हो चुकी है, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अभाविप की माँगें
अभाविप ने जेएनयू प्रशासन के समक्ष कई माँगें रखी हैं। इनमें स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की तत्काल व्यवस्था, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना और कथित धक्का-मुक्की के लिए जिम्मेदार सुरक्षा कर्मियों पर कार्रवाई शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संगठन ने सीएमओ डॉ. फौजिया और कर्मचारी आशीष के इस्तीफे की माँग भी की है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा, 'जेएनयू स्वास्थ्य केंद्र छात्रों की सुविधा के लिए है, किसी अधिकारी या सुरक्षा कर्मी की मनमानी के लिए नहीं।' उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस व्यवहार का जवाब देना होगा और घायल कार्यकर्ताओं के मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने आरोप लगाया कि प्रशासन स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था सुधारने के बजाय सवाल उठाने वाले छात्रों को दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा जेएनयू के प्रत्येक छात्र की मूल आवश्यकता है।
प्रशासन का पक्ष अनुपस्थित
गौरतलब है कि जेएनयू प्रशासन, स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों और संबंधित सुरक्षा कर्मियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उपरोक्त सभी आरोप अभाविप की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो रही है।
आगे की राह
अभाविप ने स्पष्ट किया है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की माँगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, आंदोलन जारी रहेगा। यह देखना होगा कि जेएनयू प्रशासन इस दबाव पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई वार्ता की संभावना बनती है।