JNU से बर्खास्त कांग्रेस सांसद अकोइजम के इस्तीफे की मांग, भाजपा महिला मोर्चा का बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला मोर्चा इकाई ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया और कांग्रेस सांसद प्रो. अंगोमचा बिमोल अकोइजम के तत्काल इस्तीफे की मांग की। अकोइजम पर महिला छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप हैं, और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने जाँच के बाद 9 अक्टूबर को उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने बेंगलुरु स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और पार्टी पर आरोपी सांसद का बचाव करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व — राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा — के विरुद्ध भी नारे लगाए और उन पर यौन शोषण की पीड़ित महिलाओं के समर्थन में न खड़े होने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यालय में जबरन प्रवेश की कोशिश के बाद भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।
अकोइजम पर आरोप और JNU की कार्रवाई
कांग्रेस सांसद प्रो. अंगोमचा बिमोल अकोइजम JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के अंतर्गत सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर थे। आरोप है कि उन्होंने महिला छात्राओं से उनकी डेटिंग हिस्ट्री के बारे में पूछताछ की। विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति द्वारा यौन उत्पीड़न का दोषी पाए जाने के बाद उन्हें 9 अक्टूबर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। सांसद ने इन आरोपों से इनकार किया है और कथित तौर पर खुद को निर्दोष बताया है।
भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया
भाजपा एमएलसी भारती शेट्टी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अकोइजम का विश्वविद्यालय से निष्कासन इस बात का प्रमाण है कि उन पर लगे आरोप साबित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इस सांसद के कृत्यों की कड़ी निंदा करती है और पीड़ित महिलाओं के साथ खड़ी रहेगी।
शेट्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा से सवाल किया — 'प्रियंका गांधी, जब ऐसे लोगों का समर्थन किया जा रहा है, तब आप कहाँ हैं?' उन्होंने फिर से मांग दोहराई कि आरोपों के मद्देनजर सांसद को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
कांग्रेस सरकार पर अन्य आरोप
भाजपा महिला मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि राज्य मंत्रिमंडल में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। आलोचकों का कहना है कि जिस पार्टी ने महिला सशक्तिकरण का नारा दिया, उसी पार्टी में इस मामले को लेकर खामोशी चिंताजनक है।
आगे क्या होगा
यह मामला अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में उच्च शिक्षण संस्थानों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों और उनके निवारण तंत्र पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह प्रदर्शन राष्ट्रव्यापी स्तर पर जारी रहेगा।