जेएनयू बर्खास्तगी पर दिल्ली हाईकोर्ट की अंतरिम रोक, कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम को राहत
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व प्रोफेसर और मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोचमा बिमोल अकोइजाम की बर्खास्तगी के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से मामले में अंतिम निर्णय आने तक उन्हें अस्थायी संरक्षण मिल गया है। यह राहत ऐसे समय आई है जब उनके खिलाफ 11 छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों पर आपराधिक जांच अभी भी जारी है।
बर्खास्तगी की पृष्ठभूमि
जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति द्वारा अकोइजाम को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था। आरोप है कि जेएनयू में प्रोफेसर रहते हुए 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है।
अकोइजाम ने इस बर्खास्तगी को अदालत में चुनौती देते हुए पूरे मामले को अपने खिलाफ 'राजनीतिक साजिश' बताया था। उन्होंने जेएनयू प्रशासन की कार्यवाही की तुलना 'खाप पंचायत' जैसी प्रक्रिया से भी की थी।
अग्रिम जमानत याचिका और आगे की सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के साथ ही अकोइजाम ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल की है। इस याचिका पर 3 नवंबर को सुनवाई होने की संभावना है। गौरतलब है कि अदालत का अंतरिम संरक्षण आपराधिक मामले की जांच को प्रभावित नहीं करता — दोनों प्रक्रियाएं समानांतर चल रही हैं।
पुलिस जांच में सहयोग
इससे पहले अक्टूबर में दिल्ली पुलिस के समन पर अकोइजाम वसंत कुंज नॉर्थ थाने पहुँचे थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि वह जांच में पूरा सहयोग देने आए हैं और नहीं चाहते कि उनकी अनुपस्थिति को जांच से बचने की कोशिश समझा जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें 'सच की जीत' पर भरोसा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रुपकुमारी चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अकोइजाम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष व त्वरित जांच की माँग की थी। यह मामला संसदीय गलियारों तक भी पहुँच चुका है, जो इसके व्यापक राजनीतिक आयाम को रेखांकित करता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल तीन समानांतर प्रक्रियाएं सक्रिय हैं — दिल्ली हाईकोर्ट में बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका, राऊज एवेन्यू कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका, और दिल्ली पुलिस की आपराधिक जांच। अंतरिम रोक से अकोइजाम की नौकरी अभी सुरक्षित है, लेकिन मामले का अंतिम निपटारा अदालत की सुनवाई के नतीजों पर निर्भर करेगा।