जेएनयू यौन उत्पीड़न मामला: कांग्रेस सांसद अकोइजाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत एफआईआर दर्ज की। इस एफआईआर में बर्खास्त जेएनयू प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम का नाम आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जाँच जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, मई 2024 में कम से कम 11 महिला छात्रों ने अकोइजाम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि उन्होंने छात्रों को बैठकों या समारोहों का बहाना बनाकर अपने कैंपस आवास पर बुलाया और कथित तौर पर उनका यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कक्षा में अश्लील और अनुचित टिप्पणियाँ कीं।
शिकायतों की जाँच के बाद जेएनयू ने पॉश अधिनियम के अंतर्गत गठित आंतरिक समिति की सिफारिश पर अकोइजाम को प्रोफेसर पद से बर्खास्त कर दिया। बताया गया है कि यह बर्खास्तगी विस्तृत आंतरिक जाँच के बाद की गई।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार, 11 अक्टूबर को इस मुद्दे पर कांग्रेस और विशेष रूप से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को घेरा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, 'जेएनयू ने पॉश अधिनियम के तहत एक आंतरिक समिति का गठन किया, जिसने विस्तृत जाँच के बाद अकोइजाम को तुरंत बर्खास्त कर दिया।'
स्वराज ने राहुल गांधी की पूर्व 'स्मैश द पैट्रियार्की' टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा, 'क्या यह आपके लिए केवल एक राजनीतिक बयानबाजी है? ऐसा लगता है कि यह घटना कांग्रेस के पाखंड को दर्शा रही है। उनके लिए, नारीवाद एक हैशटैग से शुरू होता है और जब जवाबदेही की बात आती है तो समाप्त हो जाता है।'
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है।
कांग्रेस की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब अकोइजाम एक निर्वाचित सांसद के रूप में अपना पद बनाए हुए हैं, जबकि विश्वविद्यालय उन्हें प्रोफेसर पद से बर्खास्त कर चुका है। कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया का एक नया चरण शुरू हो गया है।
आगे क्या होगा
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जाँच सक्रिय रूप से जारी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अकोइजाम की संसद सदस्यता को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि दोष सिद्ध होने की स्थिति में अयोग्यता के प्रावधान लागू होते हैं। मामला राजनीतिक और कानूनी — दोनों स्तरों पर आगे बढ़ने की संभावना है।