बांसुरी स्वराज का राहुल गांधी पर हमला: JNU सांसद प्रोफेसर के यौन उत्पीड़न आरोपों पर कांग्रेस की चुप्पी क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस लोकसभा सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कांग्रेस की मौन साधे रहने की नीति को निशाने पर लिया। स्वराज ने सवाल उठाया कि क्या 'पितृसत्ता का अंत' महज एक राजनीतिक नारा है।
मुख्य घटनाक्रम
9 अक्टूबर 2026 को JNU ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को यौन दुराचार के आरोपों के चलते नौकरी से बर्खास्त कर दिया। बांसुरी स्वराज के अनुसार, मई 2026 में 11 छात्रों ने अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी थीं।
स्वराज ने कहा, "मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए आरोप बेहद परेशान करने वाले हैं। कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रोफेसर ने महिला स्टूडेंट्स से यौन रूप से अनुचित सवाल पूछे। उन पर जेएनयू में महिला स्टूडेंट्स के साथ गलत तरीके से शारीरिक संपर्क बनाने का भी आरोप है।" उन्होंने यह भी बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कथित तौर पर छात्रों को देर रात तक एकेडमिक असेसमेंट के बहाने बुलाया जाता था — जिसमें एक वाइवा परीक्षा रात 11:40 बजे तक चलने का आरोप है।
जेएनयू की कार्रवाई
बांसुरी स्वराज ने बताया कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार JNU ने पॉश अधिनियम (POSH Act) के तहत एक आंतरिक समिति गठित की थी। समिति ने साक्ष्यों, गवाहों और पीड़ितों की गवाही के आधार पर जांच पूरी की, जिसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को बिमोल अकोइजम को पद से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि बिमोल अकोइजम वर्तमान में कांग्रेस के लोकसभा सांसद हैं, जिससे यह मामला केवल एक शैक्षणिक संस्थान की कार्रवाई न रहकर एक राजनीतिक विवाद बन गया है।
कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप
स्वराज ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 9 अक्टूबर से अब तक की चुप्पी को 'मौनं स्वीकृति लक्षणम्' बताया — अर्थात चुप रहना सहमति का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने न कोई आंतरिक जांच बैठाई, न आरोपी सांसद को कोई शो कॉज नोटिस जारी किया।
भाजपा सांसद ने तीखे शब्दों में कहा, "कांग्रेस पार्टी के लिए नारीवाद की शुरुआत सिर्फ एक हैशटैग से होती है और जवाबदेही के मोर्चे पर आते ही दम तोड़ देती है।" उन्होंने राहुल गांधी के 'पितृसत्ता का अंत' के नारे को सीधे चुनौती देते हुए पूछा कि क्या महिलाओं का सम्मान केवल एक राजनीतिक जुमला है।
सवाल जो उठाए गए
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी से कई सीधे सवाल पूछे — क्या 11 छात्राओं की शिकायतों की गूंज उन तक नहीं पहुंची? क्या महिला सम्मान की बात केवल राजनीतिक मौकों के लिए है? उन्होंने कांग्रेस पर 'चुनिंदा नाराज़गी' और 'मकसद से प्रेरित रुख' अपनाने का आरोप लगाया।
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस महिला सशक्तीकरण और पितृसत्तात्मक व्यवस्था के खिलाफ अभियान को अपना प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बना रही है। भाजपा की यह कार्रवाई इस अभियान के विरोधाभास को उजागर करने का राजनीतिक प्रयास है।
आगे क्या होगा
अब तक कांग्रेस पार्टी की ओर से इन आरोपों या बांसुरी स्वराज के बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बिमोल अकोइजम का अपना पक्ष भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इन सवालों का जवाब देती है या नहीं, और क्या इस मामले में कोई कानूनी या संसदीय कार्रवाई आगे बढ़ती है।