11 अक्टूबर 2026
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बांसुरी स्वराज का राहुल गांधी पर हमला: JNU सांसद प्रोफेसर के यौन उत्पीड़न आरोपों पर कांग्रेस की चुप्पी क्यों?

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बांसुरी स्वराज का राहुल गांधी पर हमला: JNU सांसद प्रोफेसर के यौन उत्पीड़न आरोपों पर कांग्रेस की चुप्पी क्यों?

सारांश

BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने 11 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम के JNU से बर्खास्त होने पर राहुल गांधी की चुप्पी को 'पितृसत्ता का अंत' नारे का विरोधाभास बताया — और पूछा कि 11 छात्राओं की शिकायतें क्या केवल राजनीतिक सुविधा देखकर सुनी जाएंगी?

मुख्य बातें

BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने 11 अक्टूबर 2026 को भाजपा मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर निशाना साधा।
JNU ने 9 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन दुराचार के आरोपों के चलते बर्खास्त किया।
मई 2026 में 11 छात्रों ने अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं; पॉश अधिनियम के तहत आंतरिक समिति ने जांच की।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अब तक इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।
कांग्रेस ने आरोपी सांसद के खिलाफ न कोई आंतरिक जांच बैठाई, न कोई शो कॉज नोटिस जारी करने की जानकारी सामने आई।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस लोकसभा सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कांग्रेस की मौन साधे रहने की नीति को निशाने पर लिया। स्वराज ने सवाल उठाया कि क्या 'पितृसत्ता का अंत' महज एक राजनीतिक नारा है।

मुख्य घटनाक्रम

9 अक्टूबर 2026 को JNU ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को यौन दुराचार के आरोपों के चलते नौकरी से बर्खास्त कर दिया। बांसुरी स्वराज के अनुसार, मई 2026 में 11 छात्रों ने अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी थीं।

स्वराज ने कहा, "मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए आरोप बेहद परेशान करने वाले हैं। कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रोफेसर ने महिला स्टूडेंट्स से यौन रूप से अनुचित सवाल पूछे। उन पर जेएनयू में महिला स्टूडेंट्स के साथ गलत तरीके से शारीरिक संपर्क बनाने का भी आरोप है।" उन्होंने यह भी बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कथित तौर पर छात्रों को देर रात तक एकेडमिक असेसमेंट के बहाने बुलाया जाता था — जिसमें एक वाइवा परीक्षा रात 11:40 बजे तक चलने का आरोप है।

जेएनयू की कार्रवाई

बांसुरी स्वराज ने बताया कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार JNU ने पॉश अधिनियम (POSH Act) के तहत एक आंतरिक समिति गठित की थी। समिति ने साक्ष्यों, गवाहों और पीड़ितों की गवाही के आधार पर जांच पूरी की, जिसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को बिमोल अकोइजम को पद से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।

गौरतलब है कि बिमोल अकोइजम वर्तमान में कांग्रेस के लोकसभा सांसद हैं, जिससे यह मामला केवल एक शैक्षणिक संस्थान की कार्रवाई न रहकर एक राजनीतिक विवाद बन गया है।

कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप

स्वराज ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 9 अक्टूबर से अब तक की चुप्पी को 'मौनं स्वीकृति लक्षणम्' बताया — अर्थात चुप रहना सहमति का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने न कोई आंतरिक जांच बैठाई, न आरोपी सांसद को कोई शो कॉज नोटिस जारी किया।

भाजपा सांसद ने तीखे शब्दों में कहा, "कांग्रेस पार्टी के लिए नारीवाद की शुरुआत सिर्फ एक हैशटैग से होती है और जवाबदेही के मोर्चे पर आते ही दम तोड़ देती है।" उन्होंने राहुल गांधी के 'पितृसत्ता का अंत' के नारे को सीधे चुनौती देते हुए पूछा कि क्या महिलाओं का सम्मान केवल एक राजनीतिक जुमला है।

सवाल जो उठाए गए

बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी से कई सीधे सवाल पूछे — क्या 11 छात्राओं की शिकायतों की गूंज उन तक नहीं पहुंची? क्या महिला सम्मान की बात केवल राजनीतिक मौकों के लिए है? उन्होंने कांग्रेस पर 'चुनिंदा नाराज़गी' और 'मकसद से प्रेरित रुख' अपनाने का आरोप लगाया।

यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस महिला सशक्तीकरण और पितृसत्तात्मक व्यवस्था के खिलाफ अभियान को अपना प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बना रही है। भाजपा की यह कार्रवाई इस अभियान के विरोधाभास को उजागर करने का राजनीतिक प्रयास है।

आगे क्या होगा

अब तक कांग्रेस पार्टी की ओर से इन आरोपों या बांसुरी स्वराज के बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बिमोल अकोइजम का अपना पक्ष भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इन सवालों का जवाब देती है या नहीं, और क्या इस मामले में कोई कानूनी या संसदीय कार्रवाई आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सांसद की पार्टी की जवाबदेही कहाँ है? कांग्रेस की चुप्पी चाहे रणनीतिक हो या असंवेदनशीलता — दोनों ही स्थिति में जनता के सवालों का जवाब देना उसकी ज़िम्मेदारी है। POSH अधिनियम संस्थागत जवाबदेही के लिए बना था, लेकिन जब आरोपी व्यक्ति सांसद हो, तो पार्टी की चुप्पी उस संस्थागत ढाँचे को कमज़ोर करती है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिमोल अकोइजम को JNU से क्यों बर्खास्त किया गया?
JNU ने 9 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन दुराचार के आरोपों के चलते नौकरी से बर्खास्त किया। मई 2026 में 11 छात्रों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद POSH अधिनियम के तहत आंतरिक समिति ने जांच की।
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी से क्या पूछा?
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी से पूछा कि क्या 'पितृसत्ता का अंत' केवल एक राजनीतिक नारा है और 11 छात्राओं की शिकायतों पर कांग्रेस ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी और खड़गे सभी 9 अक्टूबर से चुप क्यों हैं।
JNU की आंतरिक समिति ने क्या किया?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार JNU ने POSH अधिनियम के तहत आंतरिक समिति गठित की, जिसने साक्ष्यों, गवाहों और पीड़ितों की गवाही के आधार पर जांच की। समिति की सिफारिश पर 9 अक्टूबर 2026 को बिमोल अकोइजम को बर्खास्त किया गया।
कांग्रेस ने अब तक इस मामले पर क्या रुख अपनाया है?
बांसुरी स्वराज के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 से अब तक कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। पार्टी ने न कोई आंतरिक जांच बैठाई है, न ही आरोपी सांसद को कोई शो कॉज नोटिस जारी करने की जानकारी सामने आई है।
'पितृसत्ता का अंत' विवाद क्या है?
कांग्रेस और राहुल गांधी ने महिला सशक्तीकरण के तहत 'पितृसत्ता का अंत' को एक प्रमुख राजनीतिक नारा बनाया है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने इसी नारे को सामने रखते हुए आरोप लगाया कि अपने ही एक सांसद पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कांग्रेस की चुप्पी इस नारे को खोखला साबित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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