JNU से बर्खास्त कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम पर BJP विधायक रॉबिंद्रो सिंह की चुनौती — अदालत में साबित करें बेगुनाही
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक टोंगब्रम रॉबिंद्रो सिंह ने 15 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को खुली चुनौती दी — यदि वे स्वयं को निर्दोष मानते हैं, तो अपने विरुद्ध लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को कानूनी मंच पर खारिज करके दिखाएँ। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत अकोइजम को 9 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जाँच के बाद सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
इंफाल पश्चिम ज़िले में आयोजित 'सेवा संकल्प अभियान' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए BJP विधायक रॉबिंद्रो सिंह ने कहा कि सच्चाई सामने लाने का एकमात्र उचित मंच न्यायालय है। उन्होंने सांसद से आग्रह किया कि वे कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए इन आरोपों को चुनौती दें।
उन्होंने आगे कहा कि मणिपुर के बाहर के लोगों द्वारा सांसद पर महिलाओं और लड़कियों से संबंधित जो आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने राज्य की जनता की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है। विधायक के अनुसार, अकोइजम का अदालत में निर्दोष सिद्ध होना मणिपुर की प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
इससे पहले, मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने अकोइजम से लोकसभा से इस्तीफा देने की माँग की थी। मुख्यमंत्री ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में JNU से बर्खास्तगी के फैसले को 'बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक' बताया।
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा, 'एक उच्च विधायी पद पर बैठे व्यक्ति और एक प्रोफेसर द्वारा इस तरह का गंभीर कदाचार अस्वीकार्य है और इससे मणिपुर की छवि खराब होती है। चूंकि एक सांसद लोगों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए संसद की गरिमा बनी रहनी चाहिए।' उन्होंने नैतिक आधार पर अकोइजम से तत्काल इस्तीफे की अपेक्षा जताई।
JNU की कार्रवाई
JNU की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित ने 9 अक्टूबर के एक आधिकारिक आदेश में बताया कि विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने अकोइजम के विरुद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की विधिवत जाँच की थी। आदेश के अनुसार, समिति के निष्कर्षों और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए विश्वविद्यालय ने लागू सेवा नियमों के अंतर्गत उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का दंड सुनाया।
गौरतलब है कि यह मामला तब और राजनीतिक रंग ले चुका है जब अकोइजम एक सक्रिय लोकसभा सांसद के रूप में अपने संसदीय दायित्व निभा रहे हैं। विपक्षी खेमे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आम जनता और मणिपुर पर असर
मणिपुर, जो पहले से ही जातीय संघर्ष और सामाजिक तनाव से जूझ रहा है, इस मामले ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दिया है — क्या एक जन प्रतिनिधि के विरुद्ध संस्थागत जाँच के निष्कर्ष उनकी सांसदीय पात्रता को प्रभावित करते हैं? आलोचकों का कहना है कि इस प्रश्न का उत्तर केवल न्यायालय ही दे सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में सामाजिक सौहार्द पहले से ही नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है। आने वाले हफ्तों में अकोइजम की कानूनी रणनीति और कांग्रेस का आधिकारिक रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।