जेएनयू से बर्खास्तगी के बाद मणिपुर CM खेमचंद सिंह ने सांसद अकोइजम से माँगा इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शनिवार, 11 अक्टूबर 2026 को माँग की कि कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम लोकसभा से तत्काल इस्तीफा दें। यह माँग जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों की जाँच के आधार पर अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किए जाने के एक दिन बाद आई। इनर मणिपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले अकोइजम की ओर से इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
मुख्यमंत्री का आरोप और सोशल मीडिया पोस्ट
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने फेसबुक और एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि इनर मणिपुर के सांसद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को जेएनयू से बर्खास्त किया जाना 'बेहद चिंताजनक और शर्मनाक' है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जाँच की और कड़ी सजा की सिफारिश की, जिसके बाद उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 'एक उच्च विधायी पदधारी और प्रोफेसर द्वारा इस प्रकार का गंभीर दुराचार अस्वीकार्य है और मणिपुर की छवि को धूमिल करता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि संसद की गरिमा से समझौता होने पर जनता का विश्वास कम होता है, इसलिए 'नैतिक आधार पर प्रोफेसर अकोइजम ने जन प्रतिनिधि के रूप में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है।'
जेएनयू का आधिकारिक आदेश
जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित ने शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में कहा कि सामाजिक विज्ञान संकाय के सामाजिक प्रणाली अध्ययन केंद्र के प्रोफेसर अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जाँच आंतरिक समिति द्वारा की गई थी। जाँच के आधार पर समिति ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमों का हवाला देते हुए कड़ी सजा की सिफारिश की।
आदेश में स्पष्ट किया गया: 'उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए और सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद, तथा आंतरिक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, प्रो. अंगोमचा बिमोल अकोइजम को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय की सेवाओं से बर्खास्त किया जाता है।' जाँच के विशिष्ट निष्कर्ष अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
आरोपों का पृष्ठभूमि
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 में कम से कम 11 छात्राओं ने अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों में कथित तौर पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने छात्रों को बैठकों या सभाओं के बहाने अपने कैंपस आवास पर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कक्षा में अश्लील और अनुचित टिप्पणियाँ कीं। इन सभी आरोपों और शिकायतों की जाँच विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने की, जिसके बाद बर्खास्तगी का निर्णय लिया गया।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक तनाव के दौर से गुज़र रहा है। गौरतलब है कि अकोइजम कांग्रेस के टिकट पर इनर मणिपुर सीट से लोकसभा सांसद हैं, और मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह भारतीय जनता पार्टी (BJP) से हैं। आलोचकों का कहना है कि इस्तीफे की माँग राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है, हालाँकि बर्खास्तगी का आदेश विश्वविद्यालय की स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है। इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक न तो अकोइजम की ओर से और न ही कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया था। आने वाले दिनों में कांग्रेस का रुख और अकोइजम की कानूनी प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।