तवांग में बौद्ध सर्किट कार्यशाला: महिला नेतृत्व वाला ग्रामीण पर्यटन पूर्वोत्तर को जोड़ेगा नेपाल-भूटान से, बोले अरुणाचल मंत्री

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तवांग में बौद्ध सर्किट कार्यशाला: महिला नेतृत्व वाला ग्रामीण पर्यटन पूर्वोत्तर को जोड़ेगा नेपाल-भूटान से, बोले अरुणाचल मंत्री

सारांश

तवांग में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में अरुणाचल मंत्री दासंगलू पुल ने महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण पर्यटन को पूर्वोत्तर के बौद्ध सर्किट की कायापलट का ज़रिया बताया। नेपाल, भूटान और श्रीलंका के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह पहल साझा बौद्ध विरासत को आजीविका और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जोड़ने की कोशिश है।

मुख्य बातें

अरुणाचल प्रदेश के मंत्री दासंगलू पुल ने 7 मई 2026 को तवांग में 'पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध सर्किट का विकास' विषयक क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित किया।
कार्यशाला में नेपाल, भूटान, श्रीलंका, असम और सिक्किम के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मंत्री ने तवांग, मेचुखा और नामसाई के स्वर्ण पैगोडा को प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के रूप में रेखांकित किया।
राज्य सरकार कौशल विकास, सूक्ष्म वित्त सहायता, अवसंरचना विकास और डिजिटल प्रचार के ज़रिए महिलाओं को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध।
कार्यशाला में क्षेत्रीय सहयोग, कनेक्टिविटी, ब्रांडिंग और समावेशी विकास पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।

अरुणाचल प्रदेश के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री दासंगलू पुल ने 7 मई 2026 को तवांग में आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला में कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाला ग्रामीण पर्यटन हिमालयी बौद्ध क्षेत्र में सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सतत विकास और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। 'पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध सर्किट का विकास' विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में नेपाल, भूटान, श्रीलंका, असम और सिक्किम के प्रतिनिधि एक मंच पर आए।

कार्यशाला का उद्देश्य और भागीदारी

इस क्षेत्रीय कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य पूर्वोत्तर भारत के बौद्ध केंद्रों को नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण पर्यटन मॉडल के ज़रिए जोड़ना था। प्रतिनिधियों ने साझा बौद्ध विरासत पर आधारित टिकाऊ पर्यटन को मज़बूत करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यशाला को क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

अरुणाचल प्रदेश की पर्यटन क्षमता

मंत्री दासंगलू पुल, जिनके पास महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का भी प्रभार है, ने अरुणाचल प्रदेश को

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे हिमालयी बौद्ध सर्किट से जोड़ने की यह पहल उल्लेखनीय है क्योंकि पूर्वोत्तर भारत दशकों से पर्यटन मानचित्र पर हाशिये पर रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि कार्यशाला की घोषणाएँ ज़मीनी स्तर पर ग्रामीण महिलाओं तक कितनी पहुँचती हैं — विशेषकर जब अवसंरचना और कनेक्टिविटी की कमी अभी भी तवांग जैसे दूरदराज़ इलाकों की सबसे बड़ी चुनौती है। सूक्ष्म वित्त और डिजिटल प्रचार के वादे तब तक अधूरे हैं जब तक इंटरनेट कनेक्टिविटी और सड़क संपर्क सुनिश्चित न हो। अंतरराष्ट्रीय भागीदारी उत्साहजनक है, पर द्विपक्षीय पर्यटन समझौतों को ठोस रूप देने में अभी लंबा रास्ता तय करना होगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तवांग में आयोजित बौद्ध सर्किट कार्यशाला क्या थी?
यह 'पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध सर्किट का विकास' विषय पर तवांग में आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला थी, जिसमें नेपाल, भूटान, श्रीलंका, असम और सिक्किम के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य साझा बौद्ध विरासत पर आधारित टिकाऊ और समावेशी पर्यटन को बढ़ावा देना था।
महिला नेतृत्व वाला ग्रामीण पर्यटन पूर्वोत्तर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
अरुणाचल मंत्री दासंगलू पुल के अनुसार, ग्रामीण और आदिवासी महिलाएँ पारंपरिक रूप से मौखिक परंपराओं, हस्तशिल्पों, स्वदेशी व्यंजनों और अनुष्ठानों की संरक्षक रही हैं। पर्यटन में उनकी सक्रिय भागीदारी से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के अवसर भी बनेंगे।
अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थल कौन से हैं?
मंत्री दासंगलू पुल ने तवांग, मेचुखा और नामसाई में स्थित स्वर्ण पैगोडा को राज्य के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के रूप में रेखांकित किया। अरुणाचल प्रदेश को 'उगते सूरज की भूमि' कहा जाता है और यह कई महत्वपूर्ण बौद्ध विरासत केंद्रों का घर है।
राज्य सरकार महिला पर्यटन उद्यमियों को कैसे समर्थन देगी?
मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार कौशल विकास कार्यक्रमों, सूक्ष्म वित्त सहायता, अवसंरचना विकास और स्थानीय पर्यटन अनुभवों के डिजिटल प्रचार जैसी पहलों के ज़रिए कामकाजी महिलाओं को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस कार्यशाला में किन देशों और राज्यों ने भाग लिया?
कार्यशाला में नेपाल, भूटान और श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ-साथ असम और सिक्किम के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। चर्चा का केंद्र क्षेत्रीय सहयोग, कनेक्टिविटी और महिला नेतृत्व वाले पर्यटन की भूमिका रही।
राष्ट्र प्रेस
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