उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा: बौद्ध सर्किट की नई संभावनाएं
सारांश
Key Takeaways
- उत्तर प्रदेश आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- बौद्ध सर्किट अब आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- कुशीनगर में इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन हुआ।
- स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
- 2025 में 82 लाख पर्यटकों की अपेक्षा है।
लखनऊ, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। बौद्ध सर्किट, जो सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला है, अब केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण आधार भी बन रहा है।
कुशीनगर में हाल ही में संपन्न इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने इस दिशा में नई संभावनाओं का द्वार खोला है। उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट अब धार्मिक पर्यटन से आगे बढ़कर आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन बनता जा रहा है। यहां के प्रमुख बौद्ध स्थलों—सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु—पर वर्ष 2025 में 82 लाख से अधिक पर्यटकों के आगमन से यह स्पष्ट होता है कि यूपी वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए एक अनिवार्य गंतव्य बन चुका है।
राज्य सरकार ने इन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया को तेज किया है। बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल गाइडेंस और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों को एक सहज अनुभव मिल सके। इसके साथ ही होटल उद्योग, परिवहन, टूर गाइड और हस्तशिल्प को नई गति मिल रही है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
कुशीनगर में हाल ही में संपन्न कॉन्क्लेव ने यूपी की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया है। इस आयोजन में 2300 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया, और थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल जैसे कई देशों के प्रतिनिधियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय रूप दिया। कॉन्क्लेव के दौरान लगभग 3000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो दर्शाते हैं कि बौद्ध सर्किट अब निवेश के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की नीति प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ के रोडमैप में बौद्ध सर्किट की महत्वपूर्ण भूमिका तय की गई है। इसके तहत पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में प्रदेश का योगदान मौजूदा 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 16 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या सात से बढ़ाकर 20 करने की योजना है।
भगवान बुद्ध की यह पावन धरती, जहां उन्होंने प्रथम उपदेश दिया और महापरिनिर्वाण प्राप्त किया, अब एक नई वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है। सुनियोजित नीतियां, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफलता और बढ़ते निवेश प्रस्ताव इस बात का संकेत हैं कि उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट आने वाले समय में आध्यात्मिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से नई ऊंचाइयों को छूने वाला है।