बलूचिस्तान के खुजदार में पाकिस्तानी सेना का हवाई-जमीनी अभियान, वाध में गोलाबारी से एक और मौत
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने 27 जुलाई 2026 को बलूचिस्तान के खुजदार जिले में जमीनी और हवाई अभियान तेज कर दिया, जिसमें वाध क्षेत्र में हुई गोलाबारी में एक और व्यक्ति की मौत की पुष्टि स्थानीय मीडिया सूत्रों ने की। यह ऐसे समय में आया है जब वाध, ओरनाच और जेहरी क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है।
हवाई हमले और निगरानी अभियान
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य हेलीकॉप्टरों ने खुजदार के ओरनाच क्षेत्र के सुरगढ़ इलाके में कई स्थानों पर हवाई हमले किए। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र में निरंतर हवाई निगरानी उड़ानें भी जारी रहीं। स्थानीय समाचार स्रोतों के मुताबिक, यह अभियान नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास संचालित किया जा रहा है।
पिछले हफ्ते की घटना और नागरिक विरोध
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी खुजदार के वाध इलाके के ड्रखलाव-गस्लैती में हुई गोलाबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि महिलाओं और बच्चों सहित कई अन्य लोग घायल हो गए थे। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने हाईवे पर धरना दिया और मृतक अब्दुल कादिर का शव विरोध स्थल पर रखा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने 23 जुलाई की सुबह गोलाबारी शुरू की और कथित तौर पर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया।
मानवाधिकार संगठनों के गंभीर आरोप
मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने बताया कि पंजगुर जिले के पारूम इलाके के 14 वर्षीय छात्र शहजाद को कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थित 'डेथ स्क्वाड' ने 25 जुलाई को मार डाला। संगठन के अनुसार, उसे एक वर्ष से अधिक समय तक गायब रखा गया था।
BYC ने कहा, 'एक साल से ज्यादा समय तक उसका परिवार इस उम्मीद में तड़पता रहा कि वह सुरक्षित घर लौट आएगा। इसके बजाय, उन्हें उसकी हत्या की दुखद खबर मिली। यह हत्या उन डेथ स्क्वाड ने की जो पाकिस्तानी सेना के समर्थन से बिना किसी डर या रोक-टोक के काम करते हैं।' संगठन ने आरोप लगाया कि महिलाओं, बच्चों और बलूच समुदाय के हर वर्ग को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
छात्र एक्टिविस्ट की कथित गिरफ्तारी
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने बताया कि एक अन्य छात्र एक्टिविस्ट यूनुस बलूच को 25 जुलाई को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रांत की राजधानी क्वेटा में उनके घर से उठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। संगठन के अनुसार, तब से उनके परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अतिरिक्त, खबरें हैं कि उनके परिवार के 8 वर्षीय बच्चे को 'फोर्थ शेड्यूल' में डाला गया है, जो मौलिक अधिकारों के हनन को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न करता है।
बलूचिस्तान में व्यापक संकट
बलूचिस्तान लंबे समय से जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है, जो मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई हैं। यह Nवीं ऐसी घटना है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों ने बलूच नागरिकों पर हो रहे कथित अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में मानवाधिकार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय दबाव पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।