24 जुलाई 2026
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बलूचिस्तान के खुजदार में पाक सेना की गोलाबारी: अब्दुल कादिर की मौत, महिलाएं-बच्चे भी घायल

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बलूचिस्तान के खुजदार में पाक सेना की गोलाबारी: अब्दुल कादिर की मौत, महिलाएं-बच्चे भी घायल

सारांश

बलूचिस्तान के खुजदार में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी ने एक बार फिर आम नागरिकों को निशाना बनाया — अब्दुल कादिर की मौत और महिलाओं-बच्चों के घायल होने के बाद स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे। खांड कोटचा, जेहरी, नौशकी और जिवानी में जारी कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी ने संकट को और गहरा किया है।

मुख्य बातें

खुजदार जिले के वाध के ड्राखाला-गैसलाती इलाके में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में अब्दुल कादिर की मौत हुई, महिलाओं और बच्चों समेत कई घायल।
स्थानीय निवासियों ने हाईवे पर धरना दिया और निष्पक्ष जांच व जवाबदेही की मांग की।
बीएनएम चेयरमैन नसीम बलूच ने एक्स पर पोस्ट कर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को बलूचिस्तान में निर्बाध पहुँच देने की माँग की।
बीवीजे ने खांड कोटचा, जेहरी, नौशकी और जिवानी में कर्फ्यू, इंटरनेट बंदी और आवाजाही प्रतिबंध पर गंभीर चिंता जताई।
फ्रंटियर कोर पर खांड कोटचा में यात्री बसों पर अंधाधुंध गोलीबारी का आरोप, निर्दोष नागरिकों की मौत का दावा।
पाकिस्तानी सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खुजदार जिले में 24 जुलाई 2026 को पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और महिलाओं व बच्चों समेत कई नागरिक घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना खुजदार के वाध क्षेत्र के ड्राखाला-गैसलाती इलाके में गुरुवार सुबह हुई।

मुख्य घटनाक्रम

द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी एक आम आबादी वाले इलाके में हुई, जिसमें अब्दुल कादिर नामक व्यक्ति की मौत हुई। गोलाबारी के बाद स्थानीय निवासियों ने हाईवे पर धरना दिया और मृतक का शव प्रदर्शन स्थल पर रखकर विरोध जताया।

प्रदर्शनकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की मांग करते हुए स्पष्ट जांच होने तक धरना जारी रखने की कसम खाई।

बीएनएम और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

घटना की कड़ी निंदा करते हुए बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के चेयरमैन नसीम बलूच ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आम लोगों के इलाकों पर गोलाबारी, लोगों को जबरदस्ती गायब करना, बिना किसी कानूनी कार्रवाई के हत्याएं, हिरासत में मौतें और सामूहिक सजा — चल रहे संघर्ष की लगातार बनी हुई बातें बन गई हैं, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की तुरंत जरूरत पर जोर पड़ता है।'

नसीम बलूच ने यह भी मांग की कि संयुक्त राष्ट्र, स्वतंत्र मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को बलूचिस्तान में बिना किसी बाधा के पहुँचने की अनुमति दी जाए, ताकि वहाँ की वास्तविक स्थिति और मानवाधिकार हालात की निगरानी हो सके।

कर्फ्यू और प्रतिबंधों से आम जनता पर असर

इससे एक दिन पहले, मानवाधिकार संगठन बलोच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने बलूचिस्तान के कई इलाकों — खांड कोटचा, जेहरी, नौशकी और जिवानी — में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा लगाए गए कर्फ्यू, इंटरनेट बंदी और आवाजाही पर प्रतिबंधों को लेकर गंभीर चिंता जताई।

बीवीजे के अनुसार, इन पाबंदियों के कारण दवाइयों, खाद्य सामग्री और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो रही है। मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पा रहे, छात्रों की पढ़ाई ठप हो गई है, और दिहाड़ी मजदूरों व छोटे कारोबारियों की आजीविका संकट में है। संगठन ने कहा कि ये कदम लाखों नागरिकों को सामूहिक सजा देने के समान हैं।

बीवीजे ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की फ्रंटियर कोर और अन्य सुरक्षा बलों ने खांड कोटचा इलाके में यात्री बसों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान गई।

जवाबदेही की मांग

बीवीजे ने अपने बयान में कहा, 'नागरिकों की जान और संपत्ति की सुरक्षा राज्य की बुनियादी संवैधानिक जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाओं की पारदर्शी जांच के जरिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए।' संगठन ने महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों पर पड़ रहे गंभीर प्रभाव को मानवीय गरिमा के विरुद्ध बताया।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और स्थानीय नागरिकों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का धरना जारी है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय से स्वतंत्र जांच की अनुमति देने की माँग तेज हो रही है। पाकिस्तानी सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बलूचिस्तान में नागरिक इलाकों पर सैन्य कार्रवाई के एक लंबे और चिंताजनक सिलसिले की कड़ी है। जेहरी, नौशकी, जिवानी और अब खांड कोटचा — एक के बाद एक जिलों में कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी का पैटर्न दर्शाता है कि यह नीतिगत दमन है, न कि छिटपुट घटना। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की पहुँच पर रोक बनाए रखते हुए पाकिस्तान जवाबदेही से बचता रहा है — और यही सबसे बड़ा सवाल है जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। बिना स्वतंत्र सत्यापन के, तथ्य और दावे के बीच की खाई पाटना असंभव है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान के खुजदार में क्या हुआ?
खुजदार जिले के वाध क्षेत्र के ड्राखाला-गैसलाती इलाके में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में अब्दुल कादिर नामक व्यक्ति की मौत हो गई और महिलाओं व बच्चों समेत कई नागरिक घायल हुए। यह घटना कथित तौर पर गुरुवार सुबह एक आम आबादी वाले इलाके में हुई।
बीएनएम चेयरमैन नसीम बलूच ने क्या कहा?
बलूच नेशनल मूवमेंट के चेयरमैन नसीम बलूच ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि नागरिक इलाकों पर गोलाबारी, जबरन गुमशुदगी, हिरासत में मौतें और सामूहिक सजा बलूचिस्तान में स्थायी समस्याएं बन गई हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को बिना रोक-टोक बलूचिस्तान में पहुँच देने की माँग की।
बलूचिस्तान में कर्फ्यू से आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?
बलोच वॉयस फॉर जस्टिस के अनुसार खांड कोटचा, जेहरी, नौशकी और जिवानी में लागू कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी से दवाइयों व खाद्य सामग्री की आपूर्ति बाधित है। मरीज अस्पताल नहीं पहुँच पा रहे, छात्रों की पढ़ाई ठप है और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका संकट में है।
फ्रंटियर कोर पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
बीवीजे ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की फ्रंटियर कोर और अन्य सुरक्षा बलों ने खांड कोटचा इलाके में यात्री बसों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान गई। संगठन ने पारदर्शी जांच और जिम्मेदारों को कानून के कटघरे में लाने की माँग की है।
प्रदर्शनकारी क्या माँग कर रहे हैं?
खुजदार में धरना दे रहे प्रदर्शनकारी घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट जांच होने तक धरना जारी रखने की कसम खाई है।
राष्ट्र प्रेस
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