कच्छ में ऊंटनी के दूध से नई श्वेत क्रांति: सरहद डेयरी दे रही ₹51 प्रति लीटर, पशुपालकों को ₹9.60 करोड़ का भुगतान
सारांश
मुख्य बातें
कच्छ के रेगिस्तान में पशुपालन पर निर्भर सैकड़ों परिवारों के लिए ऊंटनी का दूध अब आजीविका का एक संगठित और लाभकारी स्रोत बन चुका है। गुजरात सरकार के सक्रिय सहयोग से सरहद डेयरी ने कच्छ के ऊंट पालकों को ₹50 से ₹51 प्रति लीटर की दर से दूध खरीदने की व्यवस्था की है, जिससे वर्ष 2025-26 में पशुपालकों को कुल ₹9.60 करोड़ का भुगतान किया गया। यह देश की पहली डेयरी है जो ऊंटनी का दूध न केवल खरीदती है, बल्कि उसे प्रोसेस कर दूध, पनीर और आइसक्रीम जैसे उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुँचाती है।
मुख्य घटनाक्रम
सरहद डेयरी ने वर्ष 2025-26 में प्रतिदिन औसतन 5,158 लीटर ऊंटनी का दूध खरीदा, जो वर्ष 2024-25 के 4,754 लीटर की तुलना में 8.50 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष पशुपालकों को दूध के लिए लगभग ₹8.72 करोड़ का भुगतान किया गया था, जो इस वर्ष बढ़कर ₹9.60 करोड़ हो गया है।
सरहद डेयरी के चेयरमैन वलमजी हुंबल ने बताया, 'यहाँ पूरे भारत में सरहद डेयरी का पहला प्लांट है। हम ऊंट पालकों को ₹51 प्रति लीटर देते हैं।' गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले तक ऊंटनी का दूध लगभग पानी के भाव बिकता था और पशुपालकों के पास कोई संगठित बाज़ार नहीं था।
पशुपालकों की बदलती जिंदगी
ऊंट पालक आशाभाई रबारी ने कहा, 'पहले हमारी जिंदगी काफी कठिन थी। सरकार के सहयोग और दूध संगठन ने जो बताया, उससे हमारे ऊंटों की जिंदगी बच गई, नहीं तो हमें कोई पूछता नहीं था। अब जिंदगी आसान हो गई है।' एक अन्य पशुपालक देवाभाई रबारी ने बताया कि ऊंट का दूध डेयरी में जाता है और ₹50 प्रति लीटर का भाव मिलता है।
ऊंट पालकों की एक बड़ी समस्या यह रही है कि उनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता — चारे की तलाश में उन्हें भटकना पड़ता है, जिससे दूध बेचना कठिन था। सरहद डेयरी ने संग्रह की व्यवस्था को सरल बनाकर यह बाधा दूर की है।
ऊंटनी के दूध का औषधीय महत्व
ऊंटनी का दूध सुपरफूड के रूप में विख्यात है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अलप अंतानी के अनुसार, 'टीबी से पीड़ित मरीजों और शरीर की सूजन से निजात दिलाने के लिए ऊंट का दूध काफी लाभदायक साबित हो सकता है।' टीबी, डायबिटीज, ऑटिज्म और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों में इसके सेवन को लाभकारी माना जाता है, जिससे देश और विदेश दोनों में इसकी माँग बढ़ रही है।
सरकार की भूमिका और युवाओं की भागीदारी
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में सरहद डेयरी ने पशुपालकों को न केवल संगठित बाज़ार उपलब्ध कराया, बल्कि ऊंट खरीदने के लिए ऋण सुविधा भी प्रदान की है। इससे ऊंटों की माँग और कीमतें दोनों बढ़ी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक पशुपालन से युवा पीढ़ी का मोहभंग हो रहा था — लेकिन अब बड़ी संख्या में युवा पशुपालक इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं।
आगे की राह
दूध खरीद में लगातार वृद्धि और पशुपालकों की बढ़ती आय के साथ, कच्छ में एक नई श्वेत क्रांति की नींव पड़ती दिख रही है। यदि ऊंटनी के दूध की प्रोसेसिंग क्षमता और निर्यात के अवसर और विकसित किए जाएँ, तो यह मॉडल देश के अन्य रेगिस्तानी क्षेत्रों के लिए भी अनुकरणीय बन सकता है।