2 अगस्त 2026
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यूएन चार्टर पर भारत का समर्थन दोहराया, पी. हरीश बोले — '140 करोड़ भारतीयों के लिए यह उम्मीद का प्रतीक'

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यूएन चार्टर पर भारत का समर्थन दोहराया, पी. हरीश बोले — '140 करोड़ भारतीयों के लिए यह उम्मीद का प्रतीक'

सारांश

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने यूएन चार्टर की प्रस्तावना पर प्रतीकात्मक हस्ताक्षर करते हुए इसे '140 करोड़ भारतीयों की उम्मीद' बताया। 81 साल पुराने इस दस्तावेज़ के प्रति प्रतिबद्धता ऐसे वक्त में दोहराई गई जब संयुक्त राष्ट्र राजनीतिक और वित्तीय दबावों से जूझ रहा है।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी.
हरीश ने 17 जून 2026 को यूएन चार्टर की प्रस्तावना पर प्रतीकात्मक हस्ताक्षर किए।
हरीश ने चार्टर को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए 'उम्मीद' का प्रतीक बताया।
यह हस्ताक्षर अभियान 26 जून के यूएन चार्टर दिवस की तैयारी के तहत संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक की पहल पर हुआ।
भारत संयुक्त राष्ट्र के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक है; ए.
रामास्वामी मुदलियार ने 25 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में मूल चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे।
बेयरबॉक के कार्यालय ने कहा कि चार्टर के 81 साल बाद संयुक्त राष्ट्र 'राजनीतिक, वित्तीय दबाव और हमलों' का सामना कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 17 जून 2026 को यूएन चार्टर की प्रस्तावना पर प्रतीकात्मक रूप से हस्ताक्षर करते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए एक शब्द में 'उम्मीद' है। यह हस्ताक्षर 26 जून को मनाए जाने वाले यूएन चार्टर दिवस की तैयारी के तहत किए गए, जो 1945 के उस ऐतिहासिक दस्तावेज़ की स्मृति को ताज़ा करते हैं जिसने संयुक्त राष्ट्र की नींव रखी थी।

हस्ताक्षर का संदर्भ और महत्व

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने इस प्रतीकात्मक हस्ताक्षर अभियान का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने इसे 'चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की नई अभिव्यक्ति' बताया। बेयरबॉक के कार्यालय द्वारा जारी एक नोट में कहा गया कि इस वर्ष यह प्रतिबद्धता इसलिए और भी ज़रूरी है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र कई तरह के दबावों और चुनौतियों का सामना कर रहा है।

भारत की संस्थापक भूमिका

गौरतलब है कि भारत संयुक्त राष्ट्र के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक था। 25 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन प्रतिनिधिमंडल के नेता ए. रामास्वामी मुदलियार ने मूल चार्टर पर भारत की ओर से हस्ताक्षर किए थे — यह आज़ादी से भी पहले की बात है। यह तथ्य बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

संयुक्त राष्ट्र पर बढ़ते दबाव

बेयरबॉक के कार्यालय के नोट में स्पष्ट किया गया, 'चार्टर पर हस्ताक्षर के 81 साल बाद हम एक चौराहे पर खड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र न सिर्फ राजनीतिक और वित्तीय दबाव में है, बल्कि उस पर हमले भी हो रहे हैं।' नोट में यह भी कहा गया कि इस वर्ष का यूएन चार्टर दिवस आयोजन केवल चिंतन का अवसर नहीं, बल्कि 'कार्रवाई का आह्वान' भी है।

भारत की वैश्विक स्थिति और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय कूटनीति चला रहा है। पी. हरीश का यह कदम बहुपक्षीय मंचों पर भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है। आने वाले 26 जून को यूएन चार्टर दिवस पर इस प्रतीकात्मक पहल को औपचारिक रूप दिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं सुरक्षा परिषद की संरचना में सुधार की माँग भी करता है — जो स्वयं उसी चार्टर पर टिकी है। 1945 में आज़ादी से पहले संस्थापक सदस्य बनने की ऐतिहासिक भूमिका को भुनाना भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जो उसे वैश्विक दक्षिण के नेता के रूप में स्थापित करती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह प्रतीकात्मकता ठोस बहुपक्षीय सुधारों में तब्दील होती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी. हरीश ने यूएन चार्टर पर प्रतीकात्मक हस्ताक्षर क्यों किए?
संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक की पहल पर 26 जून के यूएन चार्टर दिवस की तैयारी के तहत यह हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य चार्टर के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः जताना था। पी. हरीश ने इसे भारत के 140 करोड़ नागरिकों की 'उम्मीद' से जोड़ा।
भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य कैसे बना?
भारत संयुक्त राष्ट्र के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक है। 25 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता ए. रामास्वामी मुदलियार ने मूल चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे — यह आज़ादी से भी पहले की घटना है।
यूएन चार्टर दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
यूएन चार्टर दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जून को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1945 में सैन फ्रांसिस्को में मूल चार्टर पर हस्ताक्षर हुए थे। यह दिन संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों — शांति, सहयोग और मानवाधिकार — के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।
संयुक्त राष्ट्र इस समय किन दबावों का सामना कर रहा है?
बेयरबॉक के कार्यालय के अनुसार, चार्टर के 81 साल बाद संयुक्त राष्ट्र राजनीतिक और वित्तीय दबाव के साथ-साथ सीधे 'हमलों' का भी सामना कर रहा है। इसी पृष्ठभूमि में इस वर्ष का चार्टर दिवस आयोजन 'कार्रवाई का आह्वान' बताया गया है।
भारत के लिए यूएन चार्टर का क्या महत्व है?
पी. हरीश के अनुसार, यूएन चार्टर भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए 'उम्मीद' का प्रतीक है। यह बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उन सिद्धांतों को दर्शाता है जिनसे भारत आज़ादी से पहले भी जुड़ा हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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