30 जून 2026
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उत्तराखंड को ₹7,000 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ: CM धामी-गडकरी बैठक में बड़ी सहमति, कुंभ 2027 पर फोकस

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उत्तराखंड को ₹7,000 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ: CM धामी-गडकरी बैठक में बड़ी सहमति, कुंभ 2027 पर फोकस

सारांश

उत्तराखंड के CM धामी की केंद्रीय मंत्री गडकरी से मुलाकात में ₹7,000 करोड़ की सड़क परियोजनाओं पर सहमति बनी। हरिद्वार बाईपास से लेकर पिथौरागढ़ तक — यह बैठक कुंभ 2027 और सीमांत क्षेत्रों के बुनियादी ढाँचे दोनों के लिए अहम है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी ने 30 जून 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की।
बैठक में लगभग ₹7,000 करोड़ की विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर सहमति बनी।
NHO के अंतर्गत 5 प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति, कुल अनुमानित लागत ₹2,966 करोड़ ।
केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि से 2026-27 के लिए ₹750 करोड़ की परियोजनाओं को मंज़ूरी।
हरिद्वार बाईपास और कोटद्वार बाईपास परियोजनाओं को कुंभ 2027 से पहले पूरा करने पर सहमति।
वर्ष 2025-26 तक की ₹530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र जारी करने का अनुरोध।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 जून 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की, जिसमें राज्य की लगभग ₹7,000 करोड़ लागत की विभिन्न महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं पर सहमति बनी। यह बैठक हरिद्वार में 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों और राज्य के सीमांत क्षेत्रों के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

मुख्य परियोजनाएँ और स्वीकृतियाँ

बैठक में एनएचओ (NHO) के अंतर्गत 5 प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग ₹2,966 करोड़ है। इनमें श्रीनगर बाईपास का पीएमसी, पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग की चार-लेनिंग, लोहाघाट एवं पिथौरागढ़ बाईपास की एलाइनमेंट, मझोला से खटीमा के आबादी भाग में चार-लेन विस्तार तथा रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार को लगभग ₹750 करोड़ लागत की परियोजनाओं की स्वीकृति पर भी सहमति प्रदान की गई। राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्पर मार्गों के माध्यम से संपर्क विस्तार को भी मंज़ूरी मिली।

कुंभ 2027 और हरिद्वार बाईपास

मुख्यमंत्री धामी ने अर्धकुंभ मेला 2027 के मद्देनज़र हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जाने का विशेष अनुरोध किया। उनका तर्क था कि इससे यातायात दबाव में उल्लेखनीय कमी आएगी और लाखों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। कोटद्वार बाईपास परियोजना में भी तेज़ी लाने का अनुरोध किया गया, ताकि क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था सुधरे और स्थानीय जनता को जाम से राहत मिले। दोनों प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई।

सामरिक और पर्यटन महत्व

मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य की भौगोलिक विशिष्टताओं — सीमांत क्षेत्रों की सामरिक एवं रणनीतिक महत्ता, तीर्थाटन, पर्यटन तथा आपदा प्रबंधन की ज़रूरतों — को रेखांकित करते हुए एक सुदृढ़ और आधुनिक सड़क नेटवर्क की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ी भूगोल के कारण सड़क संपर्क न केवल आर्थिक विकास, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री अजय टम्टा भी उपस्थित रहे।

लंबित प्रतिपूर्ति राशि का मुद्दा

मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 2025-26 तक की ₹530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि को शीघ्र अवमुक्त किए जाने का भी अनुरोध किया। यह राशि राज्य द्वारा पूर्व में पूर्ण की गई सड़क परियोजनाओं के एवज में केंद्र से देय है। राज्य सरकार के अनुसार, इस राशि के समय पर मिलने से नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी।

आगे की राह

बैठक में बनी सहमति को उत्तराखंड के बुनियादी ढाँचे के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। अब नज़रें इस बात पर होंगी कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए औपचारिक आदेश कब जारी होते हैं और हरिद्वार बाईपास जैसी समयसंवेदी परियोजनाएँ कुंभ 2027 से पहले पूरी हो पाती हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की यह सहमति कागज़ पर प्रभावशाली है, लेकिन उत्तराखंड में केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन का इतिहास मिला-जुला रहा है — भूगोल, मौसम और भूस्खलन जैसी चुनौतियाँ समयसीमा को बार-बार पीछे धकेलती हैं। हरिद्वार बाईपास की असली परीक्षा यह है कि क्या यह कुंभ 2027 से पहले चालू हो पाएगी — एक ऐसा आयोजन जहाँ करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ यातायात व्यवस्था को चरमसीमा तक धकेल देती है। लंबित ₹530.11 करोड़ की प्रतिपूर्ति का मुद्दा यह भी बताता है कि केंद्र-राज्य वित्तीय तालमेल अभी भी उतना सहज नहीं है जितना बैठकों की तस्वीरें दिखाती हैं।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM धामी और गडकरी की बैठक में क्या तय हुआ?
30 जून 2025 को नई दिल्ली में हुई बैठक में उत्तराखंड की लगभग ₹7,000 करोड़ लागत की विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर सहमति बनी। इनमें NHO के तहत 5 प्रमुख परियोजनाएँ (₹2,966 करोड़), केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि से ₹750 करोड़ की परियोजनाएँ और हरिद्वार व कोटद्वार बाईपास शामिल हैं।
NHO के तहत स्वीकृत 5 प्रमुख परियोजनाएँ कौन-सी हैं?
NHO के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में श्रीनगर बाईपास का पीएमसी, पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग की चार-लेनिंग, लोहाघाट एवं पिथौरागढ़ बाईपास की एलाइनमेंट, मझोला से खटीमा के आबादी भाग में चार-लेन विस्तार, और रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण शामिल हैं। इन पाँचों की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹2,966 करोड़ है।
हरिद्वार बाईपास परियोजना कुंभ 2027 के लिए क्यों ज़रूरी है?
हरिद्वार में 2027 में अर्धकुंभ मेला आयोजित होना है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। हरिद्वार बाईपास के पूरा होने से शहर पर यातायात का दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। CM धामी ने इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने का विशेष अनुरोध किया, जिस पर सहमति मिली।
उत्तराखंड सरकार ने लंबित प्रतिपूर्ति राशि के बारे में क्या माँग की?
CM धामी ने वर्ष 2025-26 तक की ₹530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि को शीघ्र अवमुक्त करने का अनुरोध किया। यह राशि राज्य द्वारा पहले पूरी की गई सड़क परियोजनाओं के एवज में केंद्र से देय है।
इन परियोजनाओं से उत्तराखंड को क्या फायदा होगा?
ये परियोजनाएँ राज्य के सड़क संपर्क, पर्यटन, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक पहुँच और आपदा प्रबंधन को मज़बूत करेंगी। दूरस्थ और सीमावर्ती इलाकों तक बेहतर सड़क नेटवर्क से स्थानीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को लाभ मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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