24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीओके में 7 मौतों के बाद जेएसएमएम प्रमुख शफी बुरफत ने भारत और विश्व समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीओके में 7 मौतों के बाद जेएसएमएम प्रमुख शफी बुरफत ने भारत और विश्व समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की

सारांश

पीओके के रावलकोट में 7 जून को 7 नागरिकों की मौत के बाद जेएसएमएम प्रमुख शफी बुरफत ने एक्स पर पोस्ट कर भारत, संयुक्त राष्ट्र और विश्व लोकतंत्रों से पाकिस्तानी सेना के कथित दमन के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप की माँग की — और चेतावनी दी कि चुप्पी वैश्विक शांति के लिए खतरा है।

मुख्य बातें

जेएसएमएम प्रमुख शफी बुरफत ने 9 जून 2026 को भारत सहित विश्व समुदाय से पीओके में हस्तक्षेप की माँग की।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार 7 जून को रावलकोट, पीओके में पुलिस और जेएएसी प्रदर्शनकारियों की झड़प में 7 नागरिक मारे गए।
बुरफत ने एक्स पर पोस्ट कर पाकिस्तानी सेना पर पीओके में 'खुली क्रूरता और फासीवाद' का आरोप लगाया।
उन्होंने सिंधियों, बलोच, पश्तूनों और पीओके के लोगों सहित कई समुदायों पर कथित दमन की ओर ध्यान दिलाया।
बुरफत ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय चुप्पी वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरनाक होगी।

जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) के चेयरमैन शफी बुरफत ने 9 जून 2026 को भारत सहित संयुक्त राष्ट्र, यूरोप और दुनियाभर की लोकतांत्रिक सरकारों से अपील की है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप करें। यह अपील 7 जून को पीओके के रावलकोट इलाके में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 7 आम नागरिकों की मौत की खबरों के बाद आई है।

रावलकोट में क्या हुआ

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 7 जून को पीओके के रावलकोट में पुलिस और नए प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसमें 7 नागरिकों की जान गई। इस घटना ने पीओके में नागरिक असंतोष और सुरक्षा बलों के बीच बढ़ते तनाव को एक बार फिर सामने ला दिया है।

बुरफत का बयान और अपील

बुरफत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हम पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बेगुनाह लोगों के खिलाफ की गई खुली क्रूरता, फासीवाद और अपराध की कड़ी निंदा करते हैं।' उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, भारत, यूरोप, ब्रिटेन, मिडिल ईस्ट, ईस्ट एशिया, अफ्रीका, मध्य एशिया और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से पीओके में कथित नरसंहार और सरकार-प्रायोजित जुल्म पर 'तुरंत ध्यान देने' की माँग की।

भारत से विशेष अपील

सिंधी नेता बुरफत ने खास तौर पर भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और पड़ोसी देश' बताते हुए अपील की कि वह दखल दे और 'पाकिस्तान के जुल्म, कब्जे, गुलामी और फासीवादी राज से बचाने में मदद करे।' उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी मिलिट्री सिंधियों, पीओके के लोगों, पश्तूनों, सराइकी, बलोच और ब्राहुई जैसे ऐतिहासिक समुदायों पर 'छल, दमन और धर्म के राजनीतिक दुरुपयोग' के ज़रिए नियंत्रण बनाए हुए है।

व्यापक चेतावनी

बुरफत ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान द्वारा कथित तौर पर प्रायोजित आतंकवाद और दमन का सामना न करने से न केवल इस क्षेत्र के लोगों को खतरा है, बल्कि यह वैश्विक शांति, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी बढ़ता खतरा है। उन्होंने कहा कि 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस तरह के सुनियोजित दमन के सामने चुप नहीं रह सकता' और न्याय, स्वतंत्रता तथा आत्मनिर्णय के सार्वभौमिक सिद्धांतों के समर्थन में खड़े होने का आह्वान किया।

आगे की स्थिति

यह घटना ऐसे समय में आई है जब पीओके में आर्थिक माँगों को लेकर नागरिक आंदोलन पहले से सक्रिय है और जेएएसी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान सरकार का आधिकारिक रुख इस मामले में आगे की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब यह व्यापक राजनीतिक असंतोष का प्रतीक बनता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने में सीमित हैं, इसलिए घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है — जो किसी भी वैश्विक हस्तक्षेप की माँग की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ी बाधा है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रावलकोट पीओके में 7 जून को क्या हुआ?
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार 7 जून 2026 को पीओके के रावलकोट इलाके में पुलिस और नए प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 7 नागरिकों की मौत हो गई।
जेएसएमएम और शफी बुरफत कौन हैं?
जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) एक सिंधी राष्ट्रवादी संगठन है और शफी बुरफत इसके चेयरमैन हैं। बुरफत बर्लिन से पाकिस्तान में कथित दमन के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
बुरफत ने भारत से क्या माँग की है?
बुरफत ने भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' बताते हुए अपील की है कि वह पीओके में पाकिस्तानी सेना के कथित दमन, मानवाधिकार उल्लंघन और 'फासीवादी राज' के खिलाफ हस्तक्षेप करे और प्रभावित समुदायों की मदद करे।
जेएएसी पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?
स्रोत के अनुसार जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को हाल ही में पाकिस्तान द्वारा प्रतिबंधित किया गया है। यह संगठन पीओके में आर्थिक माँगों को लेकर आंदोलन चला रहा था, हालाँकि प्रतिबंध के विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
बुरफत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को क्या चेतावनी दी?
बुरफत ने कहा कि पाकिस्तान के कथित दमन का सामना न करने से न केवल क्षेत्रीय लोगों को खतरा है, बल्कि यह वैश्विक शांति, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी बढ़ता खतरा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आत्मनिर्णय और मानवाधिकार के सार्वभौमिक सिद्धांतों के समर्थन में खड़े होने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले