पीओके में 7 मौतों के बाद जेएसएमएम प्रमुख शफी बुरफत ने भारत और विश्व समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) के चेयरमैन शफी बुरफत ने 9 जून 2026 को भारत सहित संयुक्त राष्ट्र, यूरोप और दुनियाभर की लोकतांत्रिक सरकारों से अपील की है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप करें। यह अपील 7 जून को पीओके के रावलकोट इलाके में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 7 आम नागरिकों की मौत की खबरों के बाद आई है।
रावलकोट में क्या हुआ
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 7 जून को पीओके के रावलकोट में पुलिस और नए प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसमें 7 नागरिकों की जान गई। इस घटना ने पीओके में नागरिक असंतोष और सुरक्षा बलों के बीच बढ़ते तनाव को एक बार फिर सामने ला दिया है।
बुरफत का बयान और अपील
बुरफत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हम पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बेगुनाह लोगों के खिलाफ की गई खुली क्रूरता, फासीवाद और अपराध की कड़ी निंदा करते हैं।' उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, भारत, यूरोप, ब्रिटेन, मिडिल ईस्ट, ईस्ट एशिया, अफ्रीका, मध्य एशिया और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से पीओके में कथित नरसंहार और सरकार-प्रायोजित जुल्म पर 'तुरंत ध्यान देने' की माँग की।
भारत से विशेष अपील
सिंधी नेता बुरफत ने खास तौर पर भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और पड़ोसी देश' बताते हुए अपील की कि वह दखल दे और 'पाकिस्तान के जुल्म, कब्जे, गुलामी और फासीवादी राज से बचाने में मदद करे।' उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी मिलिट्री सिंधियों, पीओके के लोगों, पश्तूनों, सराइकी, बलोच और ब्राहुई जैसे ऐतिहासिक समुदायों पर 'छल, दमन और धर्म के राजनीतिक दुरुपयोग' के ज़रिए नियंत्रण बनाए हुए है।
व्यापक चेतावनी
बुरफत ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान द्वारा कथित तौर पर प्रायोजित आतंकवाद और दमन का सामना न करने से न केवल इस क्षेत्र के लोगों को खतरा है, बल्कि यह वैश्विक शांति, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी बढ़ता खतरा है। उन्होंने कहा कि 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस तरह के सुनियोजित दमन के सामने चुप नहीं रह सकता' और न्याय, स्वतंत्रता तथा आत्मनिर्णय के सार्वभौमिक सिद्धांतों के समर्थन में खड़े होने का आह्वान किया।
आगे की स्थिति
यह घटना ऐसे समय में आई है जब पीओके में आर्थिक माँगों को लेकर नागरिक आंदोलन पहले से सक्रिय है और जेएएसी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान सरकार का आधिकारिक रुख इस मामले में आगे की दिशा तय करेगा।