पीओके मानवाधिकार उल्लंघन: जिनेवा में यूएनएचआरसी सत्र के दौरान कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
जिनेवा के जिनेवा प्रेस क्लब में 29 सितंबर 2026 को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर कश्मीरी नेताओं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की। यह सम्मेलन यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (यूएनएचआरसी) के 63वें सत्र के दौरान यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) द्वारा आयोजित किया गया था।
मुख्य आरोप और मांगें
यूकेपीएनपी के अनुसार, सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर न्यायेत्तर हत्या (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग), लोगों को जबरन गायब करने, मनमाने ढंग से गिरफ्तारी, कम्युनिकेशन ब्लैकआउट और बल के अत्यधिक प्रयोग के कथित आरोपों पर गहरी चिंता जताई। प्रतिनिधियों ने सिविल सोसाइटी समूह 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) और उसके शांतिपूर्ण जन-अधिकार आंदोलन के प्रति एकजुटता भी व्यक्त की।
यूकेपीएनपी ने इस अवसर पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच, कथित गैर-कानूनी हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही, पीड़ित परिवारों को न्याय, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और पीओके में मौलिक स्वतंत्रताओं की बहाली की माँग रखी।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर
सम्मेलन में कब्जे वाले इलाके में लोकतांत्रिक स्व-शासन, प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय स्वामित्व, आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी, कानून के शासन और स्थिरता की माँगें भी प्रमुखता से उठाई गईं। यूकेपीएनपी ने आतंकवाद, उग्रवाद, राजनीतिक हिंसा और पीओके को भू-राजनीतिक हितों के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने का विरोध एक बार फिर दोहराया।
यूएनएचआरसी में यूकेपीएनपी का संबोधन
सोमवार को यूएनएचआरसी सत्र को संबोधित करते हुए अफ्रीकन डेवलपमेंट एसोसिएशन (एडीए) के प्रतिनिधि और यूकेपीएनपी के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी ने इस साल 5 जून 2026 से पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा दमन बढ़ने की खबरों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कथित उल्लंघनों की तत्काल, स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव बनाने का आग्रह किया।
शौकत अली ने काउंसिल को संबोधित करते हुए कहा, 'शांतिपूर्ण असहमति आतंकवाद नहीं है और अधिकारों की माँग करना कोई अपराध नहीं है।' उन्होंने पाकिस्तान से चार स्पष्ट माँगें रखीं — शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग तत्काल बंद करना, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों की रिहाई, लापता व्यक्तियों के बारे में जानकारी देना, और पूरे पीओके में बिना किसी बाधा के इंटरनेट व मोबाइल सेवाएँ बहाल करना।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब जिनेवा में यूएनएचआरसी का 63वाँ सत्र जारी है और पाकिस्तान की मानवाधिकार स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगरानी में है। गौरतलब है कि पीओके में नागरिक अधिकारों पर इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय आवाज़ पहले भी उठती रही है, लेकिन कार्यकर्ताओं के अनुसार ठोस जवाबदेही अब तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है। आलोचकों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय दबाव किसी बाध्यकारी तंत्र से नहीं जुड़ता, इस तरह के सम्मेलनों का व्यावहारिक प्रभाव सीमित रहता है। फिर भी यूकेपीएनपी जैसे संगठनों की सक्रियता, संयुक्त राष्ट्र मंच पर पीओके के मुद्दे को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।