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पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित बर्बरता: महीनों बाद भी इंसाफ को तरस रहे परिवार

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पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित बर्बरता: महीनों बाद भी इंसाफ को तरस रहे परिवार

सारांश

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बिजली दरों के विरोध से उपजे आंदोलन को कुचलने के बाद महीनों बीत गए हैं — लेकिन पीड़ित परिवारों के जख्म अभी भी ताजे हैं। जेकेएचआरओ की 47 पन्नों की रिपोर्ट में न्यायेतर हत्याओं और शव सौंपने की बदले में जबरन बयान लेने के आरोप हैं, जो पीओके में जवाबदेही के गहरे संकट की ओर इशारा करते हैं।

मुख्य बातें

पीओके में जेएएसी के नेतृत्व में बिजली दरों के विरोध को कुचलने के लिए पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत संगठन पर प्रतिबंध लगाया और नेताओं को गिरफ्तार किया।
26 वर्षीय फहद बरकत रावलकोट के सैन्य अस्पताल में रक्तदान करने गए थे और 7 जून की रात अपना अंतिम संदेश भेजने के बाद लापता हो गए; उनकी बहन के अनुसार उन्हें गर्दन में गोली मारी गई।
जेकेएचआरओ ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बरकत का शव तब तक नहीं सौंपा जब तक परिवार ने उन्हें आतंकवादी घोषित करने वाले बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए।
जेएएसी ने 5 जून के बाद से 100 से अधिक मौतों का दावा किया है; स्थानीय निवासियों का कहना है असली संख्या और अधिक हो सकती है।
शौकत नवाज मीर (धीरकोट, 30 जून से लापता) और जाबिर मुमताज (कथित तौर पर 5 सितंबर को हिरासत में मारे गए) के परिवार भी जानकारी और न्याय के लिए इंतजार कर रहे हैं।
जेकेएचआरओ ने अधिकारियों से सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम दस्तावेज और हिरासत रिकॉर्ड जारी करने की माँग की है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित हिंसक कार्रवाई के महीनों बाद भी पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहे हैं। यूके-पंजीकृत संगठन जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (जेकेएचआरओ) की 47 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में मनमाने ढंग से हिरासत में लेने, न्यायेतर हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं। ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' ने इस रिपोर्ट के हवाले से इन मामलों को सार्वजनिक किया है।

विरोध की पृष्ठभूमि

पीओके में यह आंदोलन मूलतः बिजली की बढ़ती कीमतों और जीवन-यापन की लागत के विरोध में शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह क्षेत्र के संवैधानिक और राजनीतिक ढाँचे को चुनौती देने वाले व्यापक आंदोलन में बदल गया। जमीनी कार्यकर्ताओं के संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी' (जेएएसी) ने 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच चरणबद्ध चुनाव बहिष्कार का आह्वान किया था। संगठन का तर्क था कि मौजूदा शासन-व्यवस्था स्थानीय निवासियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने में विफल रही है।

दमन और कार्रवाई

रिपोर्टों के अनुसार, जेएएसी के इस कदम के बाद पाकिस्तान सरकार ने संगठन पर कड़े आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया। कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया और आंदोलन को कुचलने के लिए एक व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया गया। इसी अभियान के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की घटनाएँ सामने आईं। जेएएसी ने सार्वजनिक रूप से 5 जून के बाद से 100 से अधिक मौतों का दावा किया है, जबकि स्थानीय निवासियों के अनुसार वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

फहद बरकत का मामला

26 वर्षीय फहद बरकत रावलकोट के एक सैन्य अस्पताल में रक्तदान करने गए थे, लेकिन 7 जून की रात 11:31 बजे अपनी बहन को अंतिम संदेश भेजने के बाद वे कभी घर नहीं लौटे। उनकी बहन के अनुसार, रात लगभग 1 बजे अस्पताल के गेट में प्रवेश करते समय उन्हें गर्दन में गोली मारी गई थी। परिवार दो महीने से अधिक समय तक यह मानता रहा कि उन्हें पुलिस ने हिरासत में रखा है और वे रिहा हो जाएँगे।

पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' ने जून में प्रकाशित एक रिपोर्ट में रावलकोट झड़प का जिक्र करते हुए मारे गए नागरिकों की सूची में बरकत का नाम शामिल किया था। जेकेएचआरओ ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने बरकत का शव तब तक नहीं सौंपा जब तक परिवार उन्हें 'मुठभेड़ में मारा गया आतंकवादी' घोषित करने वाले बयान पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं हुआ।

अन्य पीड़ित परिवारों की व्यथा

शौकत नवाज मीर का परिवार 30 जून को धीरकोट से उनकी कथित गिरफ्तारी के तीन महीने से अधिक समय बाद भी उनके ठिकाने की जानकारी का इंतजार कर रहा है। एक अन्य मामले में जाबिर मुमताज को कथित तौर पर 5 सितंबर को सुरक्षाकर्मियों ने मार डाला, जबकि वे दो हफ्ते से हिरासत में थे। उनके परिवार ने भी दावा किया कि शव सौंपने के बदले उन्हें आतंकवादी घोषित करने वाले बयान पर हस्ताक्षर की शर्त रखी गई। परिवार के इनकार के बाद कथित तौर पर अधिकारियों ने स्वयं दफनाने की प्रक्रिया पूरी की।

जवाबदेही की माँग

जेकेएचआरओ ने अधिकारियों से लिखित जवाब, हताहतों और हिरासत के रिकॉर्ड तथा 'ऑपरेशनल ऑर्डर' उपलब्ध कराने की माँग की है। संगठन ने सीसीटीवी फुटेज, अस्पताल के रक्तदाता रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम दस्तावेज और दफन के रिकॉर्ड जारी करने की भी अपील की है। संगठन ने यह भी कहा है कि उसने अधिकारियों को रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। ये मामले पीओके में नागरिकों के साथ हुए कथित बर्ताव को लेकर पारदर्शी जाँच और जवाबदेही की माँग को और तीव्र कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य-प्रायोजित कथा-निर्माण का एक गंभीर उदाहरण भी है। जेएएसी पर आतंकवाद-रोधी कानूनों का प्रयोग इस पैटर्न को और स्पष्ट करता है जहाँ असहमति को 'आतंक' की संज्ञा देकर दबाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक मीडिया का ध्यान इस ओर जाना जरूरी है, क्योंकि क्षेत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता पर व्यावहारिक प्रतिबंध के चलते सत्य की परतें उघाड़ना बेहद कठिन है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई किस कारण से शुरू हुई?
पीओके में विरोध की शुरुआत बिजली की बढ़ती कीमतों और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ हुई थी। बाद में यह आंदोलन क्षेत्र के संवैधानिक और राजनीतिक ढाँचे को चुनौती देने वाली बड़ी माँगों में बदल गया, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगाकर सुरक्षा अभियान शुरू किया।
फहद बरकत का मामला क्या है और वे कैसे लापता हुए?
26 वर्षीय फहद बरकत रावलकोट के एक सैन्य अस्पताल में रक्तदान करने गए थे और 7 जून की रात 11:31 बजे अंतिम संदेश भेजने के बाद लापता हो गए। उनकी बहन के अनुसार रात करीब 1 बजे अस्पताल गेट में प्रवेश के समय उन्हें गर्दन में गोली मारी गई थी। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' ने जून में रावलकोट झड़प में मारे गए नागरिकों की सूची में उनका नाम प्रकाशित किया था।
जेकेएचआरओ कौन सा संगठन है और इसने क्या माँगें रखी हैं?
जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (जेकेएचआरओ) यूके में पंजीकृत एक मानवाधिकार संगठन है जो पीओके में कथित उल्लंघनों की निगरानी करता है। इसने अधिकारियों से लिखित जवाब, हिरासत रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम दस्तावेज और दफन के रिकॉर्ड जारी करने की माँग की है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
पीओके में कितनी मौतों का दावा किया गया है?
जेएएसी ने सार्वजनिक रूप से 5 जून के बाद से 100 से अधिक लोगों की मौत का दावा किया है। हालाँकि स्थानीय निवासियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है, क्योंकि क्षेत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता और सूचना तक पहुँच सीमित है।
जाबिर मुमताज और शौकत नवाज मीर के परिवारों के साथ क्या हुआ?
शौकत नवाज मीर 30 जून को धीरकोट से कथित रूप से गिरफ्तार हुए और तीन महीने से अधिक समय बाद भी उनके ठिकाने की कोई जानकारी उनके परिवार को नहीं दी गई है। जाबिर मुमताज को कथित तौर पर 5 सितंबर को दो हफ्ते की हिरासत के बाद मार डाला गया; उनके परिवार ने दावा किया कि शव सौंपने के लिए उन्हें आतंकवादी घोषित करने वाले बयान पर हस्ताक्षर की शर्त रखी गई, जिसे परिवार ने अस्वीकार कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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