28 जून 2026
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कराची रेंजर्स कैंप पर आतंकी हमला: तीन सुरक्षाकर्मी शहीद, तीन आतंकी ढेर, एक अफगान नागरिक गिरफ्तार

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कराची रेंजर्स कैंप पर आतंकी हमला: तीन सुरक्षाकर्मी शहीद, तीन आतंकी ढेर, एक अफगान नागरिक गिरफ्तार

सारांश

कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर रेंजर्स कैंप पर देर रात हुए आतंकी हमले ने पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन जवान शहीद, तीन आतंकी ढेर और एक अफगान नागरिक गिरफ्तार — यह हमला TTP से जुड़े गुट जमात-उल-अहरार की शहरी घुसपैठ की बढ़ती क्षमता का संकेत है।

मुख्य बातें

कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर स्थित पाकिस्तान रेंजर्स (सिंध) कैंप पर 28 जून 2025 की देर रात आतंकी हमला हुआ।
हमले में तीन सुरक्षाकर्मी शहीद और चार जवान घायल हुए।
तीन हथियारबंद हमलावर मारे गए ; एक घायल अफगान नागरिक को गिरफ्तार किया गया।
ISPR ने हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार से जुड़े आतंकियों पर डाली, जो TTP का एक अलग गुट है।
हमलावरों ने पहले मुख्य द्वार पर विस्फोट किया, फिर परिसर में घुसने की कोशिश की।
पाकिस्तानी सेना ने 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' अभियान के तहत जवाबी कार्रवाई और सर्च ऑपरेशन जारी रखने की घोषणा की।

पाकिस्तान के कराची स्थित पाकिस्तान रेंजर्स (सिंध) के गुलिस्तान-ए-जौहर कैंप पर 28 जून 2025 की देर रात एक भीषण आतंकी हमला हुआ, जिसमें तीन सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए और तीन हथियारबंद हमलावर मारे गएपाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने रविवार को जारी बयान में इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार से जुड़े आतंकियों पर डाली है।

हमले का घटनाक्रम

ISPR के बयान के अनुसार, हथियारबंद हमलावरों ने पहले कैंप के मुख्य द्वार पर विस्फोट किया और फिर परिसर में घुसने का प्रयास किया। रेंजर्स के जवानों ने तत्परता से जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावरों के मंसूबे नाकाम कर दिए। विस्फोट और गोलीबारी के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में क्लियरेंस अभियान शुरू किया, जिसके दौरान एक संदिग्ध आत्मघाती हमलावर का शव भी बरामद किया गया।

मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए, जबकि एक घायल हमलावर — जो कथित तौर पर अफगान नागरिक है — को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया। इस हमले में चार अन्य जवान घायल भी हुए हैं।

जमात-उल-अहरार कौन है

जमात-उल-अहरार, प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से अलग हुआ एक उग्रवादी गुट है, जो पाकिस्तान में कई हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हिंसा की बढ़ती लहर से जूझ रहा है। गौरतलब है कि कराची जैसे बड़े शहरी केंद्र पर इस तरह का हमला पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर चुनौती का संकेत है।

सेना की प्रतिक्रिया और 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' अभियान

पाकिस्तानी सेना ने स्पष्ट किया है कि हमले के जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ जवाबी अभियान चलाया जाएगा और क्षेत्र में अन्य संदिग्ध हमलावरों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना ने कहा कि सुरक्षा बल और कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' अभियान के तहत हथियारबंद समूहों के खिलाफ कार्रवाई पूरी ताकत से जारी रखेंगी।

पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जवानों का बलिदान देश की सुरक्षा के प्रति सेना की अटूट प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

आम जनता और सुरक्षा पर असर

कराची पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर और आर्थिक केंद्र है। गुलिस्तान-ए-जौहर एक घनी आबादी वाला इलाका है, जहाँ अर्धसैनिक बलों के मुख्यालय पर इस तरह का हमला स्थानीय नागरिकों में भय और असुरक्षा की भावना को बढ़ाने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी केंद्रों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना आतंकी संगठनों की बदलती रणनीति को दर्शाता है।

आगे क्या होगा

ISPR ने संकेत दिया है कि गिरफ्तार अफगान नागरिक से पूछताछ के आधार पर हमले के नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' अभियान के तहत व्यापक कार्रवाई जारी रहने की उम्मीद है, और आने वाले दिनों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर सुरक्षा और कड़ी किए जाने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो द्विपक्षीय संबंधों पर और दबाव बना सकती है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कराची रेंजर्स कैंप पर हमला कब और कहाँ हुआ?
यह हमला 28 जून 2025 की देर रात कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित पाकिस्तान रेंजर्स (सिंध) के कैंप पर हुआ। हमलावरों ने पहले मुख्य द्वार पर विस्फोट किया और फिर परिसर में घुसने की कोशिश की।
इस हमले में कितने लोग मारे गए और कितने घायल हुए?
हमले में तीन पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और चार अन्य जवान घायल हुए। तीन हथियारबंद हमलावर भी मारे गए, जबकि एक घायल अफगान नागरिक हमलावर को गिरफ्तार किया गया।
जमात-उल-अहरार क्या है और इसका TTP से क्या संबंध है?
जमात-उल-अहरार, प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से अलग हुआ एक उग्रवादी गुट है। ISPR ने इसी गुट से जुड़े आतंकियों को इस हमले का जिम्मेदार बताया है।
पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के बाद क्या कदम उठाए हैं?
ISPR के अनुसार, हमले के बाद पूरे क्षेत्र में क्लियरेंस और सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है। पाकिस्तानी सेना ने 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' अभियान के तहत हथियारबंद समूहों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखने की घोषणा की है।
'अज्म-ए-इस्तेहकाम' अभियान क्या है?
'अज्म-ए-इस्तेहकाम' पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का एक संयुक्त अभियान है, जिसका उद्देश्य देश में सक्रिय हथियारबंद और आतंकी समूहों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करना है। इस अभियान के तहत ही कराची हमले के बाद जवाबी ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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