जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा बिहार का मोहम्मद जफर हापुड़ से गिरफ्तार, मेरठ मदरसे के प्रिंसिपल हैरान
सारांश
मुख्य बातें
यूपी आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने 18 अगस्त 2026 को बिहार के पूर्णिया निवासी मोहम्मद जफर को हापुड़ से गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार जफर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संबंध रखने और उसे धन मुहैया कराने का आरोप है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब सुरक्षा एजेंसियाँ देश में आतंकी नेटवर्क की फंडिंग पर विशेष नज़र रख रही हैं।
मुख्य आरोप और साक्ष्य
अधिकारियों ने बताया कि जफर कथित तौर पर मस्जिद निर्माण के नाम पर चंदा एकत्र करता था और वह राशि जैश-ए-मोहम्मद को भेजता था। जाँचकर्ताओं के अनुसार उसके मोबाइल फोन में पाकिस्तान स्थित भारत-विरोधी संगठनों से जुड़ी सामग्री बरामद हुई। यह भी आरोप है कि उसने भारत में जिहाद को बढ़ावा देने की बात कही थी।
मेरठ मदरसे से पुराना नाता
गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि जफर ने मेरठ के एक मदरसे में 2018 से 2022 तक पढ़ाई की थी। मदरसे के प्रिंसिपल मोहम्मद रिजवान ने बताया कि जफर ने 2018 में 9वीं कक्षा में प्रवेश लिया था। वह 2020-21 के सत्र में ड्रॉप कर गया, फिर लौटा और 10वीं कक्षा में दो बार अनुत्तीर्ण हुआ। 2022 में वह मदरसा छोड़कर चला गया।
रिजवान ने कहा, 'जब वह आया था तो बहुत छोटा और काफी दुबला-पतला था। उस समय उसका व्यवहार बिल्कुल सामान्य था। हम सोच भी नहीं सकते थे कि ऐसा कुछ हो सकता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्था छोड़ने के बाद किसी छात्र की गतिविधियों की जानकारी रखना मदरसे के लिए संभव नहीं होता।
प्रिंसिपल की प्रतिक्रिया
प्रिंसिपल मोहम्मद रिजवान ने कहा कि यदि जफर पर लगे आरोप साबित होते हैं तो यह अत्यंत निंदनीय होगा। उन्होंने कहा कि कोई शैक्षणिक संस्था किसी व्यक्ति की मानसिकता को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकती, और संस्था छोड़ने के बाद की गतिविधियों की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।
आगे की जाँच
यूपी एटीएस मामले की गहन जाँच कर रही है। जाँच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि जफर ने किन-किन लोगों से संपर्क किया और फंडिंग का नेटवर्क कितना व्यापक है। सुरक्षा एजेंसियाँ उसके मोबाइल में मिली सामग्री की विस्तृत जाँच कर रही हैं।