यूपी एटीएस ने अल-कायदा (AQIS) से जुड़े 19 वर्षीय संदिग्ध आतंकी को आज़मगढ़ से किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने शनिवार, 12 सितंबर को बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकवादी संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) से कथित तौर पर जुड़े एक 19 वर्षीय संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी आज़मगढ़ ज़िले के दीदारगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत चितारा, महमूदपुर से हुई है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिये AQIS की विचारधारा का प्रसार कर रहा था और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपी और आरोपों का ब्यौरा
गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान मोहम्मद नबील के रूप में हुई है। एटीएस के मुताबिक, नबील ने 'गालिब-इल्लल्लाह' नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें वह जिहाद, चाकू, केमिकल और हमलों की योजना के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था। जाँच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी की कथित योजना अन्य देशों के सदस्यों को जोड़कर पाकिस्तान के सहयोग से 'गज़वा-ए-हिंद' को अंजाम देने की थी।
जाँच में यह भी सामने आया कि इस व्हाट्सएप ग्रुप से बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब के लोग भी जुड़े हुए थे, जो इस मामले को अंतरराष्ट्रीय आयाम देता है। एटीएस ने आरोपी के मोबाइल और डिजिटल उपकरणों को ज़ब्त कर आगे की फ़ॉरेंसिक जाँच शुरू कर दी है।
ऑनलाइन कट्टरपंथ का बढ़ता ख़तरा
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के ज़रिये कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि AQIS — अल-कायदा की दक्षिण एशिया शाखा — भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार में अपना नेटवर्क फैलाने की कोशिश करती रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन रिक्रूटमेंट अब पारंपरिक तरीकों से कहीं ज़्यादा प्रभावी साबित हो रहा है, ख़ासकर कम उम्र के युवाओं के बीच।
पिछले महीने ठाणे में भी हुई थी इसी तरह की कार्रवाई
यह यूपी एटीएस की कार्रवाई ठीक उस समय आई है जब पिछले माह महाराष्ट्र के ठाणे में एटीएस ने सोहेल रज्जाक शेख नामक एक ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। शेख पर आरोप था कि उसने इंस्टाग्राम पर एक ग्रुप बनाकर उसमें क़रीब 200 लोगों को जोड़ा और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर फ़रहतुल्लाह ग़ौरी तथा जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर के वीडियो शेयर किए। पूछताछ में शेख ने कथित तौर पर बताया कि उसे इन आतंकी नेताओं के भाषण सुनना पसंद था, जिसके चलते वह उनके वीडियो डाउनलोड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था।
ठाणे और आज़मगढ़ की ये दोनों गिरफ्तारियाँ एक व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करती हैं — जहाँ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को कट्टरपंथी प्रचार और भर्ती के लिए व्यवस्थित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता
यूपी एटीएस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ ऑनलाइन कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ अपनी निगरानी तेज़ कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एन्क्रिप्टेड प्लेटफ़ॉर्म पर गतिविधियों की पहचान करना अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय ख़ुफ़िया सहयोग की ज़रूरत है। नबील की गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने संकेत दिया है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।