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यूपी एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद के कथित आतंकी को दबोचा, मदरसे की आड़ में क्रिप्टो से भेजता था पाकिस्तान फंड

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यूपी एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद के कथित आतंकी को दबोचा, मदरसे की आड़ में क्रिप्टो से भेजता था पाकिस्तान फंड

सारांश

यूपी एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े बिहार के 24 वर्षीय युवक को दबोचा, जो मदरसे की आड़ में चंदा जुटाकर क्रिप्टोकरेंसी से पाकिस्तानी हैंडलरों को धन भेजता था। यह मामला आतंकी वित्तपोषण में डिजिटल करेंसी के बढ़ते दुरुपयोग को उजागर करता है।

मुख्य बातें

यूपी एटीएस ने मोहम्मद जफर उर्फ मोहम्मद जहीर (उम्र 24 वर्ष , निवासी पूर्णिया, बिहार ) को 16 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर मदरसे की आड़ में चंदा जुटाकर बाइनेंस के ज़रिए यूएसडीटी के रूप में पाकिस्तानी हैंडलरों को धन भेजने का आरोप है।
आरोपी के मोबाइल से पाकिस्तानी जिहादी व्हाट्सऐप समूह और मसूद अजहर की भड़काऊ सामग्री मिली।
मामला बीएनएस धारा 152, 61(2) और यूएपीए-1967 की धारा 18/38 के तहत अपराध संख्या 13/2026 में दर्ज।
आरोपी ने पूछताछ में कथित तौर पर अपराध स्वीकार किए; पाकिस्तानी नेटवर्क की जांच जारी।

उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े 24 वर्षीय मोहम्मद जफर उर्फ मोहम्मद जहीर को 16 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया। बिहार के पूर्णिया जिले के ग्राम मीरगंज निवासी इस युवक पर आरोप है कि वह मदरसे की आड़ में चंदा जुटाकर क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए पाकिस्तानी आतंकी हैंडलरों को धन भेजता था।

मुख्य घटनाक्रम

एटीएस के अनुसार, आरोपी जफर ने मेरठ के एक मदरसे में पढ़ाई के दौरान जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा से प्रभावित होकर मसूद अजहर की कथित भड़काऊ और जिहादी सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू किया। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने फेसबुक पर चेहरा ढककर जिहाद और खिलाफत से जुड़े बयान दिए तथा लोगों को हिंसक जिहाद के लिए प्रेरित किया।

एटीएस को आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान के कई जिहादी व्हाट्सऐप समूह मिले, जिनमें जिहाद और चंदे से संबंधित बातचीत दर्ज थी। पूछताछ में जफर ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पाकिस्तानी हैंडलर से बाइनेंस खाते की मांग की और यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) के रूप में कई बार धनराशि भेजी।

फंडिंग का तरीका

जांच के अनुसार, आरोपी ने शुरुआत में पारंपरिक बैंकिंग माध्यम से पैसे भेजने का प्रयास किया, जो असफल रहा। इसके बाद उसने पाकिस्तानी संदिग्धों के संपर्क में आकर क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म बाइनेंस के ज़रिए यूएसडीटी के रूप में धन हस्तांतरित किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ आतंकी वित्तपोषण में क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग पर नज़र रख रही हैं।

कानूनी कार्रवाई

यूपी एटीएस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 13/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 और 61(2) तथा गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धाराओं 18 और 38 के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

गौरतलब है कि जैश-ए-मोहम्मद भारत में प्रतिबंधित संगठन है और इसके प्रमुख मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया हुआ है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब भारत-पाकिस्तान के बीच सीमापार आतंकवाद को लेकर तनाव का माहौल है। यूपी एटीएस ने हाल के महीनों में कई संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।

आगे की जांच

एटीएस सूत्रों के अनुसार, आरोपी के पाकिस्तानी हैंडलरों की पहचान और उनसे जुड़े नेटवर्क की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि क्रिप्टो ट्रांजेक्शन के डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की जा रही है, जिससे अन्य संदिग्धों तक पहुंचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बाइनेंस और यूएसडीटी जैसे क्रिप्टो माध्यमों का आतंकी वित्तपोषण में इस्तेमाल है — जो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और जटिल चुनौती है। मदरसे की आड़ में चंदा जुटाने का पैटर्न नया नहीं है, लेकिन डिजिटल करेंसी के ज़रिए सीमापार धन भेजने की यह विधि पकड़ में आना कठिन बनाती है। सवाल यह है कि क्या मौजूदा एंटी-मनी लॉन्डरिंग और क्रिप्टो निगरानी ढाँचा इस खतरे से निपटने के लिए पर्याप्त है। यह मामला नीति-निर्माताओं के लिए क्रिप्टो रेगुलेशन और आतंकी वित्तपोषण रोधी कानूनों को और सख्त करने का संकेत है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एटीएस ने मोहम्मद जफर को क्यों गिरफ्तार किया?
यूपी एटीएस ने मोहम्मद जफर को जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध, पाकिस्तानी हैंडलरों को क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए धन भेजने और सोशल मीडिया पर जिहादी सामग्री फैलाने के आरोप में 16 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया। उस पर मदरसे की आड़ में चंदा जुटाकर आतंकी संगठन को फंड करने का भी आरोप है।
मोहम्मद जफर ने पाकिस्तान पैसे कैसे भेजे?
एटीएस के अनुसार, आरोपी ने पहले पारंपरिक बैंकिंग से धन भेजने की कोशिश की जो असफल रही। इसके बाद उसने क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म बाइनेंस के ज़रिए यूएसडीटी के रूप में पाकिस्तानी संदिग्धों को कई बार धनराशि भेजी।
आरोपी के खिलाफ कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
मोहम्मद जफर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 और 61(2) तथा गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धाराओं 18 और 38 के तहत मुकदमा अपराध संख्या 13/2026 में दर्ज किया गया है।
जैश-ए-मोहम्मद क्या है और यह भारत के लिए क्यों खतरनाक है?
जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान स्थित एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, जिसके प्रमुख मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है। यह संगठन भारत में कई आतंकी हमलों से जुड़ा रहा है और भारत में इस पर पूर्ण प्रतिबंध है।
क्या इस गिरफ्तारी से किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा होगा?
एटीएस सूत्रों के अनुसार, आरोपी के पाकिस्तानी हैंडलरों और उनसे जुड़े नेटवर्क की जांच जारी है। क्रिप्टो ट्रांजेक्शन के डिजिटल ट्रेल की गहन जांच से अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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