यूपी एटीएस का बड़ा ऑपरेशन: आईएसआई और पाकिस्तानी गैंगस्टर्स के लिए काम कर रहे दो संदिग्ध आतंकी नोएडा से गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- यूपी एटीएस ने 23 अप्रैल 2025 को नोएडा से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया।
- गिरफ्तार आरोपी तुषार चौहान उर्फ हिज्बुल्ला अली खान (मेरठ) और समीर खान हैं, दोनों की उम्र 20 वर्ष है।
- आरोपियों के पास से एक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस, एक चाकू और दो मोबाइल फोन बरामद हुए।
- पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट ने इन्हें इंस्टाग्राम और एन्क्रिप्टेड चैनलों के जरिए रिक्रूट किया।
- तुषार को ₹50,000 अग्रिम और ₹2,50,000 देने का वादा कर ग्रेनेड हमले और हत्या के लिए तैयार किया गया था।
- एटीएस ने बीएनएस, आयुध अधिनियम और यूएपीए की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर पुलिस रिमांड की तैयारी शुरू की है।
यूपी एटीएस की बड़ी सफलता — नोएडा से दो संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार
लखनऊ, 23 अप्रैल: उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (यूपी एटीएस) ने गुरुवार को नोएडा से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर एक बड़े पाकिस्तान-समर्थित षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार चौहान उर्फ हिज्बुल्ला अली खान (उम्र 20, मेरठ निवासी) और समीर खान (उम्र 20) के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी गैंगस्टर्स के इशारे पर भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे।
बरामदगी और आरोप — क्या मिला एटीएस को?
गिरफ्तारी के दौरान दोनों आरोपियों के पास से एक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस, एक चाकू और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। एटीएस को पहले से खुफिया इनपुट मिल रहे थे कि आईएसआई के निर्देश पर कुछ कट्टरपंथी तत्व और गैंगस्टर भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए बहलाकर स्लीपर सेल तैयार करने में जुटे हैं।
जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय युवाओं को टारगेट कर रहे थे।
कैसे हुआ कट्टरपंथ की ओर झुकाव — तुषार चौहान का मामला
मेरठ निवासी तुषार चौहान इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया और धीरे-धीरे कट्टरपंथ की तरफ खिंचता चला गया। वॉइस और वीडियो कॉल के माध्यम से उसे नियमित निर्देश दिए जाते थे।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि तुषार को कुछ लोगों पर ग्रेनेड फेंकने और हत्या करने के निर्देश दिए गए थे। इसके एवज में उसे ₹50,000 अग्रिम और काम पूरा होने पर ₹2,50,000 देने का लालच दिया गया। इसके अलावा उसे पासपोर्ट बनवाकर दुबई के रास्ते पाकिस्तान ले जाने का भी वादा किया गया था।
समीर खान का नेटवर्क और 'टीटीएच' का एंगल
समीर खान भी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड चैनलों के जरिए इस आतंकी नेटवर्क से जुड़ा था। उसे 'टीटीएच' (तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान) दीवारों पर लिखने और अन्य युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ने का काम सौंपा गया था।
दोनों आरोपी संवेदनशील स्थानों की रेकी भी कर रहे थे और निर्देश मिलने पर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए तैयार बताए जाते हैं। कुछ लोगों को जान से मारने की धमकियां भी दी गई थीं, जिनमें पाकिस्तानी हैंडलर्स कॉन्फ्रेंस कॉल पर मौजूद रहते थे।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
एटीएस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ लखनऊ एटीएस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराएं 148, 152, 61(2), आयुध अधिनियम 1959 की धारा 3/4/25 और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम 1967 की धाराएं 13/18 के तहत मामला दर्ज किया है।
दोनों को संबंधित न्यायालय में पेश किया जा रहा है। एटीएस अब इनके पूरे नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की पहचान के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी में है।
गहरा संदर्भ — पाकिस्तान की 'हाइब्रिड वॉर' रणनीति
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब पहलगाम आतंकी हमले (अप्रैल 2025) के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव अपने चरम पर है। गौरतलब है कि यूपी एटीएस पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर चुकी है जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आईएसआई की यह 'हाइब्रिड वॉर' रणनीति पारंपरिक आतंकवाद से कहीं अधिक खतरनाक है क्योंकि इसमें भारतीय नागरिकों को ही हथियार बनाया जाता है। इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल इस नेटवर्क को पकड़ना और कठिन बना देता है।
आने वाले दिनों में एटीएस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों तक भी फैला है या नहीं और इसके तार किन-किन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े हैं।