15 सितंबर 2026
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ब्रिक्स में मोदी-शी बैठक: भारत-चीन आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता से चलें — MEA

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ब्रिक्स में मोदी-शी बैठक: भारत-चीन आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता से चलें — MEA

सारांश

नई दिल्ली में ब्रिक्स के मंच पर मोदी और शी की मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी — यह गलवान के बाद की कूटनीतिक पुनर्बहाली की अगली कड़ी थी। तीन आपसी सिद्धांत, सीमा शांति की शर्त और व्यापार असंतुलन पर खुली बात — यह बैठक भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक की।
मोदी ने आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के तीन सिद्धांतों पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने कहा कि 'मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए' और संबंधों को रणनीतिक व दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना होगा।
पीएम मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद बताया।
संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
बैठक में विदेश मंत्री डॉ.
जयशंकर और NSA अजीत डोभाल भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि भारत और चीन को तीन मूल सिद्धांतों — आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता — के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार, 15 सितंबर को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस बैठक का विस्तृत ब्यौरा दिया।

बैठक में क्या हुआ

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पीएम मोदी ने बैठक के दौरान भारतीय चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा और दोनों पक्षों से एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का आग्रह किया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि 'मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए' और दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर प्रगति का स्वागत किया।

सीमा और सुरक्षा पर भारत का रुख

पीएम मोदी ने बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए अनिवार्य आधार बनी रहनी चाहिए। उन्होंने दोनों पक्षों से सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई — और यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों एवं समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पर आधारित है।

चीनी बयान पर भारत की प्रतिक्रिया

जब प्रवक्ता जायसवाल से चीनी पक्ष के उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें ताइवान और तिब्बत पर भारत की नीति का उल्लेख था और यह दावा किया गया था कि भारत ने अपनी धरती पर किसी भी ताकत को चीन-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति न देने की बात कही, तो जायसवाल ने कहा कि बैठक में कई मुद्दे सामने आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीएम मोदी ने भारतीय चिंताओं का उल्लेख किया और तीन आपसी सिद्धांतों पर जोर दिया।

आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने तथा सार्थक और पूर्वानुमानित बाजार पहुँच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

लोगों के बीच संपर्क के मोर्चे पर, दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संबंधों और दोनों देशों के नागरिकों की अधिक आवाजाही को प्रोत्साहन देने पर सहमति जताई।

बैठक में कौन थे मौजूद

इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब गलवान घटना (2020) के बाद से भारत-चीन संबंधों में आई कड़वाहट को धीरे-धीरे सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं। दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार का विस्तार जारी रखने पर भी सहमत हुए। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संवाद की गति और तेज होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि चीन इन्हें व्यवहार में कितना मानता है — खासकर तब, जब उसने ताइवान और तिब्बत पर भारत से सार्वजनिक 'आश्वासन' माँगा। गलवान के बाद से भारत ने कूटनीतिक पुनर्बहाली की राह पकड़ी है, लेकिन व्यापार असंतुलन, वीज़ा अड़चनें और सीमा पर ढाँचागत निर्माण जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। 'मतभेद विवाद नहीं बनें' — यह वाक्यांश दोनों पक्षों ने पहले भी कहा है; वास्तविक परीक्षण यह होगा कि क्या अगले दौर की वार्ता ठोस सीमा-समझौते और बाजार पहुँच में तब्दील होती है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स में मोदी और शी जिनपिंग की बैठक कब और कहाँ हुई?
यह द्विपक्षीय बैठक 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। इसमें भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और NSA अजीत डोभाल भी शामिल थे।
PM मोदी ने बैठक में क्या संदेश दिया?
PM मोदी ने तीन आपसी सिद्धांतों — आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता — पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के लिए अनिवार्य आधार है।
चीनी पक्ष के ताइवान-तिब्बत वाले बयान पर भारत ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बैठक में कई मुद्दे सामने आए और पीएम मोदी ने भारतीय चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने तीन आपसी सिद्धांतों पर जोर दिया और दोनों पक्षों से एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का आग्रह किया।
भारत-चीन के बीच व्यापार के मुद्दे पर क्या सहमति बनी?
दोनों नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला मुद्दों पर एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत स्वीकार की। सार्थक और पूर्वानुमानित बाजार पहुँच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
मोदी-शी की पिछली मुलाकात कब हुई थी?
इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई थी। नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स बैठक में दोनों नेताओं ने तियानजिन के बाद से भारत-चीन संबंधों में हुई स्थिर प्रगति का स्वागत किया।
राष्ट्र प्रेस
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