ब्रिक्स में मोदी-शी बैठक: भारत-चीन आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता से चलें — MEA
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि भारत और चीन को तीन मूल सिद्धांतों — आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता — के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार, 15 सितंबर को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस बैठक का विस्तृत ब्यौरा दिया।
बैठक में क्या हुआ
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पीएम मोदी ने बैठक के दौरान भारतीय चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा और दोनों पक्षों से एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का आग्रह किया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि 'मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए' और दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर प्रगति का स्वागत किया।
सीमा और सुरक्षा पर भारत का रुख
पीएम मोदी ने बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए अनिवार्य आधार बनी रहनी चाहिए। उन्होंने दोनों पक्षों से सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई — और यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों एवं समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पर आधारित है।
चीनी बयान पर भारत की प्रतिक्रिया
जब प्रवक्ता जायसवाल से चीनी पक्ष के उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें ताइवान और तिब्बत पर भारत की नीति का उल्लेख था और यह दावा किया गया था कि भारत ने अपनी धरती पर किसी भी ताकत को चीन-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति न देने की बात कही, तो जायसवाल ने कहा कि बैठक में कई मुद्दे सामने आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीएम मोदी ने भारतीय चिंताओं का उल्लेख किया और तीन आपसी सिद्धांतों पर जोर दिया।
आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने तथा सार्थक और पूर्वानुमानित बाजार पहुँच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
लोगों के बीच संपर्क के मोर्चे पर, दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संबंधों और दोनों देशों के नागरिकों की अधिक आवाजाही को प्रोत्साहन देने पर सहमति जताई।
बैठक में कौन थे मौजूद
इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब गलवान घटना (2020) के बाद से भारत-चीन संबंधों में आई कड़वाहट को धीरे-धीरे सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं। दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार का विस्तार जारी रखने पर भी सहमत हुए। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संवाद की गति और तेज होने की उम्मीद है।