15 सितंबर 2026
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अहमदाबाद पुलिस स्टेशन में यूपी के प्रवासी मजदूर राजू जाटव की संदिग्ध मौत, घर लौटने की थी तलाश

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अहमदाबाद पुलिस स्टेशन में यूपी के प्रवासी मजदूर राजू जाटव की संदिग्ध मौत, घर लौटने की थी तलाश

सारांश

घर लौटने के लिए पैसे का इंतजार कर रहा एक प्रवासी मजदूर अहमदाबाद के पुलिस स्टेशन में मृत पाया गया। राजू जाटव की कहानी बेरोजगारी, अकेलेपन और प्रवासी संकट का दर्दनाक चेहरा है — जहाँ मदद की दरकार थी, वहीं आखिरी साँस ली।

मुख्य बातें

राजू जाटव (39 वर्ष), लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश के प्रवासी मजदूर, का शव 15 सितंबर 2026 की सुबह शहरकोटडा पुलिस स्टेशन, अहमदाबाद के इलेक्ट्रिक रूम में पंखे से लटका मिला।
जाटव रात करीब 3:48 बजे पुलिस से संपर्क कर घर लौटने में मदद माँग रहा था; उसे नौकरी से निकाला जा चुका था।
परिवार ने सुबह पैसे भेजने का भरोसा दिलाया था, लेकिन सुबह 8:30 बजे उसका शव मिला।
डीसीपी रूपल सोलंकी ने कहा कि जाटव पुलिस हिरासत में नहीं था, वह स्वेच्छा से रुका था।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 194 के तहत आकस्मिक मौत का मामला दर्ज; फोरेंसिक पोस्टमार्टम पूर्ण।
जाटव के भाई के दिल्ली से आने के बाद जाँच में और जानकारी मिलने की उम्मीद।

अहमदाबाद के शहरकोटडा पुलिस स्टेशन में मंगलवार, 15 सितंबर 2026 की सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले 39 वर्षीय प्रवासी मजदूर राजू जाटव का शव स्टेशन के इलेक्ट्रिक रूम में पंखे से लटका मिला। जाटव को महज कुछ घंटे पहले ही अपने घर लौटने में मदद मांगने के बाद वहाँ रुकने दिया गया था।

घटनाक्रम: रात से सुबह तक

सोमवार की रात करीब 3:48 बजे राजू जाटव ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर मदद माँगी थी। सूचना मिलते ही पीसीआर-35 वैन को असरवा रेलवे स्टेशन भेजा गया, जहाँ जाटव मिला। अधिकारियों के अनुसार, उसने बताया कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया है, हालांकि वह इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बता सका।

पूछताछ में जाटव ने बताया कि वह जामनगर के मोती खावड़ी में मजदूर के तौर पर काम करता था और उत्तर प्रदेश में अपने घर लौटने की कोशिश में असरवा रेलवे स्टेशन तक पहुँचा था। पुलिस ने उसे मोबाइल फोन पर अपने रिश्तेदार से बात करने का मौका दिया, जिन्होंने सुबह होते ही पैसे भेजने का आश्वासन दिया।

रात पुलिस स्टेशन में बिताई, सुबह मिला शव

बारिश हो रही थी और रात में रहने की कोई व्यवस्था न होने के कारण जाटव ने पुलिस से अनुरोध किया कि उसे सुबह की ट्रेन पकड़ने तक वहीं रहने दिया जाए। पुलिस ने उसे वेटिंग एरिया में बैठाया। पुलिस के अनुसार, उसने अपनी परेशानी का कोई ठोस कारण नहीं बताया और कहा कि वह उस वक्त कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाना चाहता।

मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे जब शिफ्ट बदल रही थी, तब इलेक्ट्रिक रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद मिला। बार-बार दस्तक देने और आवाज़ लगाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। खिड़की से झाँकने पर जाटव को पंखे से लटका हुआ पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, उसने अपनी पैंट का इस्तेमाल कर खुद को फाँसी लगाई थी।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच

डीसीपी (जोन-3) रूपल सोलंकी ने स्पष्ट किया कि जाटव पुलिस हिरासत में नहीं था और उसे किसी अपराध के सिलसिले में नहीं रोका गया था। उन्होंने कहा, 'वह थोड़ा परेशान था। हम उसे पुलिस स्टेशन इसलिए लाए क्योंकि वह किसी बात पर प्रतिक्रिया देना चाहता था, उसे कोई समस्या थी।'

पुलिस ने शहरकोटडा पुलिस स्टेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 194 के तहत आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में जाँच पंचनामा किया गया और डॉक्टरों की एक टीम ने वीडियोग्राफी के साथ फोरेंसिक पोस्टमार्टम किया।

जाँच जारी, परिजन के आने का इंतजार

पुलिस अभी तक जाटव की परेशानी की असल वजह नहीं जान पाई है। उसके भाई के दिल्ली से अहमदाबाद पहुँचने की उम्मीद है, जिसके बाद जाँचकर्ताओं को उसकी परिस्थितियों के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना है। पुलिस ने यह भी स्वीकार किया कि जामनगर में जाटव की कार्यप्रकृति अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

यह घटना उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाती है जिसमें प्रवासी मजदूर अक्सर आर्थिक संकट, सामाजिक अलगाव और मानसिक दबाव का शिकार होते हैं — और समय पर सहायता न मिलने पर त्रासद परिणाम सामने आते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बचाया नहीं जा सका। सवाल यह नहीं है कि वह हिरासत में था या नहीं; सवाल यह है कि रात भर तनाव में दिखने वाले एक अकेले प्रवासी मजदूर की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी। प्रवासी श्रमिकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता या संकट प्रबंधन का कोई स्पष्ट ढाँचा न होना इस त्रासदी की असली जड़ है — और यह कोई पहली घटना नहीं है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद पुलिस स्टेशन में किसकी मौत हुई और वे कौन थे?
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के 39 वर्षीय प्रवासी मजदूर राजू जाटव की मौत हुई। वे जामनगर में मजदूर के तौर पर काम करते थे और घर लौटने की कोशिश में अहमदाबाद पहुँचे थे।
राजू जाटव पुलिस स्टेशन कैसे पहुँचे थे?
जाटव ने सोमवार रात करीब 3:48 बजे पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर मदद माँगी थी। पीसीआर वैन उन्हें असरवा रेलवे स्टेशन से लेकर शहरकोटडा पुलिस स्टेशन आई थी। वे स्वेच्छा से वहाँ रुके थे और पुलिस हिरासत में नहीं थे।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 194 के तहत आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पंचनामा किया गया और वीडियोग्राफी के साथ फोरेंसिक पोस्टमार्टम भी पूरा किया गया।
क्या जाटव की मौत का कारण पता चल सका है?
अभी तक जाटव की परेशानी का सटीक कारण सामने नहीं आया है। पुलिस को उम्मीद है कि उनके भाई के दिल्ली से आने के बाद जाँच में और स्पष्टता आएगी। यह भी पता नहीं चल पाया है कि वे जामनगर में वास्तव में किस प्रकार का काम करते थे।
इस घटना में प्रवासी मजदूरों की समस्या क्या उजागर होती है?
यह मामला प्रवासी मजदूरों के आर्थिक असुरक्षा, अकेलेपन और मानसिक दबाव की गंभीर समस्या को रेखांकित करता है। जाटव को नौकरी से निकाला गया था और घर जाने के लिए पैसे नहीं थे — ऐसी स्थिति में समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी त्रासद परिणाम दे सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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