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अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: मृतकों की संख्या 10 हुई, 95% जले गोविंद डामोर की मौत

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अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: मृतकों की संख्या 10 हुई, 95% जले गोविंद डामोर की मौत

सारांश

अहमदाबाद के रामोल में कथित अवैध पटाखा इकाई में हुआ विस्फोट अब 10 जिंदगियाँ लील चुका है। 95% जले मजदूर गोविंद डामोर की मौत ने इस त्रासदी को और गहरा कर दिया। फैक्ट्री मालिकों की गिरफ्तारी हो चुकी है, SIT जाँच में यह सवाल केंद्र में है — लाइसेंस खत्म होने के बाद भी यह इकाई कैसे चलती रही?

मुख्य बातें

अहमदाबाद के रामोल स्थित कथित अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
गोविंद डामोर (मूल निवासी: दाहोद जिला ) की 20 जुलाई को रात 2:15 बजे मौत हुई; शरीर का 95% से अधिक हिस्सा जला था।
सिविल अस्पताल में भर्ती 5 मरीजों में से एक महिला ( 75% जली ) आईसीयू में, दो अन्य बर्न वार्ड में; स्किन बैंक से ग्राफ्टिंग जारी।
फैक्ट्री संचालक रमीला डोडिया , पुत्र मेहुल डोडिया और साझेदार सादिक सैयद गिरफ्तार; भारतीय न्याय संहिता व विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज।
घटना की जाँच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित; अहमदाबाद में अन्य अवैध पटाखा इकाइयों की भी जाँच शुरू।

अहमदाबाद के रामोल इलाके में कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। सोमवार, 20 जुलाई को तड़के सिविल अस्पताल, अहमदाबाद में भर्ती एक गंभीर रूप से घायल मजदूर की उपचार के दौरान मौत हो गई, जिससे इस त्रासदी का दायरा और गहरा हो गया।

मृतक की पहचान और मौत का कारण

अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि मृतक की पहचान गोविंद डामोर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से दाहोद जिले के निवासी थे। उनके शरीर का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जल चुका था और रात 2 बजकर 15 मिनट पर उनकी मृत्यु हो गई। गौरतलब है कि इस हादसे में घायल हुए अधिकांश मजदूर दाहोद जिले से ही थे, जो रोज़गार की तलाश में अहमदाबाद आए थे।

अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति

डॉ. जोशी ने बताया कि विस्फोट के बाद पाँच मरीज — एक महिला और चार पुरुष — सिविल अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। इनमें से एक महिला के शरीर का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जला हुआ है और उनका आईसीयू में इलाज जारी है। शेष तीन मरीज बर्न वार्ड में भर्ती हैं — एक के शरीर का 40 प्रतिशत और दूसरे का 20 प्रतिशत हिस्सा जला है। अस्पताल के स्किन बैंक की सहायता से 40 प्रतिशत जले मरीज के प्रभावित हिस्से के लगभग 28 प्रतिशत पर दान की गई त्वचा लगाई गई है, जबकि 20 प्रतिशत जले मरीज के लगभग 15 प्रतिशत प्रभावित हिस्से पर स्किन ग्राफ्ट किया गया है। पाँचवाँ मरीज पूरी तरह स्थिर बताया गया है।

विस्फोट कैसे हुआ

यह धमाका शनिवार दोपहर रामोल-गात्राड रोड स्थित 'न्यू गुजरात फायर वर्क्स' इकाई में हुआ। जाँचकर्ताओं का आरोप है कि इस इकाई का लाइसेंस समाप्त हो चुका था, फिर भी यहाँ अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। विस्फोट के बाद लगी भीषण आग ने पूरी इकाई को तबाह कर दिया और कई मजदूर अंदर फँस गए। रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों, दमकलकर्मियों और पुलिस ने समन्वित बचाव अभियान चलाकर आग पर काबू पाया।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने फैक्ट्री संचालक रमीला डोडिया, उनके पुत्र मेहुल डोडिया और कथित साझेदार सादिक सैयद के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना की विस्तृत जाँच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है।

व्यापक जाँच और आगे की कार्रवाई

अधिकारी अब सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन, विस्फोटक सामग्री के स्रोत और अहमदाबाद व उसके आसपास संचालित अन्य अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों की भी जाँच कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा निगरानी और अवैध इकाइयों पर नियंत्रण की कमज़ोरियों को उजागर करता है। SIT की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इतने लंबे समय तक यह इकाई बिना लाइसेंस के कैसे चलती रही।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी 'न्यू गुजरात फायर वर्क्स' को किसने और क्यों नज़रअंदाज़ किया। मृतकों में अधिकांश दाहोद जैसे आदिवासी बहुल जिलों के प्रवासी मजदूर हैं — जो सबसे कम वेतन पर सबसे अधिक जोखिम उठाते हैं। SIT की जाँच यदि केवल फैक्ट्री मालिकों तक सीमित रही और नियामकीय चूक की जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह त्रासदी भी पिछले हादसों की तरह महज़ एक फाइल बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
रामोल स्थित कथित अवैध पटाखा इकाई में हुए विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। 20 जुलाई को तड़के सिविल अस्पताल में गोविंद डामोर की मौत के बाद यह आँकड़ा 10 पहुँचा।
गोविंद डामोर कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
गोविंद डामोर दाहोद जिले के मूल निवासी थे जो रामोल की पटाखा फैक्ट्री में काम करते थे। विस्फोट में उनके शरीर का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जल गया था, और 20 जुलाई को रात 2 बजकर 15 मिनट पर सिविल अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने फैक्ट्री संचालक रमीला डोडिया, उनके पुत्र मेहुल डोडिया और कथित साझेदार सादिक सैयद को गिरफ्तार किया है। तीनों पर भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज है।
अस्पताल में भर्ती घायलों की स्थिति क्या है?
सिविल अस्पताल में भर्ती पाँच मरीजों में से एक महिला (75% से अधिक जली) आईसीयू में हैं। दो अन्य मरीज बर्न वार्ड में हैं — एक 40 प्रतिशत और दूसरा 20 प्रतिशत जला है — और दोनों पर स्किन बैंक से ग्राफ्टिंग की जा रही है। पाँचवाँ मरीज स्थिर बताया गया है।
SIT की जाँच में क्या देखा जा रहा है?
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन, विस्फोटक सामग्री के स्रोत और अहमदाबाद व आसपास चल रही अन्य अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों की जाँच कर रही है। जाँचकर्ताओं का ध्यान इस बात पर भी है कि लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद यह इकाई कैसे संचालित होती रही।
राष्ट्र प्रेस
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