अहमदाबाद पटाखा कारखाना विस्फोट: 9 मौतों की जांच के लिए एसआईटी गठित, 10 दिन में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के रामोल इलाके में न्यू गुजरात फायर वर्क्स कारखाने में हुए भीषण विस्फोट की गहन जांच के लिए अहमदाबाद शहर पुलिस ने 19 जुलाई 2026 को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस हादसे में 9 श्रमिकों की मौत हो गई और 6 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। जांचकर्ताओं के अनुसार, कारखाना कथित तौर पर लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बावजूद अवैध रूप से संचालित हो रहा था।
विस्फोट का घटनाक्रम
शनिवार, 19 जुलाई को दोपहर करीब 3:45 बजे वस्त्राल के रामोल-गतराड रोड पर सर्वे नंबर 629/1/2/3 स्थित इकाई में अचानक विस्फोट हुआ। यह कारखाना रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) शिविर के पीछे नहर के निकट स्थित था। विस्फोट के तुरंत बाद भीषण आग भड़क उठी, जिसने पूरी फैक्ट्री को जलाकर राख कर दिया।
एसआईटी की संरचना और अधिकार
पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एसआईटी संयुक्त पुलिस आयुक्त (सेक्टर-2) जयपाल सिंह राठौर के पर्यवेक्षण में कार्य करेगी। दल में पुलिस उपायुक्त (जोन-8) मयूर पाटिल, सहायक पुलिस आयुक्त (दक्षिण प्रभाग) वाईए गोहिल और रामोल पुलिस निरीक्षक वीडी मोरी शामिल हैं। जेसीपी (सेक्टर-2) को 10 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
जांच का दायरा और पारदर्शिता
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, तटस्थ और पारदर्शी ढंग से की जाएगी। घटनास्थल से सभी भौतिक, वैज्ञानिक, दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य उनकी संरक्षा श्रृंखला बनाए रखते हुए एकत्र किए जाएंगे। जांच में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल), विस्फोटक विशेषज्ञ, विद्युत विशेषज्ञ, अग्निशमन विभाग, श्रम विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों का सहयोग लिया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई और आरोप
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 287, 288 और 61(2) के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 5(ए) और 6 तथा विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9(बी) के तहत मामला दर्ज किया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि लाइसेंस की अवधि समाप्त होने और नवीनीकरण न होने के बावजूद यह कारखाना कथित तौर पर अवैध रूप से चल रहा था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अवैध पटाखा इकाइयों पर सवाल उठते रहे हैं।
आगे की कार्यवाही
एसआईटी को जांच पूरी होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मुकदमे के दौरान दल लोक अभियोजक के साथ समन्वय स्थापित करेगा ताकि सभी साक्ष्य, गवाह और दस्तावेज बिना किसी देरी के प्रस्तुत किए जा सकें। इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सभी की नज़र रहेगी।