अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: 9 मौतों के मुख्य आरोपी मेहुल डोडिया गिरफ्तार, 2014 में भी हो चुका था हादसा
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के रामोल इलाके में स्थित एक कथित अवैध पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट के मामले में पुलिस ने रविवार, 19 जुलाई को मुख्य आरोपी मेहुल डोडिया को गिरफ्तार कर लिया। इस धमाके में तीन बच्चों सहित नौ लोगों की मौत हो गई थी और छह अन्य घायल हो गए थे। अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि क्राइम ब्रांच ने मेहुल को साबरमती इलाके से पकड़ा, जहाँ वह विस्फोट में घायल होने के बावजूद मौके से फरार हो गया था।
गिरफ्तारी और आरोपियों का ब्यौरा
पुलिस ने मेहुल डोडिया के साथ उसकी माँ रमीला डोडिया — जो कथित तौर पर फैक्ट्री संचालित करती थीं — और उनके कथित साझेदार सादिक सैयद को भी गिरफ्तार किया है। विस्फोट में रमीला के कान का पर्दा फट गया था। पुलिस कमिश्नर गहलोत ने बताया, "मेहुल धमाके के समय फैक्ट्री में मौजूद था, वह भी घायल हो गया और घटना के बाद मौके से भाग गया।"
तीनों आरोपियों के विरुद्ध रामोल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105, 287, 288 और 61(2) के साथ-साथ एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 की धारा 5(ए) और 6, तथा एक्सप्लोसिव एक्ट, 1884 की धारा 9(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
लाइसेंस उल्लंघन और विस्फोट की परिस्थितियाँ
जाँच में सामने आया कि फैक्ट्री का लाइसेंस 4 मार्च को समाप्त हो चुका था और उसे नवीनीकृत नहीं किया गया था। इसके बावजूद, धमाके से करीब 20 से 25 दिन पहले गणेश उत्सव के ऑर्डर पूरे करने के लिए फैक्ट्री फिर से चालू कर दी गई। काम के लिए मजदूरों को दाहोद जिले से अहमदाबाद लाया गया था।
गहलोत ने बताया, "अगर लाइसेंस दिया भी गया होता तो केवल 15 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री संग्रहीत की जानी चाहिए थी, लेकिन कई बोरियों में इससे कहीं अधिक विस्फोटक पाया गया। फैक्ट्री को चलाने की कोई अनुमति नहीं थी, फिर भी वह चल रही थी।" फोरेंसिक विशेषज्ञों और विस्फोटक विशेषज्ञों ने साइट से सबूत एकत्र किए हैं।
2014 में भी हो चुका था इसी जगह हादसा
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2014 में भी इसी स्थान पर एक बड़ा विस्फोट हुआ था, जिसमें एक 14 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद रमीला डोडिया का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि रमीला ने बाद में अपने बेटे मेहुल के नाम पर नया लाइसेंस हासिल किया और फैक्ट्री फिर से शुरू कर दी। यह ऐसे समय में आया है जब अवैध पटाखा इकाइयों पर नियंत्रण को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जाँच का दायरा और आगे की कार्रवाई
पुलिस अब जमीन के मालिक, फाइनेंसर और पटाखों के ऑर्डर देने वालों की भूमिका की भी जाँच कर रही है। गहलोत ने बताया कि कुछ लोगों ने ₹50,000 अग्रिम दिए थे, जबकि कुछ ने करीब ₹1 लाख दिए थे। जाँचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या ग्राहकों को इकाई के गैर-कानूनी संचालन की जानकारी थी।
गौरतलब है कि सादिक सैयद से जुड़ी एक अन्य पटाखा निर्माण इकाई में हाल ही में खेड़ा जिले में भी विस्फोट हुआ था, हालाँकि वहाँ किसी की मौत की खबर नहीं है। घटना के बाद शनिवार रात ग्यासपुर और नारोल में दो पटाखा इकाइयाँ सील कर दी गईं। अहमदाबाद पुलिस, अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और फायर डिपार्टमेंट की संयुक्त टीमें शहर के बाहरी इलाकों में निरीक्षण जारी रखे हुए हैं।
पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया, "हम सारे सबूत एकत्र करेंगे, जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि आरोपी इस बार बच न पाएं और मामला शीघ्र ट्रायल के लिए जाए।"