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अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: रिमांड खत्म होते ही तीनों आरोपी साबरमती जेल भेजे गए

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अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: रिमांड खत्म होते ही तीनों आरोपी साबरमती जेल भेजे गए

सारांश

अहमदाबाद के रामोल में 18 जुलाई को हुए पटाखा फैक्ट्री विस्फोट — जिसमें 10 लोगों की जान गई — के तीनों आरोपी सात दिन की एसआईटी पूछताछ के बाद अब साबरमती केंद्रीय जेल में हैं। लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद उत्पादन जारी रखने का आरोप इस मामले को और गंभीर बनाता है।

मुख्य बातें

रमीला डोडिया , मेहुल डोडिया और सादिक सैयद को 27 जुलाई को साबरमती केंद्रीय जेल भेजा गया।
7 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद एसआईटी ने रिमांड विस्तार का अनुरोध नहीं किया।
विस्फोट 18 जुलाई को रामोल-गतराड रोड पर हुआ था, जिसमें 10 लोगों की मौत और 5 घायल हुए।
पुलिस के अनुसार कारखाने का लाइसेंस मार्च में समाप्त हो चुका था और विस्फोट से 20-25 दिन पहले अवैध उत्पादन फिर शुरू हुआ था।
तीन सदस्यीय एसआईटी विस्फोटक कानूनों के उल्लंघन और नियामक चूक की जांच कर रही है।

अहमदाबाद के रामोल इलाके में कथित तौर पर अवैध पटाखा निर्माण इकाई में हुए घातक विस्फोट मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद सोमवार, 27 जुलाई को साबरमती केंद्रीय जेल भेज दिया गया। महानगर न्यायालय में पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने रिमांड बढ़ाने का कोई अनुरोध नहीं किया, जिसके बाद अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में सौंप दिया।

कौन हैं आरोपी

न्यायालय में पेश किए गए तीन आरोपियों में रमीला डोडिया, उनके पुत्र मेहुल डोडिया और कारोबारी साझेदार सादिक सैयद शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, यह पटाखा इकाई रामोल-गतराड रोड पर स्थित थी और कथित तौर पर वैध अनुमति के बिना संचालित हो रही थी।

एसआईटी की पूछताछ में क्या निकला

सात दिवसीय रिमांड के दौरान विशेष जांच समिति (एसआईटी) ने आरोपियों से इकाई के कथित अवैध संचालन, विस्फोटक सामग्री की खरीद एवं भंडारण, वित्तीय लेनदेन और श्रमिकों के वेतन से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत पूछताछ की। जांचकर्ताओं ने विस्फोटक सामग्री के स्रोत का पता लगाने, श्रम व स्टॉक रजिस्टर बरामद करने, विस्फोट से पहले की घटनाओं का क्रमबद्ध पुनर्निर्माण करने और प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने का प्रयास किया। एसआईटी में तीन सदस्य हैं और यह विस्फोटक कानूनों के संभावित उल्लंघन तथा नियामक चूक की भी जांच कर रही है।

18 जुलाई का विस्फोट: मुख्य घटनाक्रम

यह मामला 18 जुलाई को रामोल-गतराड रोड स्थित पटाखा कारखाने में हुए विस्फोट और उसके बाद लगी आग से जुड़ा है। विस्फोट दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई और 5 अन्य घायल हुए। मृतकों व घायलों में दिहाड़ी मजदूर शामिल थे; गंभीर रूप से झुलसे लोगों को अहमदाबाद सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

लाइसेंस और कानूनी उल्लंघन

पुलिस का आरोप है कि कारखाने का लाइसेंस मार्च में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद आरोपियों ने बंद करने के आदेशों की अनदेखी करते हुए विस्फोट से लगभग 20 से 25 दिन पहले उत्पादन फिर से शुरू कर दिया था। अहमदाबाद पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत के अनुसार, उस दौरान पुलिसकर्मी वार्षिक रथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्त थे। कथित तौर पर आगामी गणेश उत्सव के ऑर्डर पूरे करने के लिए पटाखों का उत्पादन किया जा रहा था।

आगे क्या होगा

तीनों आरोपी अब न्यायिक हिरासत में साबरमती केंद्रीय जेल में हैं। एसआईटी की जांच जारी है और विस्फोटक कानूनों के उल्लंघन तथा नियामक विफलता के पहलुओं पर आगे की कार्रवाई अपेक्षित है। इस मामले ने औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध निर्माण इकाइयों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नियामक तंत्र की व्यापक विफलता का प्रतीक है। लाइसेंस मार्च में समाप्त हो चुका था, बंद करने के आदेश दिए जा चुके थे — फिर भी इकाई चलती रही और 10 जिंदगियाँ चली गईं। सवाल यह है कि स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग ने इस दौरान क्या किया। रथ यात्रा की सुरक्षा में पुलिस की व्यस्तता को कारण बताना निगरानी की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना है। एसआईटी की जांच तभी सार्थक होगी जब केवल फैक्ट्री मालिकों तक सीमित न रहे, बल्कि उन अधिकारियों तक भी पहुँचे जिनकी नाकामी ने इस हादसे की ज़मीन तैयार की।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में कितने लोगों की मौत हुई?
18 जुलाई को रामोल-गतराड रोड स्थित पटाखा कारखाने में हुए विस्फोट में 10 लोगों की मौत हो गई और 5 अन्य घायल हुए। घायलों को अहमदाबाद सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
तीनों आरोपियों को जेल क्यों भेजा गया?
सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद एसआईटी ने महानगर न्यायालय को सूचित किया कि पूछताछ पूरी हो चुकी है और रिमांड विस्तार की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद अदालत ने तीनों — रमीला डोडिया, मेहुल डोडिया और सादिक सैयद — को न्यायिक हिरासत में साबरमती केंद्रीय जेल भेज दिया।
एसआईटी ने रिमांड के दौरान किन विषयों पर पूछताछ की?
एसआईटी ने पटाखा इकाई के कथित अवैध संचालन, विस्फोटक सामग्री की खरीद व भंडारण, वित्तीय लेनदेन, श्रमिकों के वेतन और विस्फोट से पहले की घटनाओं के क्रम के बारे में पूछताछ की। साथ ही विस्फोटक सामग्री के स्रोत और प्रत्येक आरोपी की जिम्मेदारी निर्धारित करने का प्रयास किया गया।
क्या यह फैक्ट्री कानूनी रूप से संचालित हो रही थी?
पुलिस के अनुसार, कारखाने का लाइसेंस मार्च में ही समाप्त हो चुका था और बंद करने के आदेश भी दिए गए थे। इसके बावजूद आरोपियों ने कथित तौर पर विस्फोट से 20 से 25 दिन पहले उत्पादन दोबारा शुरू कर दिया था।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रही है। एसआईटी विस्फोटक कानूनों के संभावित उल्लंघन, नियामक चूक और इकाई के अवैध संचालन की व्यापक जांच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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