अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: रिमांड खत्म होते ही तीनों आरोपी साबरमती जेल भेजे गए
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के रामोल इलाके में कथित तौर पर अवैध पटाखा निर्माण इकाई में हुए घातक विस्फोट मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद सोमवार, 27 जुलाई को साबरमती केंद्रीय जेल भेज दिया गया। महानगर न्यायालय में पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने रिमांड बढ़ाने का कोई अनुरोध नहीं किया, जिसके बाद अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में सौंप दिया।
कौन हैं आरोपी
न्यायालय में पेश किए गए तीन आरोपियों में रमीला डोडिया, उनके पुत्र मेहुल डोडिया और कारोबारी साझेदार सादिक सैयद शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, यह पटाखा इकाई रामोल-गतराड रोड पर स्थित थी और कथित तौर पर वैध अनुमति के बिना संचालित हो रही थी।
एसआईटी की पूछताछ में क्या निकला
सात दिवसीय रिमांड के दौरान विशेष जांच समिति (एसआईटी) ने आरोपियों से इकाई के कथित अवैध संचालन, विस्फोटक सामग्री की खरीद एवं भंडारण, वित्तीय लेनदेन और श्रमिकों के वेतन से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत पूछताछ की। जांचकर्ताओं ने विस्फोटक सामग्री के स्रोत का पता लगाने, श्रम व स्टॉक रजिस्टर बरामद करने, विस्फोट से पहले की घटनाओं का क्रमबद्ध पुनर्निर्माण करने और प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने का प्रयास किया। एसआईटी में तीन सदस्य हैं और यह विस्फोटक कानूनों के संभावित उल्लंघन तथा नियामक चूक की भी जांच कर रही है।
18 जुलाई का विस्फोट: मुख्य घटनाक्रम
यह मामला 18 जुलाई को रामोल-गतराड रोड स्थित पटाखा कारखाने में हुए विस्फोट और उसके बाद लगी आग से जुड़ा है। विस्फोट दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई और 5 अन्य घायल हुए। मृतकों व घायलों में दिहाड़ी मजदूर शामिल थे; गंभीर रूप से झुलसे लोगों को अहमदाबाद सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
लाइसेंस और कानूनी उल्लंघन
पुलिस का आरोप है कि कारखाने का लाइसेंस मार्च में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद आरोपियों ने बंद करने के आदेशों की अनदेखी करते हुए विस्फोट से लगभग 20 से 25 दिन पहले उत्पादन फिर से शुरू कर दिया था। अहमदाबाद पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत के अनुसार, उस दौरान पुलिसकर्मी वार्षिक रथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्त थे। कथित तौर पर आगामी गणेश उत्सव के ऑर्डर पूरे करने के लिए पटाखों का उत्पादन किया जा रहा था।
आगे क्या होगा
तीनों आरोपी अब न्यायिक हिरासत में साबरमती केंद्रीय जेल में हैं। एसआईटी की जांच जारी है और विस्फोटक कानूनों के उल्लंघन तथा नियामक विफलता के पहलुओं पर आगे की कार्रवाई अपेक्षित है। इस मामले ने औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध निर्माण इकाइयों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।