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कौशाम्बी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: तीन फरार आरोपियों पर ₹25-25 हजार का इनाम, 11 की मौत के बाद पुलिस ने कसा शिकंजा

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कौशाम्बी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: तीन फरार आरोपियों पर ₹25-25 हजार का इनाम, 11 की मौत के बाद पुलिस ने कसा शिकंजा

सारांश

कौशाम्बी के ग्राम चिल्ला शाहबाजी में अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 11 मौतों के बाद पुलिस ने तीन फरार आरोपियों पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित किया है। साथ ही 7 पुलिसकर्मियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया — यह मामला अवैध विस्फोटक इकाइयों पर प्रशासनिक विफलता की बड़ी तस्वीर उजागर करता है।

मुख्य बातें

31 अगस्त 2026 को कौशाम्बी के ग्राम चिल्ला शाहबाजी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 11 मौतें और 5 गंभीर घायल ।
SP सत्यनारायण ने तीन फरार आरोपियों — शकील, कहकसा बानो और आदिल — की गिरफ्तारी पर ₹25-25 हजार इनाम घोषित किया।
कुल 6 आरोपियों पर मुकदमा; 3 गिरफ्तार (एक मुठभेड़ में), 3 अभी फरार ।
कारखाने की अनुमति 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी — विस्फोट के समय संचालन अवैध था।
प्रयागराज परिक्षेत्र IGP ने पिपरी थाना व चायल चौकी के 7 निरीक्षक/उपनिरीक्षकों को निलंबित किया।
आरोपियों पर BNS धारा 105, 288 और विस्फोटक अधिनियम धारा 4/5/9बी के तहत मामला दर्ज।

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में 31 अगस्त 2026 को हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए तीन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित किया है। पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने यह ऐलान करते हुए आम जनता से सूचना देने की अपील की है। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 5 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

घटनाक्रम: क्या हुआ था 31 अगस्त को

31 अगस्त 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे थाना पिपरी क्षेत्र के ग्राम चिल्ला शाहबाजी में एक अवैध पटाखा निर्माण एवं भंडारण कारखाने में जोरदार विस्फोट हुआ। हादसे में 11 लोगों की जान चली गई, जबकि 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। जाँच में सामने आया कि जिस कारखाने में विस्फोट हुआ, उसकी अनुमति अली पुत्र निजामुद्दीन, निवासी महमूदपुर मनौरी, थाना पिपरी को केवल 31 मार्च 2026 तक के लिए जारी की गई थी — अर्थात विस्फोट के समय कारखाना अनुमति की समय-सीमा पार कर चुका था।

फरार आरोपियों की पहचान और इनाम

पुलिस के अनुसार, मामले में कुल छह आरोपियों के खिलाफ थाना पिपरी में मुकदमा अपराध संख्या 219/2026 दर्ज किया गया है। इनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है — जिनमें से एक को पुलिस मुठभेड़ के दौरान पकड़ा गया। तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं।

फरार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है: शकील पुत्र निजामुद्दीन, कहकसा बानो पत्नी नौशाद, और आदिल पुत्र नौशाद — तीनों निवासी महमूदपुर मनौरी, थाना पिपरी, जनपद कौशाम्बी। पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने तीनों की गिरफ्तारी पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित किया है।

कानूनी धाराएँ और पुलिस की कार्रवाई

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 288 तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 4/5/9बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटना के बाद से ही फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

गौरतलब है कि पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज परिक्षेत्र ने पिपरी थाना और चायल चौकी में तैनात सात निरीक्षक/उपनिरीक्षकों को अभियुक्तों के खिलाफ समय पर कार्रवाई न करने के आरोप में निलंबित कर दिया है — यह संकेत है कि प्रशासन इस मामले में जवाबदेही तय करने के प्रति गंभीर है।

जनता से अपील: सूचना गोपनीय रहेगी

पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को फरार आरोपियों के बारे में कोई जानकारी हो, तो वे तत्काल नजदीकी पुलिस थाना या जनपद कंट्रोल रूम को सूचित करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

आगे क्या होगा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस घटना से जुड़े अन्य तथ्य और उनकी कथित भूमिका और स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों पर नकेल कसने की माँग लंबे समय से उठती रही है। अनुमति की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कारखाना चलते रहने का तथ्य प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी विस्फोट अगस्त तक नहीं रुका — यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्थागत विफलता है। सात पुलिसकर्मियों का निलंबन स्वीकारोक्ति है कि चेतावनी के संकेत थे और उन पर ध्यान नहीं दिया गया। असली सवाल यह है कि अनुमति समाप्त होने के पाँच महीने बाद भी यह कारखाना बंद क्यों नहीं हुआ, और इस लापरवाही की जिम्मेदारी केवल निलंबन से तय नहीं होती — आपराधिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौशाम्बी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में कितने लोगों की मौत हुई?
31 अगस्त 2026 को ग्राम चिल्ला शाहबाजी, थाना पिपरी में हुए विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई और 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यह विस्फोट एक अवैध पटाखा निर्माण एवं भंडारण कारखाने में सुबह करीब 11:30 बजे हुआ था।
कौशाम्बी विस्फोट में फरार आरोपी कौन हैं और उन पर कितना इनाम है?
तीन फरार आरोपियों की पहचान शकील पुत्र निजामुद्दीन, कहकसा बानो पत्नी नौशाद और आदिल पुत्र नौशाद के रूप में हुई है — तीनों महमूदपुर मनौरी, थाना पिपरी के निवासी हैं। पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने तीनों की गिरफ्तारी पर ₹25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
कौशाम्बी ब्लास्ट में कितने पुलिसकर्मी निलंबित हुए और क्यों?
पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज परिक्षेत्र ने पिपरी थाना और चायल चौकी के 7 निरीक्षक/उपनिरीक्षकों को निलंबित किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने अभियुक्तों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की।
कौशाम्बी पटाखा फैक्ट्री की अनुमति वैध थी या अवैध?
जाँच में सामने आया कि कारखाने की अनुमति अली पुत्र निजामुद्दीन को 31 मार्च 2026 तक के लिए ही जारी की गई थी। विस्फोट 31 अगस्त 2026 को हुआ, यानी अनुमति की समय-सीमा समाप्त होने के पाँच महीने बाद भी कारखाना चल रहा था।
कौशाम्बी विस्फोट मामले में किन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है?
थाना पिपरी में मुकदमा अपराध संख्या 219/2026 दर्ज किया गया है। छह आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 288 तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 4/5/9बी के तहत मामला दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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