अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: 9 मौतें, 3 बच्चे शामिल — लाइसेंस रद्द के बावजूद चल रहा था कारखाना
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के रामोल-गतराड रोड स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई में 19 जुलाई की दोपहर हुए भीषण विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। गुजरात पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, 'न्यू गुजरात फायर वर्क्स' नाम से संचालित यह इकाई कथित तौर पर लाइसेंस समाप्त होने और पूर्व में बंद करने की सिफारिशों के बावजूद अवैध रूप से चल रही थी।
विस्फोट का घटनाक्रम
विस्फोट दोपहर लगभग 3:45 बजे वस्त्राल गांव की सीमा में सर्वे नंबर 629/1/2/3 पर स्थित फैक्ट्री में हुआ — जो रामोल पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) शिविर के पीछे नहर के पास एक खेत में है। धमाका इतना तीव्र था कि इसकी आवाज पाँच किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।
विस्फोट की चपेट में आकर पटाखे बनाने वाले शेड पूरी तरह ध्वस्त हो गए। पास की औद्योगिक इकाइयों की खिड़कियाँ चकनाचूर हो गईं और नहर के उस पार लगभग 500 मीटर दूर स्थित एक निर्माण कारखाने में लगे सीसीटीवी कैमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए।
बचाव अभियान
धमाके की आवाज सुनते ही पास में तैनात RAF के जवान सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचे और दमकल कर्मियों के आने से पहले ही बचाव कार्य शुरू कर दिया। अहमदाबाद अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा (AFES) ने घटनास्थल पर एक मिनी फाइटर, दो 20 किलोलीटर पानी के टैंकर, दो त्वरित हस्तक्षेप वाहन और एक एम्बुलेंस भेजी।
आसपास के कारखानों में काम करने वाले मजदूर धमाके की लहर से हिलने के बाद बाहर भाग गए। मलबे से पीड़ितों को निकालकर घायलों को एलजी अस्पताल और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। आग पर काबू पाने के बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल का मुआयना शुरू किया।
मृतकों और घायलों की स्थिति
विस्फोट के प्रभाव से कई पीड़ितों की पहचान मुश्किल हो गई। नौ पीड़ितों को एलजी अस्पताल ले जाया गया — चार को अस्पताल पहुँचते ही मृत घोषित किया गया, जबकि लगभग 95 प्रतिशत झुलस चुके चार अन्य लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एक घायल महिला का उपचार जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
अहमदाबाद सिविल अस्पताल ले जाए गए छह लोगों में से एक की मौत हो गई, जबकि पाँच का ट्रॉमा सेंटर के बर्न वार्ड में इलाज चल रहा है।
नियामक उल्लंघन और जांच
गुजरात पुलिस की जांच के अनुसार, इस घटना के पीछे लंबे समय से चल रही नियामक लापरवाही, पहले हुई एक घातक दुर्घटना, कथित अवैध संचालन और बार-बार सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की श्रृंखला है। पुलिस का आरोप है कि लाइसेंस समाप्त होने और फैक्ट्री बंद करने की सिफारिशों के बावजूद यह इकाई चालू रही। गौरतलब है कि इस तरह की घटनाएँ अक्सर उन इकाइयों में होती हैं जहाँ नियामक निगरानी कागजों तक सीमित रह जाती है।
आगे की कार्रवाई
फोरेंसिक जांच जारी है और पुलिस फैक्ट्री संचालकों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। यह घटना गुजरात में पटाखा उद्योग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है — विशेषकर तब, जब लाइसेंस रद्द होने के बाद भी इकाइयाँ चलती रहती हैं।