सागर जहरीली शराब कांड: NHRC सदस्य कानूनगो बांदा पहुंचे, ₹4 लाख मुआवजे और जांच पर दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो 15 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के सागर जिले में अवैध शराब से हुई मौतों की जाँच के सिलसिले में प्रभावित क्षेत्र बांदा पहुँचे और पीड़ित परिवारों से सीधे मुलाकात की। आयोग ने पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि पीड़ित परिजनों के बयान तत्काल दर्ज किए जाएं और अवैध शराब की आपूर्ति शृंखला में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पीड़ित परिवारों की शिकायतें और आयोग की फटकार
पीड़ित परिवारों ने कानूनगो के समक्ष गंभीर शिकायतें रखीं। परिजनों ने बताया कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अब तक उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं। कई मामलों में गाँवों में शराब पहुँचाने वाले सप्लायरों के नाम भी बयानों से गायब हैं, जिससे उन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की आशंका कमज़ोर पड़ रही है।
कानूनगो ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि जाँच में कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह पालन होना चाहिए, ताकि कार्रवाई मजबूत और निष्पक्ष रहे और किसी भी स्तर पर ऐसी चूक न हो जिसका फायदा आरोपी अदालत में उठा सकें।
अवैध शराब नेटवर्क की पहचान के निर्देश
NHRC सदस्य ने पुलिस को निर्देश दिया कि बड़े सप्लाई नेटवर्क से लेकर मोटरसाइकिलों के ज़रिए गाँवों में शराब बेचने वाले एजेंटों तक — सभी की सूची तैयार की जाए और उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जाँच इतनी मज़बूत होनी चाहिए कि दोष सिद्ध होने पर कोई भी आरोपी कानूनी खामी का लाभ उठाकर बच न सके।
कानूनगो ने यह भी कहा कि प्रभावित क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुआवजे की स्थिति और प्रशासन को निर्देश
प्रशासन ने आयोग को बताया कि जिन मामलों में मृत्यु का कारण अवैध शराब या नशीले पदार्थों से जुड़ा पाया गया है, उन मृतकों के परिवारों को प्रति व्यक्ति ₹4 लाख की आर्थिक सहायता के लिए राशि उपलब्ध करा दी गई है। इसके अतिरिक्त सात ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें डॉक्टरों द्वारा मृत्यु का कारण अभी निर्णायक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है — ऐसे मामलों में ₹2 लाख के मुआवजे की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।
कानूनगो ने प्रशासन से कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और अगले दिन तक पात्र परिवारों को राशि वितरित करने का प्रयास किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक रूप से प्रभावित किसी भी परिवार का नाम राहत एवं मुआवजे की प्रक्रिया से बाहर नहीं रहना चाहिए।
अनाथ बच्चों के भविष्य पर चिंता
NHRC ने घटना में परिजनों को खोने वाले बच्चों के भविष्य पर भी प्रशासन का ध्यान खींचा। कानूनगो ने बताया कि जो बच्चे इस कांड के कारण अनाथ हुए हैं या गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं, उनके लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया गया है। ऐसे बच्चों को भारत सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना के दायरे में लाने की प्रक्रिया आरंभ की जाए ताकि उनकी शिक्षा और भविष्य सुरक्षित रहे।
सरकारी परमिट वाली दुकान से बिक्री का गंभीर पहलू
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कथित तौर पर जिस शराब के सेवन से मौतें हुई हैं, उसकी बिक्री एक शासकीय परमिट वाली दुकान से होने की बात सामने आई है। कानूनगो ने कहा कि इस पहलू की अलग से और गंभीरता से जाँच होनी चाहिए — शराब की बिक्री और आपूर्ति की पूरी शृंखला, संबंधित दुकान की भूमिका और नियमों के पालन या उल्लंघन को स्पष्ट किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि मामले को राजनीतिक विवाद में बदलने से वास्तविक पीड़ितों को नुकसान हो सकता है और इस समय पीड़ित परिवारों को राहत और न्याय दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में आयोग की जाँच और मुआवजे से जुड़े निर्देशों के अनुपालन पर नज़र बनी रहेगी।