पिंपरी-चिंचवाड शराब कांड: मुख्य आरोपी विरका के अवैध मकान पर चलेगा PCMC का बुलडोजर, 24 घंटे का अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के पुणे के पिंपरी-चिंचवाड इलाके में हुए कथित जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी गुरुमंगल सिंह कर्नल सिंह विरका की मुश्किलें और गहरा गई हैं। पिंपरी-चिंचवाड नगर निगम (PCMC) ने विरका के घर को ‘अवैध निर्माण’ करार देते हुए 24 घंटे के भीतर खुद ध्वस्त करने का नोटिस थमाया है, अन्यथा निगम पुलिस सुरक्षा में बुलडोजर चलाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
नगर निगम के नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि विरका के निर्माण का पूरा ढाँचा अनधिकृत है। यदि निर्धारित समय सीमा में आरोपी या उसके परिवार ने अतिक्रमण नहीं हटाया, तो PCMC की टीम पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई करेगी। अधिकारियों के अनुसार, ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च भी आरोपी से ही वसूले जाने की संभावना है।
शराब कांड की पृष्ठभूमि
29 मई को पिंपरी-चिंचवाड क्षेत्र में कथित जहरीली शराब पीने से 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस त्रासदी ने पूरे इलाके में आक्रोश और दहशत का माहौल पैदा कर दिया। आरोप है कि विरका इस अवैध शराब के कारोबार का मुख्य विक्रेता था, और उसी का साम्राज्य अब प्रशासनिक कार्रवाई की जद में है।
तीन पुलिस अधिकारी निलंबित
घटना के बाद पुणे पुलिस प्रशासन ने हडपसर पुलिस स्टेशन से जुड़े तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया। निलंबित अधिकारियों में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय मोगले, सहायक पुलिस निरीक्षक हसीना सिकलगार और पुलिस उपनिरीक्षक हसन मुलाणी शामिल हैं। तीनों अधिकारी हडपसर थाने और उससे जुड़ी अपराध जाँच इकाई में तैनात थे।
‘बुलडोजर मॉडल’ की महाराष्ट्र में दस्तक
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब तक ‘बुलडोजर ऐक्शन’ मुख्यतः उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक शैली से जुड़ा रहा है। आलोचकों का कहना है कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होनी चाहिए, न कि आपराधिक मामलों में दंड का समानांतर माध्यम। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हाल के महीनों में ऐसी कार्रवाइयों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है।
आगे क्या
नोटिस की 24 घंटे की समय सीमा खत्म होते ही PCMC की टीम मौके पर पहुँचने की तैयारी में है। पुलिस सुरक्षा के बीच मकान ढहाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, जबकि शराब कांड की जाँच अब भी जारी है।