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भारत वैश्विक व्यवस्था में 'ब्रिज-बिल्डर' और संतुलनकर्ता: दक्षिण अफ्रीकी विश्लेषण रिपोर्ट

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भारत वैश्विक व्यवस्था में 'ब्रिज-बिल्डर' और संतुलनकर्ता: दक्षिण अफ्रीकी विश्लेषण रिपोर्ट

सारांश

एक दक्षिण अफ्रीकी विश्लेषण के अनुसार, भारत आज वैश्विक कूटनीति में वह देश बन चुका है जो अमेरिका, रूस, चीन और ग्लोबल साउथ — सबके बीच संतुलन साधता है। रणनीतिक स्वायत्तता की यह नीति और 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता भारत को एक ऐतिहासिक भूमिका की दहलीज़ पर खड़ा करती है।

मुख्य बातें

दक्षिण अफ्रीका के अखबार 'संडे इंडिपेंडेंट' में प्रकाशित रिपोर्ट में भारत को वैश्विक व्यवस्था का प्रमुख 'ब्रिज-बिल्डर' और संतुलनकर्ता बताया गया।
फापनानो फाशा (चेयरपर्सन, द सेंटर फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक थॉट) ने क्वाड को वैश्विक स्थिरता के लिए अहम बताया।
भारत ने क्वाड को औपचारिक सैन्य गठबंधन बनाने से इनकार किया — रणनीतिक स्वायत्तता और NAM विरासत बनाए रखने के लिए।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता 'मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' थीम के साथ कर रहा है।
PM मोदी ने 2025 में रियो डी जेनेरियो के 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मानव-केंद्रित वैश्विक दृष्टिकोण रखा था।

भारत आज वैश्विक कूटनीति में एक निर्णायक 'ब्रिज-बिल्डर' और संतुलनकर्ता की भूमिका में उभरा है। दक्षिण अफ्रीका के प्रतिष्ठित अखबार 'संडे इंडिपेंडेंट' में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, भारत के पास कमज़ोर पड़ती वैश्विक व्यवस्था को पुनर्गठित करने और उसे अधिक न्यायसंगत वैश्विक शासन की दिशा में ले जाने की क्षमता है। यह विश्लेषण ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

रिपोर्ट में क्या कहा गया

द सेंटर फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक थॉट के चेयरपर्सन फापनानो फाशा ने अपने लेख में तर्क दिया कि वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने में सक्षम 'कोएलिशन ऑफ द विलिंग' — यानी इच्छुक देशों के गठबंधन — में क्वाड की भूमिका अहम है। क्वाड में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। फाशा के अनुसार, भारत की विशिष्ट स्थिति इसे उत्तर और दक्षिण के बीच एक प्रभावी सेतु बनाती है।

रणनीतिक स्वायत्तता: भारत की विदेश नीति की धुरी

भारत ने क्वाड को एक औपचारिक सैन्य गठबंधन का रूप देने से कथित तौर पर इनकार किया है, ताकि वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रख सके। यह नीति भारत के गैर-गठबंधन आंदोलन (NAM) की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है। इस दृष्टिकोण के तहत भारत बिना किसी एकल गुट में बंधे — अमेरिका, रूस, चीन और यूरोपीय देशों — सभी के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है।

गौरतलब है कि यही लचीलापन भारत को एक साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ और पश्चिमी देशों का भरोसेमंद साझेदार बनने की क्षमता देता है — एक दुर्लभ कूटनीतिक संतुलन जो बहुत कम देश साध पाते हैं।

ग्लोबल साउथ में नेतृत्व और पश्चिम से साझेदारी

भारत विकासशील देशों के साथ संबंध मज़बूत करके और साउथ-साउथ सहयोग को बढ़ावा देकर ग्लोबल साउथ में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। वहीं, यूरोपीय संघ, यूके और नॉर्डिक देशों के साथ मज़बूत आर्थिक और कूटनीतिक संबंध बनाए रखकर वह पश्चिम का एक महत्वपूर्ण साझेदार भी बना हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि यह 'ब्रिज-बिल्डिंग' की भूमिका विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए प्रासंगिक है, क्योंकि यह एक न्यायपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की उनकी आकांक्षाओं से मेल खाती है।

ब्रिक्स अध्यक्षता और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण

भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता 'मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण' थीम के साथ कर रहा है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रतिपादित मानव-केंद्रित और मानवता-प्रथम विचारों का विस्तार है।

आलोचकों का कहना है कि भारत की इस बहुआयामी कूटनीति की असली परीक्षा तब होगी जब उसे किसी एक पक्ष को चुनने के लिए दबाव का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, वैश्विक संस्थाओं के कमज़ोर पड़ने का यह दौर भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नीति एक अंतर्निहित तनाव भी छुपाती है — जब अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा चरम पर पहुँचेगी, तो 'सबका साथ' की कूटनीति कितनी टिकाऊ होगी? ब्रिक्स अध्यक्षता और क्वाड की सदस्यता एक साथ निभाना अभी तक संभव रहा है, पर यह संतुलन भविष्य में कठिन हो सकता है। दक्षिण अफ्रीकी विश्लेषण भारत को जो भूमिका सौंपता है, वह आकर्षक है — लेकिन 'ब्रिज' बनने की कीमत यह है कि दोनों किनारे आपसे अपेक्षाएँ रखते हैं। असली परीक्षा किसी विश्लेषण में नहीं, बल्कि अगले बड़े वैश्विक संकट में होगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत को 'ब्रिज-बिल्डर' क्यों कहा जा रहा है?
दक्षिण अफ्रीकी अखबार 'संडे इंडिपेंडेंट' में प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार, भारत अमेरिका, रूस, चीन, यूरोपीय देशों और ग्लोबल साउथ — सभी के साथ एक साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है। यह क्षमता उसे विभिन्न देशों के बीच सेतु की भूमिका निभाने में सक्षम बनाती है।
भारत ने क्वाड को सैन्य गठबंधन बनाने से क्यों मना किया?
भारत ने अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति के तहत क्वाड को औपचारिक सैन्य गठबंधन बनाने से इनकार किया है। यह नीति गैर-गठबंधन आंदोलन (NAM) की विरासत से जुड़ी है और भारत को किसी एक गुट में बंधे बिना अपने राष्ट्रीय हित आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता देती है।
2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत का क्या एजेंडा है?
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता 'मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण' थीम के साथ कर रहा है। यह दृष्टिकोण PM मोदी द्वारा 2025 में रियो डी जेनेरियो के 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रतिपादित मानव-केंद्रित विचारों पर आधारित है।
ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका क्या है?
भारत विकासशील देशों के साथ संबंध मज़बूत करके और साउथ-साउथ सहयोग को बढ़ावा देकर ग्लोबल साउथ में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह भूमिका विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीकी महाद्वीप के लिए प्रासंगिक मानी गई है।
यह रिपोर्ट किसने और कहाँ प्रकाशित की?
यह विश्लेषण द सेंटर फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक थॉट के चेयरपर्सन फापनानो फाशा ने दक्षिण अफ्रीका के अखबार 'संडे इंडिपेंडेंट' में ओपिनियन लेख के रूप में प्रकाशित किया। इसमें भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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