भारत वैश्विक व्यवस्था में 'ब्रिज-बिल्डर' और संतुलनकर्ता: दक्षिण अफ्रीकी विश्लेषण रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत आज वैश्विक कूटनीति में एक निर्णायक 'ब्रिज-बिल्डर' और संतुलनकर्ता की भूमिका में उभरा है। दक्षिण अफ्रीका के प्रतिष्ठित अखबार 'संडे इंडिपेंडेंट' में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, भारत के पास कमज़ोर पड़ती वैश्विक व्यवस्था को पुनर्गठित करने और उसे अधिक न्यायसंगत वैश्विक शासन की दिशा में ले जाने की क्षमता है। यह विश्लेषण ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
रिपोर्ट में क्या कहा गया
द सेंटर फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक थॉट के चेयरपर्सन फापनानो फाशा ने अपने लेख में तर्क दिया कि वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने में सक्षम 'कोएलिशन ऑफ द विलिंग' — यानी इच्छुक देशों के गठबंधन — में क्वाड की भूमिका अहम है। क्वाड में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। फाशा के अनुसार, भारत की विशिष्ट स्थिति इसे उत्तर और दक्षिण के बीच एक प्रभावी सेतु बनाती है।
रणनीतिक स्वायत्तता: भारत की विदेश नीति की धुरी
भारत ने क्वाड को एक औपचारिक सैन्य गठबंधन का रूप देने से कथित तौर पर इनकार किया है, ताकि वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रख सके। यह नीति भारत के गैर-गठबंधन आंदोलन (NAM) की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है। इस दृष्टिकोण के तहत भारत बिना किसी एकल गुट में बंधे — अमेरिका, रूस, चीन और यूरोपीय देशों — सभी के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है।
गौरतलब है कि यही लचीलापन भारत को एक साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ और पश्चिमी देशों का भरोसेमंद साझेदार बनने की क्षमता देता है — एक दुर्लभ कूटनीतिक संतुलन जो बहुत कम देश साध पाते हैं।
ग्लोबल साउथ में नेतृत्व और पश्चिम से साझेदारी
भारत विकासशील देशों के साथ संबंध मज़बूत करके और साउथ-साउथ सहयोग को बढ़ावा देकर ग्लोबल साउथ में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। वहीं, यूरोपीय संघ, यूके और नॉर्डिक देशों के साथ मज़बूत आर्थिक और कूटनीतिक संबंध बनाए रखकर वह पश्चिम का एक महत्वपूर्ण साझेदार भी बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि यह 'ब्रिज-बिल्डिंग' की भूमिका विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए प्रासंगिक है, क्योंकि यह एक न्यायपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की उनकी आकांक्षाओं से मेल खाती है।
ब्रिक्स अध्यक्षता और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता 'मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण' थीम के साथ कर रहा है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रतिपादित मानव-केंद्रित और मानवता-प्रथम विचारों का विस्तार है।
आलोचकों का कहना है कि भारत की इस बहुआयामी कूटनीति की असली परीक्षा तब होगी जब उसे किसी एक पक्ष को चुनने के लिए दबाव का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, वैश्विक संस्थाओं के कमज़ोर पड़ने का यह दौर भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।