भारत ग्लोबल पावर बने तो जिम्मेदारी भी उठाए: अमेरिकी कांग्रेसमैन रो खन्ना का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी कांग्रेसमैन रो खन्ना ने 19 मई 2026 को वाशिंगटन में आयोजित कैपिटल हिल समिट 2026 में स्पष्ट कहा कि भारत अब एक उभरती वैश्विक शक्ति है और इस हैसियत के साथ उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी जिम्मेदारियाँ भी स्वीकार करनी होंगी। यह समिट अमेरिका-भारत फ्रेंडशिप काउंसिल द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सहयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
वैश्विक नेतृत्व की नई भूमिका
रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सहयोग पर आयोजित सत्र में खन्ना ने कहा, 'भारत को तय करना होगा कि वह दुनिया में नेतृत्व की इस नई जगह पर खुद को किस रूप में देखना चाहता है। अगर आप विश्व शक्ति बनना चाहते हैं, तो जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।' उन्होंने कहा कि भारत का बढ़ता अंतरराष्ट्रीय प्रभाव अब उससे अधिक सक्रिय वैश्विक भूमिका की माँग करता है।
खन्ना ने यह भी रेखांकित किया कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और उसकी अपनी महत्वाकांक्षाएँ हैं — ऐसे में उसे यह तय करना होगा कि वह वैश्विक मंच पर क्या भूमिका निभाना चाहता है।
यूक्रेन युद्ध में भारत की संभावित भूमिका
खन्ना ने विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इस संघर्ष को समाप्त कराने में एक रचनात्मक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, क्योंकि रूस के साथ उसके दीर्घकालिक और सुदृढ़ संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने भारत में भी और यहाँ अमेरिका में भी खुलकर कहा है कि भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। रूस के साथ उसके संवाद के रास्ते खुले हुए हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने यूक्रेन संघर्ष पर अब तक तटस्थ रुख बनाए रखा है और संयुक्त राष्ट्र में रूस-विरोधी प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया है।
गुटनिरपेक्षता से आगे बढ़ने का आग्रह
खन्ना ने कहा कि पारंपरिक रूप से भारत गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाता रहा है — किसी एक पक्ष के साथ खुलकर न खड़े होने की परंपरा। लेकिन उनके अनुसार आज की बदलती विश्व व्यवस्था में भारत को बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाना होगा। गौरतलब है कि यह वही विचार है जो पश्चिमी देश लंबे समय से भारत के सामने रखते आए हैं।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर हाल में कुछ तनाव उभरे हैं, लेकिन खन्ना ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बुनियादी रणनीतिक सोच अब भी अटूट है। उन्होंने कहा, 'हमारे दीर्घकालिक रणनीतिक हितों में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है।'
खन्ना के अनुसार, अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन — दोनों दल भारत के साथ मजबूत साझेदारी के पक्षधर हैं, खासकर रक्षा, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा के क्षेत्रों में।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित संबंध
खन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका-भारत संबंध केवल सामरिक सुविधा का गठबंधन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों को मिलकर बहुलवाद, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना चाहिए। उनके शब्दों में, अमेरिका को एक बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र के रूप में आगे बढ़ना होगा और भारत के साथ भी उसी भावना से काम करना होगा।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इन अपेक्षाओं के बीच अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को किस प्रकार संतुलित करता है।