विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी कोल्बी के बीच भू-राजनीतिक चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- भारत की भू-राजनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण है।
- यूएस और भारत के बीच गहरा सहयोग बढ़ रहा है।
- रक्षा औद्योगिक सहयोग पर बल दिया गया।
- भारत को एक प्रमुख शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
- सामूहिक सुरक्षा के लिए रणनीतिक हितों की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर और भारत की यात्रा पर आए अमेरिकी युद्ध विभाग के पॉलिसी अंडर सेक्रेटरी (उप रक्षा मंत्री के समकक्ष) एलब्रिज कोल्बी ने बुधवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों पर गहन चर्चा की गई।
बैठक के बाद, ईएएम जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, "यूएस के अंडर सेक्रेटरी ऑफ वॉर एलब्रिज कोल्बी से मिलकर प्रसन्नता हुई। मौजूदा भू-राजनीतिक हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।"
कोल्बी ने मंगलवार को दिल्ली के अनंता सेंटर में अपने भाषण में भारत को इंडो-पैसिफिक में स्थिर शक्ति संतुलन का अनिवार्य और केंद्रीय भागीदार माना।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत केवल एक महत्वपूर्ण साझेदार नहीं है, बल्कि एशिया के भविष्य को आकार देने वाली एक अनिवार्य शक्ति है।
कोल्बी ने कहा, 'भारत की भौगोलिक स्थिति, रणनीतिक स्वायत्तता, विशाल सैन्य क्षमता और बढ़ती आर्थिक ताकत उसे एशिया में संतुलन बनाए रखने के लिए अपरिहार्य बनाती है। हम भारत को ताकतवर, आत्मविश्वासी और स्वायत्त शक्ति के रूप में देखते हैं, न कि किसी पर निर्भर देश के रूप में।'
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के हित एशिया में किसी एक शक्ति के प्रभुत्व को रोकने, खुले व्यापार और राष्ट्रीय स्वायत्तता को मजबूत करने में जुड़े हुए हैं।
कोल्बी ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में, लंबी दूरी के सटीक हथियारों, समुद्री जागरूकता, पनडुब्बी रोधी युद्ध और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प ज़ाहिर किया।
उन्होंने रक्षा औद्योगिक सहयोग पर बल देते हुए कहा कि अमेरिका भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने में पूरा समर्थन करेगा। दोनों देशों के बीच को-प्रोडक्शन और को-डेवलपमेंट की विशाल संभावनाएं हैं।
कोल्बी ने कहा कि अमेरिका भारत को केवल एक अहम साझेदार के रूप में नहीं देखता, बल्कि एशिया में दीर्घकालिक शक्ति संतुलन बनाए रखने में एक आवश्यक सहयोगी के रूप में मानता है।
उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका की 'फ्लेक्सिबल रियलिज्म' और 'अमेरिका फर्स्ट' नीति भारत की 'भारत फर्स्ट' और 'इंडिया वे' के साथ गहराई से मेल खाती है। दोनों देश यथार्थवादी और राष्ट्रीय हित आधारित विदेश नीति में विश्वास रखते हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कोल्बी इस दौरे पर हैं।
कोल्बी ने स्पष्ट किया कि दोनों देश हर मुद्दे पर सहमत नहीं होंगे, लेकिन रणनीतिक हितों के आधार पर गहरे सहयोग की संभावना है। उन्होंने कहा, 'हमारी साझेदारी पुरानी औपचारिकताओं पर नहीं, बल्कि ठोस और टिकाऊ रणनीतिक हितों पर आधारित है।'
अमेरिकी युद्ध विभाग ने कोल्बी के दौरे की जानकारी देते हुए बताया कि फरवरी, २०२५ में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच रक्षा संबंधों पर हुई सहमति के लिए ठोस नीति बनाने पर चर्चा करने के लिए कोल्बी नई दिल्ली आए हैं।