भारत ने वैश्विक संकटों का मजबूती से सामना किया: विदेश मंत्री एस. जयशंकर
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने वैश्विक संकटों का मजबूती से सामना किया है।
- घरेलू क्षमताओं का विकास महत्वपूर्ण है।
- वैश्वीकरण के कारण संघर्ष का प्रभाव दुनिया भर में फैलता है।
- कोविड-19, युद्ध, और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौतियाँ हैं।
- समावेशी विकास और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को यह कहा कि भारत ने हाल के वैश्विक संकटों का मजबूती से सामना किया है। उन्होंने यह टिप्पणी पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके आर्थिक प्रभाव के संदर्भ में की।
जयशंकर ने आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह में अपने भाषण में कहा कि बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच, भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की चुनौतियों को काफी हद तक सफलतापूर्वक संभाला है।
उन्होंने कहा कि अब किसी भी क्षेत्र में होने वाले संघर्ष का प्रभाव केवल वहीं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्वीकरण के कारण इसका असर दुनिया के अन्य हिस्सों में भी महसूस किया जाता है।
उन्होंने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि हाल के समय में कई वैश्विक झटकों ने हमारी मजबूती की परीक्षा ली है और भारत इनसे मजबूती से बाहर निकला है।"
मंत्री ने यह भी बताया कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट ने वैश्विक ईंधन सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप हाइड्रोकार्बन की कमी भी देखी जा रही है।
जयशंकर ने कहा कि मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करना जोखिम को कम करने और रणनीतिक ताकत को बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था की ओर भी इशारा किया, जहां ताकत और प्रभाव का संतुलन निरंतर बदल रहा है, और कहा कि मौजूदा अस्थिरता संरचनात्मक है।
उनके अनुसार, तकनीक, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, संपर्कता और संसाधनों में तेजी से हो रहे परिवर्तनों ने देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा कि आज हर चीज का इस्तेमाल स्ट्रेटेजिकली किया जा रहा है, और कई मामलों में इसे हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस कारण, अब देशों और आर्थिक नीतियों में जोखिम कम करने, विविधता बढ़ाने और मजबूती पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
जयशंकर ने कोविड-19 महामारी, जारी युद्ध और जलवायु परिवर्तन को इस दशक की सबसे बड़ी चुनौतियाँ बताया। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, प्रतिनिधित्व वाली राजनीति और मजबूत नेतृत्व इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।