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क्या भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत–रूस संबंध वैश्विक स्थिरता को दिशा दे सकते हैं?

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क्या भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत–रूस संबंध वैश्विक स्थिरता को दिशा दे सकते हैं?

सारांश

भारत और रूस के बीच मजबूत संबंध, जो दशकों से चले आ रहे हैं, वर्तमान वैश्विक तनाव के बीच स्थिरता की नयी दिशा प्रदान कर सकते हैं। क्या यह साझेदारी विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी? जानें इस रिपोर्ट में।

मुख्य बातें

भारत और रूस के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं।
आगामी पुतिन की यात्रा से साझा हितों को बढ़ावा मिलेगा।
अफगानिस्तान में रणनीतिक सहयोग की आवश्यकता है।
रूस-भारत प्लस ढांचा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
वैश्विक दक्षिण में सहयोग बढ़ेगा।

मॉस्को, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान अशांत अंतरराष्ट्रीय स्थिति में, भारत और रूस अपने दशकों पुराने विश्वास, सद्भावना और मित्रता के मजबूत रिश्तों का उपयोग साझा हितों वाले क्षेत्रों में वैश्विक परिवर्तन को दिशा देने के लिए कर सकते हैं। यह जानकारी बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दी गई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के बाद, वैश्विक व्यवस्था की अस्थिरता के बीच, स्थिरता के दो प्रमुख स्तंभों के रूप में भारत और रूस के पास 'रूस–भारत प्लस' ढांचे को लागू करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। इसे पहले दक्षिण और मध्य एशिया में लागू किया जा सकता है, और बाद में अफ्रीका समेत वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों तक विस्तारित किया जा सकता है।

रणनीतिक मामलों के विश्लेषक अतुल अनेजा ने 'जियो पोलिटिका' के लिए लिखे एक लेख में कहा, "नए अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के उभरने के साथ, भारत और रूस जैसे दो मजबूत ध्रुवों को दक्षिण और मध्य एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए पूर्ण रणनीतिक स्पष्टता, उद्देश्य और आपसी विश्वास के साथ मिलकर काम करना होगा। इसके लिए 2+1 फॉर्मूला या रूस–भारत प्लस ढांचे को अपनाया जा सकता है, जिसमें भारत और रूस के साथ किसी तीसरे देश को विशेष क्षेत्रों में सामरिक स्तर पर जोड़ा जाए।"

रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस के रणनीतिक हित अफगानिस्तान में काफी हद तक मेल खाते हैं, जो दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया और चीन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार माना जाता है।

इसमें कहा गया है कि अफगानिस्तान के साथ भारत और रूस के विशेष संबंध क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं को बढ़ाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर किसी शत्रुतापूर्ण गैर-क्षेत्रीय शक्ति के रणनीतिक प्रभाव को सीमित करने में भी मदद कर सकते हैं। खासकर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद यह महत्वपूर्ण हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने बगराम एयरबेस पर नियंत्रण हासिल करने की धमकी दी थी, जिस पर सभी क्षेत्रीय शक्तियों ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने पिछले वर्ष अफगानिस्तान से बगराम एयरबेस का नियंत्रण अमेरिका को लौटाने की मांग की थी और ऐसा न करने पर 'बुरे परिणाम' की चेतावनी दी थी। यह एयरबेस काबुल से करीब 64 किलोमीटर दूर स्थित है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और रूस के भू-राजनीतिक हित न केवल अफगानिस्तान बल्कि मध्य एशिया के देशों में भी मजबूती से जुड़े हुए हैं। इससे इस संवेदनशील क्षेत्र में संयुक्त भारत–रूस पहलों को विकसित करने की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूँ कि भारत और रूस के बीच के संबंध ना केवल उनके द्विपक्षीय हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता में भी योगदान दे सकते हैं। इन दोनों देशों का आपसी विश्वास और सहयोग निश्चित रूप से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और रूस के रिश्तों का महत्व क्या है?
भारत और रूस के रिश्ते राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। ये दोनों देश एक-दूसरे के लिए एक मजबूत साझेदार हैं, जो वैश्विक स्थिरता को सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं।
भारत और रूस की साझेदारी किन क्षेत्रों में है?
भारत और रूस की साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में है, जैसे कि रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा।
रूस-भारत प्लस ढांचा क्या है?
रूस-भारत प्लस ढांचा एक बहुपरक सहयोग ढांचा है, जिसमें भारत और रूस के साथ किसी तीसरे देश को सामरिक स्तर पर जोड़ा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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