कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर आंदोलन वापस लिया, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत तीन मांगें मानी
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार, 25 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ तीन दौर की वार्ता के बाद जंतर-मंतर पर चल रहे अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी। पार्टी का कहना है कि सरकार ने उनकी तीनों प्रमुख मांगें — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापसी, और नीट पीड़ित परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा — सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर ली हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन राउंड की बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कई दिनों से जारी यह प्रदर्शन नीट परीक्षा विवाद की पृष्ठभूमि में शुरू हुआ था। पार्टी की पहली मांग — धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा — बैठक से कुछ देर पहले ही पूरी हो गई, जिसे सीजेपी ने अपनी पहली बड़ी जीत बताया।
एफआईआर वापसी पर सरकार का आश्वासन
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार ने सभी भाजपा शासित और भाजपा सहयोगी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का भरोसा दिया है। उनके अनुसार, दिल्ली में अकेले 15 से 20 एफआईआर दर्ज की गई थीं। सरकार ने कहा है कि वह सभी एफआईआर की प्रति मंगलवार तक साझा करेगी और तीन से चार दिनों में वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी।
नीट पीड़ित परिवारों के मुआवजे की मांग
सीजेपी की तीसरी मांग उन परिवारों के लिए ₹1 करोड़ मुआवजे की थी, जिन्होंने नीट पेपर लीक विवाद के बाद अपने प्रियजनों को खो दिया। पार्टी ने इस मांग के संदर्भ में सरकार से मिले आश्वासन का उल्लेख किया, हालांकि इस पर विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सीजेपी का आधिकारिक बयान
सौरव दास ने आंदोलन वापसी की घोषणा करते हुए कहा, 'कॉकरोच जनता पार्टी यह ऐलान करती है कि हम अच्छी नीयत से आंदोलन वापस ले रहे हैं, इस समझ के साथ कि तय शर्तों को तय टाइमलाइन के अंदर पूरा किया जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों में असंतोष चरम पर है।
आगे क्या होगा
सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार मंगलवार तक एफआईआर की प्रतियाँ साझा नहीं करती या तय समयसीमा में शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है। गौरतलब है कि यह वार्ता नीट पेपर लीक मामले की व्यापक पृष्ठभूमि में हुई है, जिसकी जाँच अभी भी जारी है।