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जंतर मंतर के लिए खाना ले जाने पर हिरासत का दावा झूठा: दिल्ली पुलिस का आधिकारिक खंडन

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जंतर मंतर के लिए खाना ले जाने पर हिरासत का दावा झूठा: दिल्ली पुलिस का आधिकारिक खंडन

सारांश

जंतर मंतर के लिए खाना ले जाने पर हिरासत का वायरल दावा झूठा निकला — दिल्ली पुलिस ने साफ किया कि रूटीन चेकपोस्ट जांच के दौरान केवल पहचान सत्यापन हुआ, कोई हिरासत नहीं। दक्षिण-पूर्व डीसीपी ने दावे को दुर्भावनापूर्ण बताया।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल उस दावे को 'झूठा और भ्रामक' बताया जिसमें तीन युवकों को जंतर मंतर के लिए खाना ले जाने पर हिरासत में लेने का आरोप था।
दक्षिण-पूर्व दिल्ली के डीसीपी ने एक्स पर आधिकारिक खंडन जारी कर स्पष्ट किया कि निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में कोई हिरासत नहीं हुई।
पुलिस के अनुसार वाहन को रूटीन पिकेट/चेकपोस्ट ड्यूटी के तहत केवल पहचान सत्यापन के लिए रोका गया था।
पूछताछ के दौरान ही वाहन चालक सामान लेकर चला गया; पुलिसकर्मियों को खाने का गंतव्य तब तक पता नहीं था।
पुलिस ने दावे को 'पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण' करार दिया।

दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई को सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रहे उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए खाना ले जा रहे तीन युवकों को निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया। दक्षिण-पूर्व दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इस दावे को 'झूठा और भ्रामक' करार दिया गया।

वायरल दावे की पृष्ठभूमि

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक उपयोगकर्ता ने पोस्ट किया था कि 'तीन युवा लड़कों को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर के लिए खाना ले जाने पर निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया है।' इस पोस्ट में यह भी जोड़ा गया था कि 'कई ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि छोटे-छोटे बच्चों को बिना किसी वजह के हिरासत में लिया जा रहा है।' यह पोस्ट तेज़ी से वायरल हुई और सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस छिड़ गई।

दिल्ली पुलिस का आधिकारिक स्पष्टीकरण

दक्षिण-पूर्व दिल्ली के डीसीपी ने स्वयं एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'जंतर मंतर के लिए खाना ले जा रहे लड़कों को निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिए जाने का दावा झूठा और भ्रामक है।' पुलिस ने घटनाक्रम का विस्तृत ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को खाना ले जाने से न रोका गया और न ही कोई बाधा उत्पन्न की गई।

पुलिस के बयान के अनुसार, रूटीन पिकेट/चेकपोस्ट ड्यूटी के तहत वाहन को केवल सवारों की पहचान सत्यापित करने और उनके आने-जाने का उद्देश्य जानने के लिए रोका गया था। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो नियमित सुरक्षा जांच के दौरान अपनाई जाती है।

घटनाक्रम का पूरा विवरण

पुलिस ने बताया कि जब पहचान पत्रों की जांच की जा रही थी, उसी दौरान वाहन चालक वाहन और उसमें रखा सामान लेकर वहां से चला गया। पूछताछ के दौरान वाहन में सवार लोगों ने बताया कि खाने का सामान प्रदर्शन स्थल पर ले जाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, वाहन चालक को उनमें से एक व्यक्ति के मित्र ने भेजा था और वह उनके व्यक्तिगत परिचय का नहीं था।

बयान में यह भी कहा गया कि 'जब तक चालक वहां से नहीं गया था, तब तक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को यह जानकारी भी नहीं थी कि भोजन प्रदर्शनकारियों के लिए ले जाया जा रहा है।'

पुलिस ने दावे को दुर्भावनापूर्ण बताया

गलत हिरासत के आरोपों को खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा, 'किया जा रहा दावा पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण है तथा इसका उद्देश्य नियमित सत्यापन प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत करना प्रतीत होता है।' पुलिस ने ज़ोर देकर कहा कि उसके कर्मी केवल निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामान्य जांच कर रहे थे।

आगे क्या

यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति की ओर ध्यान दिलाता है जिसमें प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर असत्यापित दावे तेज़ी से वायरल होते हैं और पुलिस को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जंतर मंतर पर विभिन्न समूहों के प्रदर्शन जारी हैं। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी नियमित सुरक्षा जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि सरकारी संस्थाएँ अब सोशल मीडिया को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकतीं। हालाँकि पुलिस का स्पष्टीकरण विस्तृत है, लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या रूटीन जांच के दौरान संचार की कोई कमी थी जिसने भ्रम की स्थिति पैदा की। जवाबदेही दोनों तरफ से ज़रूरी है — अफवाह फैलाने वालों से भी और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने वाली पुलिस से भी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर हिरासत दावे पर क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने इस दावे को 'झूठा और भ्रामक' बताया। दक्षिण-पूर्व दिल्ली के डीसीपी ने एक्स पर आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में किसी को खाना ले जाने पर हिरासत में नहीं लिया गया।
वाहन को चेकपोस्ट पर क्यों रोका गया था?
पुलिस के अनुसार वाहन को रूटीन पिकेट/चेकपोस्ट ड्यूटी के तहत रोका गया था — केवल सवारों की पहचान सत्यापित करने और उनके आने-जाने का उद्देश्य जानने के लिए। यह एक सामान्य सुरक्षा जांच प्रक्रिया थी, कोई विशेष कार्रवाई नहीं।
वाहन चालक के बारे में पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस ने बताया कि वाहन चालक को वाहन में सवार लोगों में से एक के मित्र ने भेजा था और वह उनके व्यक्तिगत परिचय का नहीं था। पहचान जांच के दौरान ही चालक वाहन और सामान लेकर वहां से चला गया।
क्या पुलिस को पता था कि खाना प्रदर्शनकारियों के लिए है?
नहीं। पुलिस के बयान के अनुसार, जब तक वाहन चालक वहां से नहीं गया था, तब तक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को यह जानकारी नहीं थी कि भोजन प्रदर्शनकारियों के लिए ले जाया जा रहा है। पूछताछ के दौरान वाहन में सवार लोगों ने यह जानकारी दी।
दिल्ली पुलिस ने वायरल दावे को कैसे चिह्नित किया?
दिल्ली पुलिस ने वायरल दावे को 'पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण' बताया। पुलिस का कहना है कि इस दावे का उद्देश्य नियमित सत्यापन प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत करना प्रतीत होता है।
राष्ट्र प्रेस
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