कैमरून की झील न्योस: खूबसूरत लेकिन जानलेवा, 1986 में आई थी बड़ी त्रासदी

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कैमरून की झील न्योस: खूबसूरत लेकिन जानलेवा, 1986 में आई थी बड़ी त्रासदी

सारांश

कैमरून की लेक न्योस एक खूबसूरत झील है जो अपनी खतरनाक विशेषताओं के लिए जानी जाती है। यह झील अचानक जानलेवा गैस का विस्फोट कर सकती है, जिसने 1986 में हजारों लोगों की जान ली। जानें, कैसे वैज्ञानिक इस खतरे को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

Key Takeaways

  • लेक न्योस एक खूबसूरत लेकिन जानलेवा झील है।
  • 1986 में गैस के विस्फोट ने हजारों लोगों की जान ली।
  • डीगैसिंग प्रणाली से खतरे को कम करने की कोशिश की जा रही है।
  • यह झील एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के गड्ढे में स्थित है।
  • अन्य झीलों पर भी शोध किया जा रहा है।

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दुनिया में कई अद्भुत और शांत जगहें हैं, जबकि कुछ स्थान खतरनाक और रहस्यमयी हैं। कैमरून का लेक न्योस भी इसी श्रेणी में आता है। देखने में यह झील शांत नजर आती है, लेकिन इसकी छिपी हुई भयावहता ने कई जानें ले ली हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि लेक न्योस दुनिया की सबसे खतरनाक और रहस्यमयी झीलों में से एक है।

यह झील एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के गड्ढे में स्थित है और इसका सबसे बड़ा रहस्य यह है कि यह अचानक कार्बन डाइऑक्साइड का घातक बादल छोड़ सकती है, जिसे 'लीम्निक विस्फोट' कहा जाता है। 21 अगस्त 1986 की शाम को इस झील से निकला गैस का बादल 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घाटी में फैल गया, जिससे लगभग 1800 लोगों, 3500 मवेशियों और अनगिनत पक्षियों की जान चली गई। लोग सोते हुए ही मारे गए।

लेक न्योस उत्तर-पश्चिमी कैमरून के ओकू ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित है, जो ज्वालामुखी विस्फोट से बने गड्ढे में पानी भरने से बनी है। झील के तल में लगभग 80 किलोमीटर गहरे मैग्मा का भंडार है, जो धीरे-धीरे CO2 छोड़ता है। यह गैस पानी में घुलकर झील की गहराई में जमा होती जाती है। जब दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो गैस अचानक बाहर निकलती है और भारी होने के कारण नीचे की ओर बहने लगती है। इस बादल में ऑक्सीजन की कमी होती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

21 अगस्त 1986 की घटना के महीनों बाद वैज्ञानिकों ने इसका कारण समझा। लेक न्योस की खूबसूरती के पीछे छिपा यह खतरा इसे दुनिया की सबसे खतरनाक क्रेटर झीलों में से एक बनाता है। प्राकृतिक सौंदर्य और उपजाऊ मिट्टी के बावजूद, CO2 का जमा होना और इसका अचानक विस्फोट इसे अत्यंत खतरनाक बनाता है। यह घटना दुनिया की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी।

इस खतरे को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने 2001 में 'डीगैसिंग' प्रणाली स्थापित की, जिसमें पाइप और फव्वारे से गैस को नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जाता है। 2011 में दो और पाइप लगाए गए। अब झील से गैस धीरे-धीरे निकल रही है, जिससे बड़ा विस्फोट होने का जोखिम कम हो गया है। वैज्ञानिक अन्य अफ्रीकी झीलों जैसे लेक मोनन का भी अध्ययन कर रहे हैं, जहां ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।

18 दिसंबर 2014 को लिए गए लैंडसेट 8 सैटेलाइट चित्र में लेक न्योस सामान्य दिखती है। इसमें छोटे सफेद बिंदुओं के रूप में गांव और बस्तियां नजर आती हैं, जो जंगलों और ज्वालामुखी पहाड़ों के बीच स्थित हैं। झील के चारों ओर का क्षेत्र पुरानी ज्वालामुखी मैदान का हिस्सा है, जो गिनी की खाड़ी तक फैला हुआ है।

Point of View

लेकिन इसकी खतरनाक विशेषताएं इसे एक गंभीर चिंता का विषय बनाती हैं। वैज्ञानिकों ने इस झील के खतरे को समझकर, इसे नियंत्रित करने के उपाय किए हैं। यह घटना हमें प्राकृतिक खतरों के प्रति सजग रहने की याद दिलाती है।
NationPress
22/03/2026

Frequently Asked Questions

लेक न्योस की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
लेक न्योस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अचानक घातक कार्बन डाइऑक्साइड गैस का विस्फोट कर सकती है।
1986 में लेक न्योस में क्या हुआ था?
1986 में लेक न्योस से निकले गैस के बादल ने लगभग 1800 लोगों और 3500 मवेशियों की जान ले ली।
डीगैसिंग प्रणाली क्या है?
डीगैसिंग प्रणाली एक नियंत्रण विधि है जिसमें पाइप और फव्वारे से गैस को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जाता है।
इस झील का स्थान क्या है?
लेक न्योस उत्तर-पश्चिमी कैमरून के ओकू ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित है।
क्या अन्य झीलें भी इस तरह के खतरे का सामना कर रही हैं?
हां, वैज्ञानिक अन्य अफ्रीकी झीलों जैसे लेक मोनन का भी अध्ययन कर रहे हैं, जहां ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
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