फ्रांस के सेटे में भारतीय नौसेना का अद्वितीय प्रदर्शन, हेरिटेज सिटी परेड में दिखी शक्ति
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय नौसेना ने फ्रांस में शानदार मार्चिंग परेड आयोजित की।
- यह परेड फ्रांसीसी नौसेना के 400 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में थी।
- आईएनएस सुदर्शिनी ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया।
- स्थानीय लोगों ने जहाज को निकट से देखा और भारतीय नौसेना की भूमिका को समझा।
- योग सत्र ने एकता और मानसिक संतुलन का संदेश दिया।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना ने फ्रांस में एक अद्भुत मार्चिंग परेड का आयोजन किया। यहाँ भारतीय मार्चिंग दल ने हेरिटेज सिटी परेड में भाग लिया। यह आयोजन फ्रांसीसी नौसेना के 400 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सेटे शहर की ऐतिहासिक सड़कों पर आयोजित किया गया।
नौसैनिक दल ने तिरंगा थामे हुए शहर की सड़कों पर शानदार मार्च किया, जिसे देखकर वहां उपस्थित जनसमूह ने उनकी तारीफ की। भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी फ्रांस पहुँचा, जो सेटे बंदरगाह पर आयोजित एक बड़े समुद्री महोत्सव का हिस्सा था। यह महोत्सव हर दो साल में होता है और भूमध्यसागर के सबसे बड़े समुद्री आयोजनों में से एक माना जाता है, जहाँ विश्वभर के जहाज और नौसैनिक एकत्र होते हैं।
सुदर्शिनी ने यहाँ न केवल औपचारिकता निभाई, बल्कि अनेक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी भी की। जहाज के जवानों ने विभिन्न देशों के नौसैनिकों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रशिक्षण कार्यशालाओं और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इसने आपसी समझ और मित्रता को और मजबूत किया।
सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब भारतीय नौसेना का मार्चिंग दल हेरिटेज सिटी परेड में शामिल हुआ। इस परेड में सुदर्शिनी के नौसैनिक दल ने तिरंगा लेकर सेटे के ऐतिहासिक मार्गों पर शानदार मार्च किया, जिसे देखकर वहां उपस्थित लोगों ने उनकी प्रशंसा की। भारतीय नौसैनिकों का अनुशासन और तालमेल देखने योग्य था।
नौसेना के अनुसार, खेल प्रतियोगिता में भी सुदर्शिनी की टीम ने उत्कृष्टता दिखाई। रोइंग प्रतियोगिता में टीम ने कांस्य पदक जीता, जो भारत के लिए गर्व का विषय है। महोत्सव के अंतिम दिन एक भव्य समुद्री परेड आयोजित की गई, जिसमें सभी जहाज एक साथ समुद्र में निकले। इस दौरान, सुदर्शिनी ने अपने पाल खोलकर बेहद सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
नौसेना के मुताबिक, जब जहाज सेटे बंदरगाह पर खड़ा था, तब इसे आम जनता के लिए खोला गया था। बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने जहाज को नजदीक से देखा, इसके बारे में जानकारी प्राप्त की और भारतीय नौसेना की भूमिका को समझा। इससे भारत और फ्रांस के बीच लोगों के स्तर पर जुड़ाव में वृद्धि हुई। इस दौरान एक विशेष योग सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय, फ्रांसीसी और इतालवी नौसैनिकों ने एक साथ योग किया। यह केवल शारीरिक फिटनेस का संदेश नहीं था, बल्कि एकता और मानसिक संतुलन का भी प्रतीक था।
जहाज पर एक आधिकारिक स्वागत समारोह भी आयोजित हुआ, जिसमें फ्रांस में भारत के राजदूत संजीव सिंगला ने मेज़बानी की। इस कार्यक्रम में कई देशों के अधिकारियों और मेहमानों ने भाग लिया। भारत के राजदूत ने यहाँ भारत और फ्रांस के बीच की मित्रता, मजबूत समुद्री सहयोग और साझा सुरक्षा के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि दोनों देश समुद्र में सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन के लिए साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। नौसेना का कहना है कि अब सुदर्शिनी अपनी अगली यात्रा पर निकल चुकी है, और वह कासाब्लांका की ओर जा रही है। यह यात्रा लोकायन 26 मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुदर्शिनी की यह यात्रा केवल एक जहाज की समुद्री यात्रा नहीं है, बल्कि भारत की मित्रता, संस्कृति और सहयोग का संदेश दुनिया तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है। भारतीय नौसेना के ऐसे जहाज वास्तव में चलते-फिरते दूत के समान कार्य करते हैं, जो “वसुधैव कुटुंबकम्” के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हैं।