27 जून 2026
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गाजियाबाद मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने बिल्डर संदीप सिंह से जुड़े 4 ठिकानों पर छापे मारे

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गाजियाबाद मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने बिल्डर संदीप सिंह से जुड़े 4 ठिकानों पर छापे मारे

सारांश

ईडी की यह कार्रवाई उन सेवानिवृत्त सुरक्षाकर्मियों से जुड़ी है जिन्हें 264 फ्लैट का वादा करके ठगा गया। बिल्डर संदीप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने फ्लैट बनाए बिना ही 41,544 वर्ग मीटर जमीन तीसरे पक्ष को बेच दी। गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली में 4 ठिकानों पर एक साथ छापे पड़े।

मुख्य बातें

ईडी ने 27 जून 2026 को गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली में 4 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
मामला बिल्डर संदीप सिंह ( मेसर्स श्रस्थ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड ) और सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के पदाधिकारियों से जुड़ा है।
संदीप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने 264 आवासीय फ्लैट बनाने का वादा करके एसएसबी सेवानिवृत्त अधिकारियों को ठगा।
फ्लैट पूरे किए बिना 41,544 वर्ग मीटर जमीन का आधा हिस्सा तीसरे पक्ष को बेचे जाने का आरोप है।
जांच पीएमएलए, 2002 के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस की 3 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई।
छापेमारी में वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने 27 जून 2026 को गाजियाबाद में जमीन और अचल संपत्ति धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के 4 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह छापेमारी बिल्डर संदीप सिंह और सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के पदाधिकारियों से जुड़े परिसरों पर की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 3 एफआईआर के आधार पर यह जांच शुरू की। इसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अनुसूचित अपराध माना गया है। एफआईआर के अनुसार, मेसर्स श्रस्थ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संदीप सिंह इस धोखाधड़ी के मुख्य लाभार्थी और प्रमुख साजिशकर्ता बताए गए हैं।

धोखाधड़ी का तरीका

जांच में सामने आया कि संदीप सिंह ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सेवानिवृत्त अधिकारियों से बनी सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के सदस्यों को झांसा दिया। उन्होंने समिति की आधी जमीन पर 264 आवासीय फ्लैट बनाने का वादा किया और बदले में शेष आधी जमीन पर बिक्री या विकास अधिकार माँगे। सदस्यों को तय समय सीमा में फ्लैट सौंपने या देरी पर मासिक किराया देने का भी आश्वासन दिया गया था।

हालाँकि, आरोपों के अनुसार, संदीप सिंह ने इस समझौते का दुरुपयोग करते हुए सदस्यों के लिए एक भी फ्लैट पूरा किए बिना ही 41,544 वर्ग मीटर जमीन का आधा हिस्सा किसी तीसरे पक्ष को बेच दिया। इस तरह उन्होंने कथित तौर पर अवैध लाभ अर्जित किया और सेवानिवृत्त सुरक्षाकर्मियों को उनके वैध हक से वंचित कर दिया। गौरतलब है कि यह मामला उन लोगों से जुड़ा है जिन्होंने देश की सेवा में वर्षों बिताए और अपनी जमा पूंजी आवास के लिए लगाई।

तलाशी में क्या मिला

छापेमारी के दौरान ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत धन के लेन-देन, संपत्तियों और कंपनी के वित्तीय विवरणों से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए। ईडी अब अनुसूचित अपराधों से उत्पन्न अपराध की आय के सृजन, छिपाव, कब्जे, अधिग्रहण और उपयोग की विस्तृत जांच कर रही है।

आगे की जांच

अधिकारियों के अनुसार, जब्त दस्तावेजों की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ती धोखाधड़ी की उस श्रृंखला का हिस्सा है जिस पर ईडी पिछले कुछ वर्षों से सख्ती से नजर रख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ईडी की यह कार्रवाई पूर्व में दर्ज एफआईआर के वर्षों बाद आई है — जो जवाबदेही की रफ्तार पर सवाल उठाती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या जब्त दस्तावेज संपत्ति कुर्की और पीड़ितों को मुआवजे तक पहुँचते हैं, या यह कार्रवाई भी महज छापे तक सिमटकर रह जाती है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजियाबाद मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने क्या कार्रवाई की?
ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने 27 जून 2026 को गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के 4 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बिल्डर संदीप सिंह और सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के पदाधिकारियों से जुड़े परिसरों पर की गई।
बिल्डर संदीप सिंह पर क्या आरोप हैं?
संदीप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एसएसबी सेवानिवृत्त अधिकारियों को 264 आवासीय फ्लैट बनाने का वादा करके ठगा और फिर फ्लैट पूरे किए बिना ही 41,544 वर्ग मीटर जमीन का आधा हिस्सा तीसरे पक्ष को बेच दिया। वे मेसर्स श्रस्थ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं और एफआईआर में मुख्य साजिशकर्ता बताए गए हैं।
सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति कौन है और इसके सदस्य कौन हैं?
सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति मुख्यतः सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सेवानिवृत्त अधिकारियों से मिलकर बनी है। इन्हीं सदस्यों को बिल्डर संदीप सिंह ने आवासीय फ्लैट और मासिक किराए का वादा करके कथित तौर पर धोखा दिया।
ईडी ने यह जांच किस आधार पर शुरू की?
ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 3 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। इस मामले को पीएमएलए, 2002 के तहत अनुसूचित अपराध माना गया है।
छापेमारी में क्या मिला और आगे क्या होगा?
तलाशी के दौरान धन के लेन-देन, संपत्तियों और कंपनी के वित्तीय विवरणों से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। ईडी अब अपराध की आय के सृजन, छिपाव और उपयोग की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जारी बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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