गाजियाबाद मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने बिल्डर संदीप सिंह से जुड़े 4 ठिकानों पर छापे मारे
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने 27 जून 2026 को गाजियाबाद में जमीन और अचल संपत्ति धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के 4 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह छापेमारी बिल्डर संदीप सिंह और सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के पदाधिकारियों से जुड़े परिसरों पर की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 3 एफआईआर के आधार पर यह जांच शुरू की। इसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अनुसूचित अपराध माना गया है। एफआईआर के अनुसार, मेसर्स श्रस्थ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संदीप सिंह इस धोखाधड़ी के मुख्य लाभार्थी और प्रमुख साजिशकर्ता बताए गए हैं।
धोखाधड़ी का तरीका
जांच में सामने आया कि संदीप सिंह ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सेवानिवृत्त अधिकारियों से बनी सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के सदस्यों को झांसा दिया। उन्होंने समिति की आधी जमीन पर 264 आवासीय फ्लैट बनाने का वादा किया और बदले में शेष आधी जमीन पर बिक्री या विकास अधिकार माँगे। सदस्यों को तय समय सीमा में फ्लैट सौंपने या देरी पर मासिक किराया देने का भी आश्वासन दिया गया था।
हालाँकि, आरोपों के अनुसार, संदीप सिंह ने इस समझौते का दुरुपयोग करते हुए सदस्यों के लिए एक भी फ्लैट पूरा किए बिना ही 41,544 वर्ग मीटर जमीन का आधा हिस्सा किसी तीसरे पक्ष को बेच दिया। इस तरह उन्होंने कथित तौर पर अवैध लाभ अर्जित किया और सेवानिवृत्त सुरक्षाकर्मियों को उनके वैध हक से वंचित कर दिया। गौरतलब है कि यह मामला उन लोगों से जुड़ा है जिन्होंने देश की सेवा में वर्षों बिताए और अपनी जमा पूंजी आवास के लिए लगाई।
तलाशी में क्या मिला
छापेमारी के दौरान ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत धन के लेन-देन, संपत्तियों और कंपनी के वित्तीय विवरणों से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए। ईडी अब अनुसूचित अपराधों से उत्पन्न अपराध की आय के सृजन, छिपाव, कब्जे, अधिग्रहण और उपयोग की विस्तृत जांच कर रही है।
आगे की जांच
अधिकारियों के अनुसार, जब्त दस्तावेजों की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ती धोखाधड़ी की उस श्रृंखला का हिस्सा है जिस पर ईडी पिछले कुछ वर्षों से सख्ती से नजर रख रही है।