क्या इसरो ने गगनयान मिशन के लिए एयर ड्रॉप टेस्ट में सफलता हासिल की?

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क्या इसरो ने गगनयान मिशन के लिए एयर ड्रॉप टेस्ट में सफलता हासिल की?

सारांश

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन के लिए एयर ड्रॉप टेस्ट में सफलता हासिल की है। यह परीक्षण मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों को दर्शाता है। जानिए इस परीक्षण के बारे में और इसकी विशेषताओं के बारे में।

मुख्य बातें

इसरो ने सफलतापूर्वक एयर ड्रॉप टेस्ट पूरा किया।
गगनयान मिशन के लिए पैराशूट-आधारित डेसिलरेशन सिस्टम का परीक्षण किया गया।
नकली क्रू मॉड्यूल को हेलीकॉप्टर द्वारा गिराया गया।
इस टेस्‍ट में कुल 10 पैराशूट का उपयोग किया गया।
उपकरणों को सुरक्षित रूप से बरामद किया गया और चेन्नई भेजा गया।

नई दिल्ली, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एयर ड्रॉप टेस्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (एसडीएससी) में आयोजित पहला इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-01) इसरो, भारतीय वायु सेना, डीआरडीओ, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल का संयुक्त प्रयास था।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "इसरो ने गगनयान मिशन के लिए पैराशूट-आधारित डेसिलरेशन सिस्टम के संपूर्ण प्रदर्शन हेतु पहला इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-01) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।"

यह टेस्ट पैराशूट-आधारित डेसिलरेशन सिस्टम के सिस्टम लेवल क्वालिफिकेशन का हिस्सा है, जिसमें डेसिलरेशन सिस्टम को शामिल करते हुए एक नकली क्रू मॉड्यूल को हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर गिराया जाता है।

इसरो ने कहा, "गगनयान मिशनों में, क्रू मॉड्यूल (सीएम) के टर्मिनल फेज के दौरान एक पैराशूट-आधारित डेसिलरेशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है ताकि क्रू मॉड्यूल के टचडाउन वेग को समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग के लिए स्वीकार्य सीमा तक कम किया जा सके।"

आईएडीटी-01 के दौरान, पैराशूट प्रणाली और उसके लेआउट को गगनयान मिशनों के समान रखा गया था।

इसमें 10 पैराशूट शामिल थे। 4.8 टन वजन के नकली क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर का उपयोग कर लगभग 3 किमी की ऊंचाई से छोड़ा गया।

इसरो ने कहा, "डेसिलरेशन सिस्टम की शुरुआत एसीएस मोर्टार दागने से हुई, जो 2.5 मीटर के एसीएस पैराशूट को तैनात करता है, जिसके बाद एपेक्स कवर को अलग किया जाता है।"

ड्रोग पैराशूट ने डेसिलरेशन का पहला चरण प्रदान किया, जिसके बाद उन्हें छोड़ा गया ताकि तीन पायलट पैराशूट तीन मुख्य पैराशूट को तैनात कर सकें।

इसरो ने कहा कि स्पलैशडाउन के बाद, नकली क्रू मॉड्यूल को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया गया और आईएनएस अन्वेषा पर चेन्नई बंदरगाह वापस भेज दिया गया।

स्पेस एजेंसी ने कहा, "अंडरस्लंग बॉडी की गतिशीलता को समझने के लिए सीएम के साथ-साथ हेलीकॉप्टर की व्यापक मॉडलिंग की गई"। टीएबी की मंजूरी मिलने से पहले कई परीक्षण उड़ानें पूरी की गईं।

इसरो ने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न तैनाती स्थितियों में इसी तरह के टेस्ट किए जाने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूँ कि इसरो की यह उपलब्धि न केवल विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है। गगनयान मिशन के लिए किए गए प्रयास हमारी युवा पीढ़ी को प्रेरित करेंगे और देश की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया अध्याय खोलेंगे।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गगनयान मिशन क्या है?
गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसका उद्देश्य मानव को अंतरिक्ष में भेजना है।
एयर ड्रॉप टेस्ट का महत्व क्या है?
यह टेस्ट गगनयान मिशन के लिए पैराशूट-आधारित डेसिलरेशन सिस्टम की कुशलता को सुनिश्चित करता है।
इसरो ने एयर ड्रॉप टेस्ट कब किया?
इसरो ने यह टेस्ट 25 अगस्त को किया।
क्या इसरो के पास अन्य अंतरिक्ष मिशन हैं?
हाँ, इसरो के पास कई अन्य अंतरिक्ष मिशन हैं, जैसे चंद्रयान और मंगलयान।
गगनयान मिशन की समयसीमा क्या है?
गगनयान मिशन 2023 के अंत तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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