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राम मंदिर चंदा विवाद: ट्रस्ट प्रभारी प्रकाश गुप्ता बोले — गिनती की ज़िम्मेदारी स्टेट बैंक की थी, ट्रस्ट का कोई संबंध नहीं

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राम मंदिर चंदा विवाद: ट्रस्ट प्रभारी प्रकाश गुप्ता बोले — गिनती की ज़िम्मेदारी स्टेट बैंक की थी, ट्रस्ट का कोई संबंध नहीं

सारांश

राम मंदिर चंदा विवाद में ट्रस्ट कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने साफ कहा — गिनती SBI की ज़िम्मेदारी थी, ट्रस्ट का कोई संबंध नहीं। आरोपी टिन्नू यादव परिसर देखरेख में था, काउंटिंग में नहीं। जाँच जारी है।

मुख्य बातें

ट्रस्ट कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने 2 जुलाई को कहा कि चंदे की काउंटिंग की ज़िम्मेदारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की थी।
ट्रस्ट और SBI के बीच औपचारिक अनुबंध था; बैंक दैनिक भुगतान पर काउंटिंग कर्मी लाता था।
ट्रस्ट की ओर से केवल एक व्यक्ति देखरेख के लिए मौजूद रहता था, लेकिन गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी।
गिरफ्तार आरोपी टिन्नू यादव परिसर देखरेख और वीआईपी दर्शन व्यवस्था का प्रभारी था।
गुप्ता के अनुसार गड़बड़ी बैंक कर्मियों द्वारा हुई; ट्रस्ट का इससे कोई संबंध नहीं।
मामले में जाँच जारी है।

अयोध्या में राम मंदिर के चंदे को लेकर उठे विवाद पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने 2 जुलाई को स्पष्ट किया कि दान राशि की गिनती (काउंटिंग) की समस्त ज़िम्मेदारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की थी, और ट्रस्ट का इस प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। उनके अनुसार, ट्रस्ट और बैंक के बीच एक औपचारिक करार था जिसके तहत काउंटिंग का कार्य बैंक के अधीन संचालित होता था।

ट्रस्ट की संरचना और भूमिका

प्रकाश गुप्ता ने बताया कि ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ था और उसके नियम-कायदे भी उसी के अनुरूप बनाए गए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के नियमों और भूमिका की विस्तृत जानकारी केवल ट्रस्टी ही दे सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट में केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि, राज्य सरकार का एक प्रतिनिधि और स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी शामिल होते हैं। इन्हीं की देखरेख में ट्रस्ट कार्य करता है।

काउंटिंग प्रक्रिया और SBI की भूमिका

गुप्ता के अनुसार, चंदे की गिनती के लिए SBI के साथ अनुबंध था। बैंक अपने स्तर पर दैनिक भुगतान के आधार पर काउंटिंग कर्मियों को लाता था — ये लोग बैंक के नियमित कर्मचारी नहीं थे। ट्रस्ट की ओर से केवल एक व्यक्ति देखरेख के लिए मौजूद रहता था, लेकिन गुप्ता ने कहा, 'ट्रस्ट को यह संज्ञान नहीं था कि ये लोग चोरी कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि उनकी समझ में गड़बड़ी बैंक कर्मियों द्वारा की गई, जिसका ट्रस्ट या उसके किसी सदस्य से कोई संबंध नहीं है।

टिन्नू यादव और आरोपियों की गिरफ्तारी

गिरफ्तार आरोपियों के बारे में गुप्ता ने बताया कि टिन्नू यादव की ज़िम्मेदारी मंदिर परिसर की देखरेख और वीआईपी दर्शन व्यवस्था की थी। कैंपस के भीतर हर किसी की पहुँच नहीं थी, इसलिए यह ज़िम्मेदारी एक पुराने और विश्वस्त व्यक्ति को सौंपी गई थी। काउंटिंग में ट्रस्ट की कोई भूमिका नहीं थी — जो लोग काउंटिंग में थे, वे SBI द्वारा लाए गए थे और उनके बारे में ट्रस्ट को कोई जानकारी नहीं थी। गुप्ता ने कहा कि 'इस मामले में जाँच जारी है।'

आरोपों पर ट्रस्ट का पक्ष

चंदा चोरी के आरोपों पर गुप्ता ने कहा कि जो लोग ट्रस्ट के विरोधी रहे हैं या जिनकी विपरीत मानसिकता है, वे आरोप लगाएंगे ही। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ट्रस्ट के किसी सदस्य का इस गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं है। यह मामला अब जाँच एजेंसियों के अधीन है और सच्चाई जाँच के बाद ही सामने आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये के दान की गिनती हो रही थी, तो ट्रस्ट की निगरानी प्रणाली इतनी कमज़ोर क्यों थी। SBI पर ज़िम्मेदारी डालना कानूनी दृष्टि से सही हो सकता है, पर नैतिक जवाबदेही से यह ट्रस्ट को मुक्त नहीं करता। राम मंदिर जैसी राष्ट्रीय आस्था से जुड़ी संस्था में वित्तीय पारदर्शिता की अपेक्षा सर्वोच्च होनी चाहिए — और इस विवाद ने उजागर किया है कि निगरानी तंत्र में गंभीर खामियाँ थीं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा विवाद क्या है?
अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के रूप में आई राशि की गिनती के दौरान कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ट्रस्ट कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता के अनुसार, काउंटिंग की ज़िम्मेदारी SBI की थी और ट्रस्ट का इससे प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
चंदे की गिनती की ज़िम्मेदारी किसकी थी?
ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच एक अनुबंध था, जिसके तहत SBI काउंटिंग कर्मियों को लाता था और दान राशि की गिनती कर बैंक में जमा करता था। ट्रस्ट का केवल एक व्यक्ति देखरेख के लिए मौजूद रहता था।
टिन्नू यादव की क्या भूमिका थी?
टिन्नू यादव मंदिर परिसर की देखरेख और वीआईपी दर्शन व्यवस्था का प्रभारी था। गुप्ता के अनुसार, काउंटिंग में उसकी कोई सीधी भूमिका नहीं थी; परिसर में सीमित पहुँच के कारण उसे यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।
ट्रस्ट का गठन कैसे हुआ और इसमें कौन शामिल हैं?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ था। इसमें केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि, राज्य सरकार का एक प्रतिनिधि और स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी शामिल होते हैं।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
प्रकाश गुप्ता ने बताया कि मामले में जाँच जारी है। आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जाँच एजेंसियाँ पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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